रोज़मर्रा की सामग्रियों का धातुओं और अधातुओं के रूप में वर्गीकरण

अनुवाद : भरत त्रिपाठी | पुनरीक्षण : सुशील जोशी | कॉपी एडिटर : अतुल अग्रवाल

विद्यार्थी प्रिपरेटरी स्‍टेज के ईवीएस और मिडिल स्‍टेज की विज्ञान पाठ्यचर्या के अन्तर्गत विभिन्न कक्षाओं में धातुओं और अधातुओं के गुणों के बारे में पढ़ते हैं। क्या वे रोज़मर्रा इस्तेमाल की जाने वाली सामग्रियों को इन श्रेणियों में वर्गीकृत करने के लिए पाठ्यपुस्तक के तथ्यों का उपयोग कर सकते हैं?

कक्षा-6 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, पुनर्मुद्रण 2025-26) के अध्याय-6 (‘हमारे आस-पास की सामग्री’) में विद्यार्थी पढ़ते हैं कि सभी “वस्तुएँ विभिन्न सामग्रियों से बनी होती हैं”, और यह कि सभी “सामग्रियों में विभिन्न गुण होते हैं जो उनके उपयोग को निर्धारित करते हैं।”1 वे यह भी सीखते हैं कि “पदार्थों को उनके गुणों में समानता या अन्तर के आधार पर समूहबद्ध किया जा सकता है।1 विद्यार्थियों को अपने परिवेश में मौजूद पदार्थों को चमक, कठोरता और पारदर्शिता जैसे गुणों के आधार पर वर्गीकृत करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। धातुओं के बारे में विद्यार्थी यहाँ पहली बार नहीं पढ़ते हैं। उन्हें इस श्रेणी की सामग्रियों से कक्षा-3 की पर्यावरण अध्ययन (ईवीएस) की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025-26) अध्याय-10 (‘वस्तुओं की दुनिया’) में परिचित कराया जा चुका होता है।2 इस अध्याय में दी गई एक गतिविधि विद्यार्थियों को अपनी कक्षा में उन वस्तुओं की पहचान करने के लिए प्रोत्साहित करती है जो धातुओं से बनी हैं (जैसे कब्‍जे, कीलें और चिटकनियाँ)। धातुओं का उल्लेख कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025-26) के अध्याय-3 (‘विद्युत : परिपथ एवं उनके घटक’) में फिर से आता है। यहाँ विद्यार्थी पढ़ते हैं कि “…धातु विद्युत की चालक होती हैं, और इसलिए इनका उपयोग विद्युत-तार बनाने के लिए किया जाता है।”3 लेकिन विद्यार्थियों को धातुओं और अधातुओं के गुणों के साथ औपचारिक रूप से कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2005-26) के अध्याय-4 (‘धातुओं और अधातुओं का संसार’) में परिचित कराया जाता है। ख़ुद करके देखो गतिविधियों की एक शृंखला के माध्यम से विद्यार्थी सीखते हैं कि : “धातुएँ सामान्यतः कठोर, चमकदार, आघातवर्धनीय एवं तन्य होती हैं तथा ऊष्मा और विद्युत की सुचालक होती हैं।”4 इस परिचय से विद्यार्थी क्‍या सीखते हैं।

विद्यार्थी क्या सीखते हैं?

मैं एक सरकारी विद्यालय में कक्षा-9 की विज्ञान कक्षा में थी। कक्षा-9 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, पुनर्मुद्रण 2025-26) के अध्याय-2 (‘क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं?’) में धातुओं, अधातुओं और उपधातुओं के गुणों और उदाहरणों की सूची दी गई है।5 चूँकि विद्यार्थियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे मिडिल स्‍टेज में सामग्रियों को इन श्रेणियों में वर्गीकृत करने की क्षमता विकसित कर लेंगे, इसलिए मैंने इस विषय के इर्द-गिर्द एक चर्चा शुरू करने का निर्णय लिया (बॉक्स-1 देखें)।

बॉक्स-1 : पाठ्यचर्या से सम्बन्ध

सामग्रियों के धातु और अधातु श्रेणियों में वर्गीकरण पर चर्चाएँ और गतिविधियाँ शिक्षकों को निम्नलिखित लक्ष्य हासिल करने में सहायता कर सकती हैं :

  • मिडिल स्‍टेज के विज्ञान के लिए पाठ्यचर्या सम्बन्धी लक्ष्य :
  • CG-1 : पदार्थ और उसके घटकों, गुणों और व्यवहार की दुनिया की खोज करना। विशेष रूप से, यह विद्यार्थियों में निम्‍नलिखित क्षमता को विकसित करने में सहायक हो सकता है (C-1.1) : “अवलोकन योग्य भौतिक (ठोस, तरल, गैस…पारदर्शी…चालक, अचालक) और रासायनिक (शुद्ध, अशुद्ध; अम्ल, क्षार; धातु, अधातु; तत्त्व, यौगिक) गुणों के आधार पर पदार्थों का वर्गीकरण करना।
  • CG-6 : विज्ञान के ज्ञान के उद्विकास और वैज्ञानिक जाँच करके विज्ञान की प्रकृति और प्रक्रियाओं की खोज करना। विशेष रूप से, यह विद्यार्थियों को निम्‍नलिखित क्षमता विकसित करने में सहायता कर सकता है (C-6.2) : “वैज्ञानिक शब्दावली का उपयोग करके प्रश्न तैयार करना…और साक्ष्य के रूप में डेटा एकत्र करना (प्राकृतिक वातावरण के अवलोकन, सरल प्रयोगों की रूपरेखा बनाने या सरल वैज्ञानिक उपकरणों के उपयोग के माध्यम से)।6
  • इस विषयवस्तु के अध्याय पर मिडिल स्‍टेज के विद्यार्थियों के लिए सीखने के उद्देश्य :
  • सामान्यतः परिचित पदार्थों के बीच उनके मोड़े जाने और चादरों के रूप में ढाले जाने, तारों के रूप में खींचे जाने, टनटन वाली ध्वनि उत्पन्न करने, बिजली का चालन करने और ऊष्मा का चालन करने की क्षमता के आधार पर अन्तर करना ताकि वे धातुओं के विभिन्न गुणों को परिभाषित कर सकें।
  • सामान्यतः परिचित पदार्थों को धातुओं और अधातुओं के रूप में वर्गीकृत करना ताकि उनके भौतिक गुणों की व्याख्या की जा सके।
  • धातुओं और अधातुओं के भौतिक और रासायनिक गुणों की पुष्टि के लिए, किसी विशिष्ट कार्य हेतु दी गई सामग्री की उपयोगिता का अनुमान लगाना।7

मैंने विद्यार्थियों से पूछा, “धातुएँ क्या होती हैं?” लगभग सभी विद्यार्थियों ने हाथ उठाए। कुछ ने धातुओं के गुण गिनाए (‘कठोर’, ‘आघातवर्धनीय’, ‘तन्य’, ‘बिजली की अच्छी सुचालक’), जबकि अन्य ने उदाहरण साझा किए (जैसे ‘सोना’ और ‘चाँदी’)। मैंने कक्षा की खिड़की के पास संगमरमर का एक टुकड़ा देखा। उसकी ओर इशारा करते हुए मैंने पूछा : “क्या संगमरमर एक धातु है?” कई विद्यार्थियों ने “हाँ” कहा। उत्सुकतावश मैंने पूछा, “आपको क्यों लगता है कि संगमरमर एक धातु है?” विद्यार्थियों ने यह तर्क दिया : “संगमरमर कठोर होता है। धातुएँ कठोर होती हैं। इसलिए संगमरमर भी एक धातु होनी चाहिए।” मैंने जवाब दिया, “हाँ, धातुओं का एक गुण यह है कि वे कठोर होती हैं। लेकिन धातुओं में अन्य गुण भी होते हैं। आप सभी ने इन गुणों की सूची बनाई थी। धातुएँ चमकदार, आघातवर्धनीय, तन्य और ऊष्मा तथा विद्युत की सुचालक होती हैं। क्या संगमरमर में इनमें से कोई गुण दिखता है?” विद्यार्थियों ने मेरे सवाल पर कुछ मिनट तक सोचा। उनमें से एक ने कहा, “यह बिजली का चालन नहीं करेगा।” दूसरे ने कहा : “यह तन्य नहीं है।” तीसरे विद्यार्थी ने कहा : “यह चमकदार है।” मैंने बाक़ी विद्यार्थियों से पूछा कि क्या वे आख़िरी बात से सहमत थे। उनमें से कई सहमत थे। एक और विद्यार्थी ने कहा : “संगमरमर आघातवर्धनीय है।” आश्चर्यचकित होकर मैंने पूछा, “तुम ऐसा क्यों कह रहे हो?” उसने बताया कि उसने संगमरमर के फ़र्श वाले घर देखे थे। इन फ़र्शों में संगमरमर चादर के रूप में था। पाठ्यपुस्तक आघातवर्धनीय सामग्रियों को ऐसी सामग्री के रूप में परिभाषित करती है जिन्हें पीटकर चादर का रूप दिया जा सकता है। इसलिए उस विद्यार्थी के लिए संगमरमर आघातवर्धनीय था।

कुछ और विद्यार्थियों ने बताया कि उन्होंने भी संगमरमर की चादर का उपयोग फ़र्श बनाने के लिए होते देखा था। एक विद्यार्थी ने कहा : “संगमरमर ऊष्मा का चालन कर सकता है।” जब मैंने पूछा कि उसे यह कैसे पता चला, विद्यार्थी ने समझाया कि उसने देखा था कि जब संगमरमर को सीधे धूप में रखा जाता है या गर्मी के स्रोत के पास रखा जाता है, वह छूने पर गर्म लगता है। चूँकि विद्यार्थियों ने अपनी पाठ्यपुस्तक में सूचीबद्ध धातुओं के कई गुणों को संगमरमर पर लागू किया था तो मैंने पूछा, “आपने अपने सहपाठियों की राय सुनी। आप सभी क्या सोचते हैं? क्या संगमरमर एक धातु है?” कक्षा के अधिकांश विद्यार्थियों ने जवाब दिया कि वह धातु है।

मैंने कुछ अन्‍य सरकारी विद्यालयों का दौरा किया। वहाँ के कक्षा-9 के विद्यार्थियों से भी इसी तरह के प्रश्न पूछे। उन्होंने भी इसी तरह की समझ दिखाई। इसकी और गहराई से जाँच करने के लिए, मैंने रोज़मर्रा की 15 वस्तुओं की एक सूची तैयार की। यह सूची कक्षा-6 और 7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में धातुओं या अधातुओं के उदाहरणों के रूप में सूचीबद्ध सामग्रियों से बनी थी। मैंने यह सूची तीन सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालयों के कक्षा-9 के 56 विद्यार्थियों के साथ साझा की। विद्यार्थियों को सामग्रियों को निम्नलिखित श्रेणियों में से किसी एक में छाँटने के लिए कहा गया था : धातु, अधातु या दोनों में से कोई नहीं। इस अभ्‍यास में विद्यार्थियों की मदद करने के लिए मैंने शिक्षक की टेबल पर इनमें से कुछ वस्तुओं का प्रदर्शन तैयार किया (चित्र-1 देखें)।

metals and nonmetals fig 1
चित्र-1 : रोज़मर्रा की वस्तुओं का प्रदर्शन जिसे विद्यार्थियों को वर्गीकृत करना था। इसमें एक कठोर प्लास्टिक का टुकड़ा, थोड़ा-सा सल्‍फर, पेन्सिल में लगी ग्रेफ़ाइट की छड़, कुछ सिक्के, संगमरमर का एक टुकड़ा, सोने की एक अँगूठी, स्टील का एक चम्मच, ईंट का एक टुकड़ा, पारे वाला एक थर्मामीटर और कुछ एल्युमिनियम फ़ॉइल थे। ये वस्तुएँ जिस पदार्थ से बनी थीं उन्हें धातु या अधातु के रूप में वर्गीकृत करने से पहले विद्यार्थियों को इनका अवलोकन करने इन्हें छूकर, उठाकर देखने के लिए आमंत्रित किया गया। Credits: This image was created for i wonder… using ChatGPT, under prompting by Chitra Ravi (July 31, 2025). License: CC BY-NC 4.0.

मैंने टेबल पर एक विद्युत परिपथ भी रखा। पहले विद्यार्थियों को प्रदर्शन में रखी किसी भी वस्तु की जाँच करने या उनकी विद्युत चालकता का परीक्षण करने के लिए बुलाया गया। और फिर अपने जवाब के लिए दी गई शीटों में अपने विकल्प अंकित करने के लिए कहा गया। जब विद्यार्थियों ने अपने जवाब जमा कर दिए तो मैंने सूची में प्रत्येक वस्तु का नाम पढ़ा और विद्यार्थियों को अपने जवाब साझा करने और उनके औचित्य को बताने के लिए बुलाया (तालिका-1 देखें)।

वस्तुएँविद्यार्थियों द्वारा दिए गए उत्तरों की संख्यासबसे सामान्य उत्तर के प्रमुख कारण
धातुअधातुदोनों में कोई नहींरिक्त
लकड़ी की कुर्सी और टेबल3323अपनी कठोरता के कारण धातु के रूप में वर्गीकृत की गईं। अधातु के रूप में वर्गीकृत की गईं क्योंकि ये चमकदार, आघातवर्धनीय या तन्य नहीं हैं। कुछ विद्यार्थियों ने कहा कि ये ऊष्मा और विद्युत की कुचालक हैं।
कठोर प्लास्टिक का टुकड़ा3422अधिकांश विद्यार्थियों ने इसे अपनी कठोरता के कारण धातु के रूप में वर्गीकृत किया। उनमें से कुछ ने प्लास्टिक की चादर (आघातवर्धनीय) और तार (तन्य) को देखा था। इसे अधातु के रूप में वर्गीकृत किया गया क्योंकि यह चमकदार नहीं था और विद्युत का कुचालक था।
लोहे की छड़551विद्यार्थियों को याद आया कि यह उनकी एक पाठ्यपुस्तक में धातुओं के उदाहरण के रूप में सूचीबद्ध है।
सल्‍फर29243इसे धातु के रूप में वर्गीकृत किया क्योंकि विद्यार्थियों ने प्रदर्शन में रखे नमूने के क्रिस्टलों की जाँच की और उन्हें चमकदार तथा पत्थरों जैसा कठोर पाया। अधातु के रूप में वर्गीकृत किया क्योंकि यह बहुत कठोर नहीं था, ऊष्मा का कुचालक प्रतीत होता था और ऐसा नहीं लगता था कि इसे चादर या तार के रूप में ढाला जा सकता है।
हीरा4561अपनी कठोरता और चमक के कारण धातु के रूप में वर्गीकृत किया। अधातु के रूप में वर्गीकृत किया क्योंकि इसे चादर या तार के रूप में नहीं बदला जा सकता था। विद्यार्थी नहीं जानते थे कि यह ऊष्मा या विद्युत का चालन कर सकता है या नहीं।
पेन्सिल में लगी ग्रेफाइट की छड़43121अपनी कठोरता और चमक के कारण धातु के रूप में वर्गीकृत की गई। जब इसका उपयोग विद्युत परिपथ में किया गया तो विद्यार्थियों ने पाया कि यह विद्युत का चालन कर सकती है। इसे अधातु के रूप में वर्गीकृत किया क्योंकि यह धातु होने के लिए पर्याप्त कठोर नहीं थी। विद्यार्थी इसे चबा सकते थे। साथ ही, ऐसा प्रतीत नहीं होता था कि इससे तार या चादरें बनाई जा सकती हैं।
सिक्के551इन्हें अपनी कठोरता तथा ऊष्मा एवं विद्युत की चालकता के कारण धातु के रूप में वर्गीकृत किया। विद्यार्थियों ने इनमें से अन्तिम गुण की जाँच करने के लिए विद्युत परिपथ का उपयोग किया। साथ ही, विद्यार्थियों ने इसी तरह की अन्य सामग्री से बने तार या चादरें देखी थीं।
चॉक351110अधातु के रूप में वर्गीकृत किया क्योंकि यह न तो कठोर था न ही चमकदार।
संगमरमर का टुकड़ा4115इसे अपनी कठोरता और चमक के कारण धातु के रूप में वर्गीकृत किया। कुछ विद्यार्थियों ने सोचा कि यह आघातवर्धनीय है क्योंकि उन्होंने (समतल) संगमरमर के फ़र्श देखे थे। कुछ ने यह देखा था कि गर्म करने पर यह गर्म हो जाता है (ऊष्मा का चालन करता है)। मुख्य रूप से रिक्त इसलिए छोड़ दिया गया क्योंकि विद्यार्थियों को यक़ीन नहीं था कि उन्हें इसे धातुओं के अन्तर्गत रखना चाहिए या अधातुओं के।
सोना551विद्यार्थियों को याद आया कि यह उनकी एक पाठ्यपुस्तक में धातु के उदाहरण के रूप में वर्णित था।
स्टील का चम्मच551इसे धातु के रूप में वर्गीकृत किया क्योंकि यह कठोर, चमकदार था और ऊष्मा एवं विद्युत का चालन कर सकता था।
ईंट4221020विद्यार्थी निश्चित नहीं थे कि इसे कहाँ रखें।
पारा12431बहुत-से विद्यार्थियों ने इसे इसलिए अधातु माना क्योंकि यह कठोर नहीं था और इससे चादरें या तार नहीं बनाए जा सकते थे। कुछ विद्यार्थियों को याद आया कि पाठ्यपुस्तकों में इसे एक ऐसी धातु के उदाहरण के रूप में बताया गया था जो कठोर नहीं होती।
ग्रीन बोर्ड2211023विद्यार्थी निश्चित नहीं थे कि इसे कहाँ रखें।
एल्युमिनियम241121इसे अपनी चमक के कारण धातु के रूप में वर्गीकृत किया। कुछ विद्यार्थियों को याद आया कि उन्होंने इसे अपनी एक पाठ्यपुस्तक में धातु के उदाहरण के रूप में पढ़ा था। जब विद्यार्थी निश्चित नहीं थे कि यह किस श्रेणी में आता है तो इसे अधातु के रूप में वर्गीकृत किया या रिक्त छोड़ दिया।
तालिका-1 : विद्यार्थियों से प्राप्त उत्तरों का एक विश्लेषण। यह तालिका रोज़मर्रा की वस्तुओं को धातु और अधातु में वर्गीकृत करने के अभ्यास के व्यक्तिगत उत्तरों और उसके बाद हुई कक्षा-चर्चाओं, दोनों से संकलित की गई है।

अभ्‍यास से प्राप्त विचार

मैंने देखा कि विद्यार्थी उन पदार्थों को वर्गीकृत करने के बारे में सबसे अधिक आश्वस्त थे, जिन्हें वे अपनी पाठ्यपुस्तकों में दिए गए धातुओं या अधातुओं के उदाहरणों के रूप में पहचान सकते थे। उदाहरण के लिए, यही एकमात्र मापदण्ड उन विद्यार्थियों द्वारा इस्तेमाल किया गया था जिन्होंने सोना, लोहा और पारा को धातु के रूप में वर्गीकृत किया। कोई भी विद्यार्थी इन सामग्रियों के गुणों के अवलोकन का उपयोग अपने वर्गीकरण में करता प्रतीत नहीं हुआ। इसके विपरीत, विद्यार्थियों ने उन पदार्थों (जैसे एल्युमिनियम, पारा और सल्‍फर) के वर्गीकरण के लिए अपने तर्क साझा करने में हिचकिचाहट और अनिच्छा दिखाई जिन्हें वे वास्तविक दुनिया में पहचान नहीं सकते थे, और इसलिए अपनी पाठ्यपुस्तकों में दिए गए उदाहरणों से जोड़ नहीं सकते थे। इन्हीं सामग्रियों को वर्गीकृत करने में विद्यार्थियों ने उनके अवलोकन योग्य गुणों के विश्लेषण पर भरोसा किया।

मेरी प्रारम्भिक चर्चाओं ने दिखाया था कि अधिकांश विद्यार्थी अपनी पाठ्यपुस्तक में दिए गए धातुओं के सभी गुणों को बता सकते थे। लेकिन ऐसा लगा कि इन सभी के विश्‍लेषण के आधार पर वर्गीकरण करने की बजाय विद्यार्थियों ने इनमें से 1-2 गुणों को दूसरों पर प्राथमिकता दी। कई मामलों में, उनके द्वारा देखा जाने वाला पहला गुण कठोरता था। कक्षा-6 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, पुनर्मुद्रण 2025-26) के अध्याय-6 में सुझाव दिया गया है कि विद्यार्थी : “एक धातु की चाबी लें और उससे लकड़ी के टुकड़े, एल्युमिनियम, पत्थर, कील, मोमबत्ती, चॉक और किसी भी अन्य सामग्री से बनी वस्तु की सतह को खरोंचने का प्रयास करें। क्या कुछ सामग्र‍ियाँ दूसरों की तुलना में अधिक आसानी से खरोंची जा सकती हैं? जिन सामग्र‍ियों को आसानी से दबाया या खरोंचा जा सकता है वे नरम होती हैं, जबकि अन्य सामग्र‍ियाँ जिन्हें दबाना या खरोंचना कठिन होता है वे कठोर (कड़ी) होती हैं।1 हालाँकि किसी भी विद्यार्थी ने इस अभ्यास को करने की कोशिश नहीं की, फिर भी उनमें से कई ने लकड़ी की कुर्सी, कठोर प्लास्टिक, ग्रेफ़ाइट की छड़, हीरा, सिक्के, स्टील के चम्मच, लोहे की छड़ और संगमरमर की सामग्री को धातु के रूप में केवल इसलिए वर्गीकृत किया क्योंकि वे कठोर (कड़े) थे। विद्यार्थियों ने जिस दूसरे गुण पर ध्यान दिया, वह चमक था। कक्षा-6 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, पुनर्मुद्रण 2025-26) के अध्याय- 6 में, विद्यार्थी पढ़ते हैं कि : “जिन सामग्रियों की सतह प्राय: चमकदार होती है उनका स्वरूप चमकदार होता है। चमक वाली ऐसी सामग्रि‍याँ सामान्यत: धातु होती हैं। धातुओं के उदाहरणों में लोहा, ताँबा, जस्ता, एल्युमिनियम, सोना इत्यादि सम्मिलित हैं।1 विद्यार्थियों के लिए, यह गुण स्टील के चम्मच और एल्युमिनियम जैसी सामग्री को धातुओं के रूप में और लकड़ी तथा प्लास्टिक को अधातुओं के रूप में वर्गीकृत करने का एक महत्त्वपूर्ण मापदण्ड था। ऐसा लगता था कि उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि यदि चमकदार सामग्रियाँ धातुएँ हैं, तो जो सामग्री चमकदार नहीं है वह अधातु है। इसी तरह, जिन विद्यार्थियों ने हीरे को धातु के रूप में वर्गीकृत किया, उन्होंने मुख्य रूप से ऐसा इसीलिए किया क्‍योंकि वह चमकदार और कठोर था। कुल मिलाकर, ऐसा लगा कि इस वर्गीकरण में जिन गुणों को विद्यार्थियों ने सबसे कम महत्त्व दिया, वे विद्युत और ऊष्मा की चालकता के थे। कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025-26) के अध्याय-4 में विद्यार्थी पढ़ते हैं कि : “क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जब धातु के चम्मच, धातु की प्लेट या धातु का सिक्का धरातल पर गिरता है तो कैसी ध्वनि उत्पन्न होती है? यह ध्वनि कोयले अथवा लकड़ी के टुकड़े के धरातल पर गिरने से उत्पन्न होने वाली ध्वनि से किस प्रकार भिन्न है?4 विद्यार्थियों में से किसी ने भी अपने वर्गीकरण में इस गुण का उल्लेख या उपयोग नहीं किया।

अधिकांश विद्यार्थी आघातवर्धनीयता और तन्यता को सही-सही परिभाषित कर पाए। जिन विद्यार्थियों ने पारे को अधातुओं और सिक्कों की सामग्री को धातुओं के रूप में वर्गीकृत किया, उन्होंने इन दो गुणों को सहायक कारण के रूप में इस्तेमाल किया। लेकिन कई विद्यार्थियों ने संगमरमर को भी उसकी ‘आघातवर्धनीयता’ के कारण एक धातु के रूप में वर्गीकृत किया था। इससे पता चलता है कि उन्होंने इसे हथौड़े से पीटने पर टुकड़ों में टूटते हुए नहीं देखा होगा। कक्षा -7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025-26) का अध्याय-4 विद्यार्थियों को एक सरल, व्यावहारिक गतिविधि के विचार के साथ इस गुण से परिचित कराता है (चित्र-2 देखें)। अध्याय में विद्यार्थियों को यह भी बताया गया है कि वे धातुओं और अधातुओं के बीच अन्तर करने के लिए इस गुण का उपयोग कैसे कर सकते हैं : “आपने अवलोकन किया होगा कि ताँबे का टुकड़ा, एल्युमिनियम का टुकड़ा और लोहे की कील पीटने पर चपटे हो जाते हैं जबकि अन्य वस्तुएँ व सामग्रियाँ भिन्‍न व्यवहार करती हैं। सामग्रियों का यह गुण जिसके द्वारा उन्हें पीटकर पतली चादरों में परिवर्तित किया जा सकता है, आघातवर्धनीयता कहलाता है। अधिकांश धातुओं में यह गुण होता है… कोयले का टुकड़ा अथवा सल्फर का ढेला ऐसा व्यवहार नहीं दर्शाते हैं। वे छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं, और भंगुर कहे जाते हैं। इसके विपरीत, लकड़ी न तो चपटी चादर में परिवर्तित होती है न ही टुकड़े-टुकड़े हो जाती है। इसलिए लकड़ी न तो आघातवर्धनीय है न ही भंगुर है।”4 मैंने पाठ्यपुस्तक में दी गई गतिविधि का वर्णन किया और विद्यार्थियों से पूछा कि क्या उन्होंने यह जाँचने के लिए इसका उपयोग किया था कि संगमरमर आघातवर्धनीय है या नहीं। हालाँकि, विद्यार्थियों को याद था कि कक्षा में उन्हें यह गतिविधि विचार ज़ोर-ज़ोर से पढ़कर सुनाया गया था, पर उन्होंने न तो इसका प्रदर्शन देखा था न ही इसे स्वयं आज़माया था।

metals and nonmetals fig 2
चित्र-2 : कई विद्यार्थियों ने यह निर्णय किया कि संगमरमर आघातवर्धनीय है क्योंकि उन्होंने इस सामग्री से बने फ़र्श देखे थे। विभिन्न सामग्रियों की आघातवर्धनीयता की जाँच करने के लिए एक सरल गतिविधि कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025-26) के अध्याय-4 में वर्णित है : “…इनमें से प्रत्येक वस्तु को एक-एक करके किसी कठोर सतह पर रखिए और हथौड़े से पीटिए। आपको क्या लगता है कि क्या होगा? क्या वस्तुएँ कुछ चपटी हो जाएँगी अथवा टुकड़ों में टूट जाएँगी?4 कक्षा-9 के 56 विद्यार्थियों में से कुछ को याद आया कि यह गतिविधि विचार उन्हें पढ़कर सुनाया गया था। इसमें हथौड़े और समतल सतह जैसी आसानी से उपलब्ध सामग्रियों की आवश्यकता होती है। फिर भी, किसी भी विद्यार्थी ने इस गतिविधि का प्रदर्शन न तो देखा था न ख़ुद इसे आज़माया था। Credits: This image was created for i wonder… using ChatGPT, under prompting by Chitra Ravi (July 31, 2025). License: CC BY-NC 4.0.

ग्रेफ़ाइट की छड़ के वर्गीकरण ने सबसे अधिक बहस को जन्म दिया। अधिकांश विद्यार्थियों ने इसे धातुओं के अन्तर्गत वर्गीकृत किया था। जब विद्यार्थियों से इसका कारण पूछा तो इन्होंने बताया कि यह कठोर और चमकदार थी। जिन विद्यार्थियों ने इसे अधातु के अन्तर्गत वर्गीकृत किया था, उनका तर्क था कि यह एक धातु होने के लिए पर्याप्त कठोर नहीं थी। उन्होंने पहचाना कि यह वही सामग्री है जो उनकी पेन्सिलों के अन्दर होती है, और वे अनुभव से जानते थे कि इसे चबाया जा सकता है। कुछ विद्यार्थियों ने जवाब दिया कि यह एक धातु है क्योंकि यह चमकदार है और विद्युत की सुचालक है। कुछ विद्यार्थियों ने अपने पूर्व-अनुभव से बताया कि जब उन्होंने बिजली के सॉकेट में पेन्सिल डालने की कोशिश की थी तो उन्हें हल्का झटका महसूस हुआ था। (वास्‍तव में ऐसा करना ख़तरनाक हो सकता है, अत: घर में या कक्षा में विद्यार्थियों को ऐसा करने के लिए मना किया जाना चाहिए।) कुछ अन्य विद्यार्थियों ने इसकी विद्युत चालकता की जाँच करने का निर्णय लिया। उन्होंने छड़ को उस सर्किट में लगाया जो मैंने टेबल पर रखा था और देखा कि बल्ब जल गया। इस मामले में, विद्यार्थियों के पास कई गुणों के विश्लेषण के आधार पर अपना वर्गीकरण करने का अवसर था। यह कई विद्यार्थियों के लिए भ्रमित करने वाला था। वह इनमें से किस गुण को प्राथमिकता दें? क्या कोई ऐसे गुण हैं जो सभी धातुओं में दिखते हैं, लेकिन अधातुओं में कभी नहीं? दूसरी ओर, कार्बन को कक्षा-7 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक के अध्याय-4 में एक अधातु के उदाहरण के रूप में सूचीबद्ध किया गया है (एनसीईआरटी, 2025-26)।4 विद्यार्थी पढ़ते हैं : “कार्बन दैनिक जीवन में उपयोगी है, क्योंकि यह सभी जीवों की निर्माण इकाई है। यह प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट का एक प्रमुख घटक है जो ऊर्जा और विकास के लिए आवश्यक हैं।4 लेकिन ऐसा प्रतीत हुआ कि विद्यार्थी यह नहीं जानते थे कि उनकी पेन्सिलों में लगी ग्रेफाइट की छड़ जैसी सामान्य चीज़ भी कार्बन से बनी होती है।

हालाँकि विद्यार्थियों ने पहचाना कि प्रदर्शन में रखे सिक्के और चम्मच स्टील के बने थे, लेकिन उन्होंने इन्हें इनकी कठोरता और चमक के कारण धातु श्रेणी में रखा। साथ ही, विद्यार्थी जानते थे कि स्टील ऊष्‍मा के सम्पर्क में आने पर, छूने पर गर्म लगता है। उन्होंने यह पुष्टि करने के लिए विद्युत परिपथ का उपयोग किया कि यह विद्युत का चालन कर सकता है (चित्र-3 देखें)।

metals and nonmetals fig 3
चित्र-3 : मेरे द्वारा उपलब्ध कराए गए विद्युत परिपथ का उपयोग विद्यार्थियों ने यह जाँचने के लिए किया कि क्या प्रदर्शन में रखा सिक्का विद्युत का चालन करने में सक्षम है। Credits: Shifa Khan. License: CC BY-NC 4.0.

चूँकि सिक्के चपटे थे, विद्यार्थियों ने तर्क किया कि स्टील आघातवर्धनीय भी है। दिलचस्प बात यह है कि मिडिल स्‍टेज की विज्ञान पाठ्यपुस्तकों में एक से अधिक अध्यायों में स्टील का उल्लेख किया गया है और कम-से-कम इनमें से कुछ जगहों पर, इसे स्पष्ट रूप से एक धातु और अधातु की मिश्रधातु कहा गया है। उदाहरण के लिए, कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025-26) के अध्याय-4 में विद्यार्थियों को बताया गया है कि : “क्या आप जानते हैं कि स्टील धातु (लोहा) और अधातु (कार्बन) का मिश्रण है? इसके तारों से बनी रस्सियाँ भारी भार का वहन कर सकती हैं। अतः इनका उपयोग झूलते हुए सेतुओं के निर्माण में और भारी वस्तुओं को उठाने वाली क्रेन में किया जाता है।4 उदाहरण के लिए यदि चम्मच की सामग्री को वर्गीकृत करने के लिए इसकी संरचना की यह जानकारी उपयोग की जाती तो, इसे धातु और अधातु, दोनों श्रेणियों में रखा जाता। चूँकि ऐसा नहीं हुआ, इसलिए काफी अधिक सम्भावना यही है कि विद्यार्थियों को स्टील की संरचना याद नहीं है। यह भी हो सकता है कि स्टील के कुछ उल्लेख विद्यार्थियों के लिए भ्रामक रहे हों। उदाहरण के लिए, कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2024-25) के अध्याय-3 (‘ऊष्मा’) का क्रियाकलाप 3.7 विद्यार्थियों को कहता है कि वे : “कुछ वस्तुएँ, जैसे स्टील के चम्मच, प्लास्टिक के स्केल, पेंसिल तथा डिवाइडर एकत्र करें। इन सभी वस्तुओं के एक सिरे को गर्म पानी में डुबोएँ। कुछ देर प्रतीक्षा करने के पश्चात दूसरे सिरे को छूकर देखें, और अपने प्रेक्षणों को सारणी 3.3 में लिखें।8

तालिका के दूसरे स्तम्भ को देखकर विद्यार्थी यह अनुमान लगा सकते हैं कि स्टील का चम्मच केवल ‘एक’ धातु से ही बना है (चित्र-4 देखें)। इसी प्रकार, कक्षा-3 की ईवीएस पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025-26) के अध्याय-10 में यह ‘शिक्षक संकेत’ शामिल किया गया है : “बच्चों को उनके परिवेश में सामान्य तौर पर पाई जाने वाली धातुओं, जैसे लोहा, ताँबा, एल्युमिनियम, सोना, चाँदी, थर्मामीटर में मौजूद पारा या फिर मिश्रित धातुएँ, जैसे स्टील, पीतल और काँसा (काँस्य) आदि को दिखाइए। मिश्रित धातुएँ दो-या-दो से अधिक धातुओं का मिश्रण होती हैं।2 यह भी विद्यार्थियों के लिए भ्रमित करने वाला हो सकता है क्योंकि उदाहरण के लिए सोना, जैसा कि वे रोज़मर्रा की दुनिया में देखते हैं, एक मिश्रधातु है। या फिर विद्यार्थियों ने मिश्रण की अवधारणा को ही नहीं समझा होगा। या वे यह नहीं जानते होंगे कि धातु और अधातु के मिश्रण में कौन-कौन-से गुण दिखाई देंगे। जब मैंने यह अभ्यास करवाया, उस समय विद्यार्थियों का परिचय इस अवधारणा से कक्षा-9 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, पुनर्मुद्रण 2025-2026)5 के अध्याय-2 में हुआ था।

metals and nonmetals fig 4
चित्र-4 : विद्यार्थियों ने स्टील के चम्मच के पदार्थ को धातु के रूप में वर्गीकृत किया। मैंने देखा कि स्टील का चम्मच मिडिल स्‍टेज की विज्ञान पाठ्यपुस्तकों के विभिन्न अध्यायों में उदाहरण के रूप में शामिल है। इनमें से कुछ उल्लेख, जैसे कि यहाँ दी गई तालिका में हैं, यह संकेत दे सकते हैं कि स्टील ‘एक’ धातु से बना होता है। Credits: This image is a screenshot of a table shared in Activity 3.7 in Chapter 3 (‘Heat’) of the Grade VII science textbook (NCERT, 2024-2025).8 License: Copyrighted by NCERT. Used here for educational purposes.

इस साल, विद्यार्थियों का परिचय कक्षा-8 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025-2026)9 के अध्याय-8 (‘Nature of Matter: Elements, Compounds, and Mixtures’) में कराया गया है। यह अध्याय उन्हें बताता है कि : “जब दो-या-दो से अधिक पदार्थों को मिलाया जाता है, जहाँ प्रत्येक पदार्थ अपने गुणों को बनाए रखता है तो इसे मिश्रण कहते हैं। मिश्रण बनाने वाले अलग-अलग पदार्थों को इसके अवयव कहा जाता है। मिश्रण के अवयव एक-दूसरे के साथ रासायनिक अभिक्रिया नहीं करते हैं।9

विद्यार्थियों के साथ साझा की गई मेरी सूची की छह वस्तुओं की सामग्री न तो धातु है न ही अधातु : लकड़ी, प्लास्टिक, चॉक, संगमरमर, ईंट और ग्रीन बोर्ड। फिर भी, कई विद्यार्थियों ने इन सामग्रियों को ‘दोनों में से कोई नहीं’ श्रेणी में वर्गीकृत नहीं किया था। उदाहरण के लिए, प्लास्टिक को या तो धातु या अधातु के रूप में वर्गीकृत किया गया था। कुछ विद्यार्थियों ने मुख्यत: इसलिए तय किया कि यह धातु है, क्योंकि “यह कठोर है।” अन्य विद्यार्थियों ने कहा कि उन्होंने प्लास्टिक से बनी चादरें और तार देखे थे। इसलिए उन्होंने तर्क दिया कि प्लास्टिक आघातवर्धनीय और तन्य भी है।

चलते-चलते

मिडिल स्‍टेज की विज्ञान पाठ्यचर्या का एक लक्ष्य विद्यार्थियों में पदार्थों को धातु और अधातु में वर्गीकृत करने की क्षमता विकसित करना है।6,7 कक्षा-9 के विद्यार्थियों के साथ हुई चर्चाओं से स्पष्ट हुआ कि वे सीधे और रटने पर आधारित प्रश्नों के सटीक उत्तर देने में तो सक्षम थे (जैसे धातुओं के गुण क्या हैं, आघातवर्धनीयता क्या है आदि), लेकिन अपनी पाठ्यपुस्तकों से बाहर के प्रश्नों के उत्तर देने में कठिनाई महसूस कर रहे थे। उन्हें रोज़मर्रा की वस्तुओं के पदार्थों को धातु और अधातु में छाँटने के लिए याद किए गए गुणों को लागू करने का अवसर देने से, मिडिल स्‍टेज के विज्ञान पाठ्यक्रम की इस अवधारणा और सम्बन्धित अवधारणाओं की उनकी समझ में महत्त्वपूर्ण कमियाँ उजागर हुईं। हो सकता है ये कमियाँ औपचारिक आकलन में दिखाई न दें। इसके बजाय, मेरे द्वारा मिडिल स्‍टेज के विज्ञान के विद्यार्थियों के साथ डिज़ाइन किए गए सरल कक्षा-अभ्यास का उपयोग करने से शिक्षकों को ऐसी कमियों को अधिक प्रभावी ढंग से पहचानने और दूर करने में मदद मिल सकती है।

मुख्‍य बिन्‍दु

रोज़मर्रा की सामग्रियों का धातुओं और अधातुओं के रूप में वर्गीकरण
  • प्रिपरेटरी स्‍टेज की ईवीएस और मिडिल स्‍टेज की विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों के कई अध्यायों में धातुओं और अधातुओं के गुणों का वर्णन किया गया है।
  • विद्यार्थी अकसर इन गुणों को ठीक-ठीक सूचीबद्ध और परिभाषित कर पाते हैं। वे अपनी पाठ्यपुस्तकों से सटीक उदाहरण भी दे पाते हैं।
  • लेकिन विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक के रटे हुए तथ्यों का उपयोग अपनी रोज़मर्रा की दुनिया की वस्तुओं में मौजूद सामग्री को धातुओं और अधातुओं के रूप में वर्गीकृत करने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं।
  • एक व्यावहारिक वर्गीकरण अभ्यास पर विद्यार्थियों के जवाब, इसकी और इससे सम्बन्धित अवधारणाओं की उनकी समझ में मौजूद महत्त्वपूर्ण कमियों को उजागर करने में मदद कर सकते हैं।

टिप्पणियाँ

  • Credits for the image (Metal in a Forge) used in the background of the article title: U.S. Gov Works, Rawpixel. URL: https://www.rawpixel. com/image/5976798/photo-image-public-domain-fire. License: Public Domain.
  • लेखिका ने एक शिक्षण योजना को तैयार करने के लिए इस लेख में वर्णित अभ्यास के अपने विश्लेषण का उपयोग किया है। सम्पादक आशा करते हैं कि लेखिका इस शिक्षण योजना का अपनी कक्षा में उपयोग करेंगी और हम उससे हासिल हुए उनके अनुभव को आई वंडर… के दिसम्बर 2025 अंक में प्रकाशित करेंगे।
  • लेख में राष्‍ट्रीय शैक्षिक अनुसन्‍धान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा प्रकाशित कक्षा-6,7,8 एवं 9 की विज्ञान पाठ्यपुस्‍तकों तथा कक्षा-3 की पर्यावरण अध्‍ययन पाठ्यपुस्‍तक के विभिन्‍न अध्‍यायों से उद्धरण साभार लिए गए हैं। कक्षा-8 की विज्ञान पाठ्यपुस्‍तक के अँग्रेज़ी संस्‍करण (2025-26) से साभार लिए गए उद्धरणों को हिन्‍दी में अनूदित किया गया है।
  • लेख के हिन्‍दी अनुवाद की समीक्षा के लिए हम हृदय कान्‍त दीवान के आभारी हैं।

सन्दर्भ

  1. राष्‍ट्रीय शैक्षिक अनुसन्‍धान और प्रशिक्षण परिषद (पुनर्मुद्रण 2025-2026)। ‘अध्‍याय-6 : हमारे आस-पास की सामग्री’। जिज्ञासा,कक्षा-6 की विज्ञान पाठ्यपुस्‍तक : 99-118. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?fecu1=6-12.
  2. राष्‍ट्रीय शैक्षिक अनुसन्‍धान और प्रशिक्षण परिषद (पुनर्मुद्रण 2025-2026)। ‘अध्‍याय-10 : वस्‍तुओं की दुनिया ’। हमारा अद्भुत संसार, कक्षा-3 की पर्यावरण विज्ञान पाठ्यपुस्‍तक : 124-134. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?ceev1=10-12.
  3. राष्‍ट्रीय शैक्षिक अनुसन्‍धान और प्रशिक्षण परिषद (2025-2026). ‘अध्‍याय-3: विद्युत : परिपथ एवं उनके घटक’। जिज्ञासा, कक्षा-7 की विज्ञान पाठ्यपुस्‍तक : 23-56. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?gecu1=3-12.
  4. राष्‍ट्रीय शैक्षिक अनुसन्‍धान और प्रशिक्षण परिषद (2025-2026)। ‘अध्‍याय-4 : धातुओं और अधातुओं का संसार’। जिज्ञासा, कक्षा-7 की विज्ञान पाठ्यपुस्‍तक : 41-40. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?gecu1=4-12.
  5. राष्‍ट्रीय शैक्षिक अनुसन्‍धान और प्रशिक्षण परिषद (पुनर्मुद्रण 2025-2026)। ‘अध्‍याय 2 : क्‍या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं?’। विज्ञान पाठ्यपुस्‍तक कक्षा-9 : 15-27. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?iesc1=2-12.
  6. National Steering Committee for National Curriculum Frameworks (2023). ‘National Curriculum Framework for School Education 2023’. National Council of Educational Research and Training. URL: https://ncert.nic.in/pdf/NCFSE-2023-August_2023.pdf.
  7. Central Board of Secondary Education (2020). ‘Teachers’ Resource for Achieving Learning Outcomes, Classes 1 to 10’. URL: https:// cbseacademic.nic.in/web_material/Manuals/TeachersResource_LODoc.pdf.
  8. राष्‍ट्रीय शैक्षिक अनुसन्‍धान और प्रशिक्षण परिषद (2024-2025)। ‘अध्‍याय 3 : ऊष्‍मा’। कक्षा-7 की विज्ञान पाठ्यपुस्‍तक : 25-38. URL: https:// ncert.nic.in/textbook/pdf/gesc103.pdf.
  9. National Council of Educational Research and Training (2025-2026). ‘Chapter 8: Nature of Matter: Elements, Compounds, and Mixtures’. Curiosity, Textbook of Science for Grade VII: 116-133. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?hecu1=8-13.