बच्चे सीधे और मुड़े हुए पाइपों का उपयोग करके प्रकाश स्रोत को देखकर यह सीख सकते हैं कि प्रकाश सीधी रेखा में चलता है। फिर भी मिडिल-स्टेज पाठ्यचर्या में पिनहोल कैमरा बनाने की अनुशंसा की जाती है। क्यों? मैं इसके दो कारण सोच सकती हूँ :
- विद्यार्थी इस गुण का उपयोग प्रतिबिम्ब (इमेज) बनने की प्रक्रिया को समझाने के लिए कर सकते हैं। वे यह जाँच सकते हैं कि विभिन्न चर (वेरिएबल्स) इस परिघटना को कैसे प्रभावित करते हैं : यदि कैमरा वस्तु के अधिक पास हो तो क्या होगा? बटर पेपर या कार्डबोर्ड में से किससे बेहतर पर्दा (स्क्रीन) बनेगा?
- विद्यार्थी इस कैमरे के प्रत्येक घटक को देख सकते हैं। वे इसके घटकों को खोलकर, पुनः बनाकर और इसमें बदलाव करके यह समझ सकते हैं कि यह कैसे काम करता है : यह प्रतिबिम्ब दर्पण में बनने वाले प्रतिबिम्ब से किस प्रकार भिन्न है? यदि हम इसमें एक दूसरा पिनहोल जोड़ दें तो क्या होगा?
लेकिन जब इसे बनाना जटिल या कठिन लगने लगता है, तो विद्यार्थियों का ध्यान जिज्ञासा और खोज-बीन पर कम तथा इसे पूरा करने के लिए केवल निर्देशों का पालन करने पर अधिक केन्द्रित हो जाता है। हम इस समस्या को कैसे हल करें? शिव पाण्डेय यहाँ एक तरीक़ा साझा कर रहे हैं। आप अपने तरीक़े हमें बताएँ। – चित्रा रवि (मुख्य सम्पादक)