सरल रेखा में गति का अर्थ समझने के लिए खेलों का उपयोग

कुछ साल पहले, हम दोनों साथ मिलकर आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को विज्ञान पढ़ाते थे। अकादमिक वर्ष का अन्त नज़दीक था और हम अगले साल के लिए अपनी शिक्षण योजना पर चर्चा कर रहे थे। श्रीजा उस स्कूल में कई सालों से पढ़ा रही थीं। उन्होंने अपना अनुभव साझा किया कि उन विद्यार्थियों को भी, जिन्हें सामान्य रूप से पढ़ना अच्छा लगता था, विज्ञान की पाठ्यपुस्तक के साथ जुड़ पाना मुश्किल लगता था। इसके अलावा, उन्हें भौतिकी के अध्याय, जैसे कि गति पर बनाए गए अध्याय, ख़ासतौर पर उबाऊ और अरुचिकर लगते थे।
हमने सरल रेखा में गति से जुड़ी अवधारणाओं को सिखाते समय आने वाली इस चुनौती से पार पाने की कोशिश की (बॉक्स-1 देखें)। हालाँकि हम यहाँ अपना अनुभव अविरल रूप से साझा कर रहे हैं, लेकिन हमारे प्रयास को दो हफ़्ते लगे थे (हमने हर हफ़्ते 40-40 मिनट की तीन कक्षाएँ लीं)। यद्यपि हर कक्षा के लिए हमारे पास एक अन्तरिम योजना थी, पर हमारे विद्यार्थियों की प्रतिक्रियाओं और सवालों ने हमें अवधारणाओं की उनकी समझ के आधार पर अपनी योजनाओं में छोटे-छोटे सुधार करने में काफ़ी मदद की। हम यहाँ विद्यार्थियों की ऐसी कुछ प्रतिक्रियाओं का भी ज़िक्र करेंगे। और आपसे यह भी साझा करेंगे कि कभी-कभी उन बातों ने किस प्रकार हमें चीज़ों को आगे बढ़ाने में मदद की। अपने नोटस् देखते हुए और इस अनुभव के बारे में लिखते हुए, हम अपनी शिक्षण विधि पर सोच-विचार कर पाए। शायद इस लेख को एक सुझाए गए शिक्षण अनुक्रम के रूप में देखा जा सकता है जिसे अन्य शिक्षक अपना सकते हैं और अपनी ज़रूरत व प्रासंगिकता के मुताबिक़ उसमें बदलाव कर सकते हैं। (देखें शिक्षक मार्गदर्शिका : रैखिक गति से सम्बन्धित अवधारणाएँ सिखाने के लिए सुझाव)।
बॉक्स-1 : मिडिल स्तर की विज्ञान पाठ्यचर्या में एक-आयामी गति
शालेय शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ़-एसई) 2023 के मुताबिक़, विज्ञान शिक्षा से मिडिल स्तर के विद्यार्थियों में यह क्षमता विकसित करने में मदद की उम्मीद की जाती है कि वह “गणितीय और आरेखीय प्रदर्शनों के द्वारा भौतिक मापों (स्थिति, चाल और चाल में बदलावों) का इस्तेमाल करते हुए एक-आयामी गति (एकसमान, असमान, क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर) का वर्णन कर पाएँ।”1
पाठ्यचर्या के इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, कक्षा-6 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में पहली बार अध्याय-5 (लम्बाई एवं गति का मापन) में गति की अवधारणा पेश की गई (एनसीईआरटी, 2024-2025)।2 यह अध्याय लम्बाई की माप और उसके मानक मात्रक (मीटर) के बारे में भी बात करता है। कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक के अध्याय-9 में सबसे पहले समय और चाल की अवधारणाएँ प्रस्तुत की गई हैं (एनसीईआरटी, 2024-25)।3
उसैन बोल्ट से परिचय
‘इनफ़ाइनाइट पावर्स’ नामक किताब में, गणितज्ञ-लेखक स्टीवन स्ट्रोगेट्ज़ 2008 के बीजिंग ओलम्पिक में जमैका के एथलीट उसैन बोल्ट की रिकॉर्ड तोड़ने वाली 100-मीटर दौड़ का विश्लेषण करने के लिए कलन (कैलक्युलस) का उपयोग करते हैं।4 गति में अपने विद्यार्थियों की रुचि कैसे जगाएँ, यह सोच-विचार करते हुए इस किताब का यह उद्धरण हमारी आँखों के सामने से गुज़रा। चूँकि हमारे कई विद्यार्थियों की खेलों में रुचि थी, हमने सोचा कि यह एक ऐसा सन्दर्भ था जिससे विद्यार्थी ख़ुद को जोड़ पाएँगे। इसी वजह से हमने गति के बारे में अपनी बातचीत की शुरुआत बर्लिन में हुई 2009 की ‘वर्ल्ड चैम्पियनशिप इन एथलेटिक्स’ में बोल्ट की 100 मीटर दौड़ का वीडियो दिखाकर की।5 इसी प्रतियोगिता में बोल्ट ने 100 मीटर दौड़ का वर्तमान विश्व रिकॉर्ड बनाया था।
इस दौड़ में धावक इतने प्रभावशाली ढंग से दौड़े कि उन्हें देखकर हम सब (बच्चे और वयस्क ) अचम्भित और रोमांचित हो उठे। हमने दो बार यह वीडियो देखा और हम बोल्ट की इस उपलब्धि से विस्मित थे। हमने उनकी उपलब्धि को कक्षा में बोर्ड पर कुछ यूँ व्यक्त किया :
100 मीटर → 9.58 सेकंड
एक विद्यार्थी ने कहा कि इसका अर्थ यह था कि बोल्ट ने 10 मीटर पूरा करने के लिए एक सेकंड से कम का समय लिया था। हमने उससे पूछा कि वह ऐसा क्यों कह रही है। उसका जवाब था कि अगर बोल्ट ने ट्रैक के हर 10 मीटर पूरा करने के लिए एक सेकंड लिया होता तो इनमें से प्रत्येक लम्बाई के लिए 1-1 सेकंड जोड़ते हुए पूरे ट्रैक के लिए लिया गया समय, यानी 10 सेकंड, निकल आता। जब वह अपना कारण समझा रही थी, हमने बोर्ड पर 10-10 मीटर के अंकन के साथ एक सीधा ट्रैक बना दिया (चित्र-1 देखें)। उस विद्यार्थी ने आगे कहा कि चूँकि बोल्ट ने दौड़ पूरी करने में 10 सेकंड से कम का समय लिया था, उसने निश्चित ही 10 मीटर की दूरी एक सेकंड से कम समय में पूरी की होगी। हमने विद्यार्थियों को इस बारे में सोचने के लिए कुछ समय दिया और इस विद्यार्थी के तर्क को प्रत्यक्ष समानुपात के रूप में दोबारा व्यक्त किया :
10 मीटर 1 सेकंड में
100 मीटर ? सेकंड में

विद्यार्थियों को दूरी का बोध विकसित करने में मदद करने के लिए हमने बच्चों से पूछा कि 10 मीटर कितना होता होगा। विद्यार्थियों के लिए परिचित किसी दूरी से इसका सम्बन्ध जोड़ने के लिए हमने उनसे चॉकबोर्ड से सामने वाली दीवार तक की दूरी को एक मीटर छड़ी से नापने के लिए कहा। इसे करने के लिए दो विद्यार्थी ख़ुद आगे आए। हमने सुझाव दिया कि वह हर मीटर के लिए चॉक से निशान लगाते जाएँ। दूरी 7 मीटर निकली। हमने कुछ मिनट तक बोल्ट द्वारा एक सेकंड में बोर्ड से दीवार के कहीं आगे जाने की कल्पना की।
“क्या हम उसैन बोल्ट की तरह दौड़ सकते हैं?”
बोल्ट के वीडियो से काफ़ी प्रेरित महसूस कर रहे हमारे दो विद्यार्थियों ने दावा किया कि वह भी बहुत तेज़ दौड़ सकते हैं। उनके सहपाठियों ने उनके इस उत्साह को समझा और उन्हें दौड़ने के लिए प्रोत्साहित करने लगे। हमने जल्दी से इस विचार के बारे में आपस में चर्चा की। हम दोनों को लगा कि यह दूरी के उनके बोध को गहरा करने और उन्हें समय के मापन से परिचित कराने का एक मौक़ा हो सकता है। इसलिए हमने उनकी योजना के साथ आगे बढ़ने का फ़ैसला किया।
हमने विद्यार्थियों को एक 5 मीटर का धातु का मापन टेप दिया और उनसे स्कूल के फाटक के बाहर की कच्ची सड़क की दूरी नापने को कहा। उनके मापन से हमें पता चला कि हमारे पास 100 मीटर की दौड़ के लिए तो पर्याप्त जगह नहीं थी, लेकिन 50 मीटर दौड़ के लिए थी। हम उन दो विद्यार्थियों की चाल (स्पीड) की तुलना बोल्ट के साथ करना चाहते थे। इसलिए हमने अपने विद्यार्थियों से कहा कि ऐसा मानें कि बोल्ट दौड़ की आधी दूरी (50 मीटर) को आधे समय (लगभग 4.8 सेकंड या तक़रीबन 5 सेकंड) में पूरी करता है। हमने कक्षा से यह अनुमान लगाने के लिए कहा कि उनके सहपाठी 50 मीटर दौड़ने में कितना समय लेंगे। कई विद्यार्थियों को लगा कि उनके सहपाठी बोल्ट से दोगुना समय (या 10 सेकंड) लेंगे। कुछ ने चिढ़ाते हुए कहा कि वह बोल्ट से तिगुना समय (या 15 सेकंड) ले सकते हैं।
हमने अपने विद्यार्थियों को दौड़ की बारीक़ियों को तय करने के लिए बुलाया। विद्यार्थियों ने एक छड़ी के सहारे मिट्टी में ‘प्रारम्भ’ रेखा और ‘समाप्ति’ रेखा बना दीं। विद्यार्थियों का एक समूह प्रारम्भ रेखा पर खड़ा हो गया और दूसरा समाप्ति रेखा पर। हमने सुझाव दिया कि वह दौड़ का समय मापने के लिए हमारे किसी मोबाइल फ़ोन में मौजूद स्टॉपवॉच (विराम घड़ी) का प्रयोग करें। लेकिन इसके बाद, हमने सब कुछ उन पर छोड़ दिया कि वह सटीक ढंग से यह मापन करने में आने वाली दिक़्क़तों और इसके लिए ज़रूरी सावधानियों को अपने-आप जानें। हमने केवल चीज़ें सुझाईं और जब बिल्कुल ज़रूरी लगा तभी समस्याओं की ओर इशारा किया, क्योंकि यदि शुरुआत में ही बहुत ज़्यादा निर्देश दिए जाते तो वह विद्यार्थियों के लिए अप्रासंगिक हो जाते।
जैसा कि अपेक्षित था, हमारे विद्यार्थियों को स्टॉपवॉच पर प्रारम्भ और समाप्ति के समय को लेकर तालमेल में और उन्हें दर्ज करने में दिक़्क़तें पेश आईं। धावकों के द्वारा और स्टॉपवॉच सम्हालने वाले विद्यार्थियों द्वारा कुछ ग़लत शुरुआतें करने के बाद, हमने एक व्यवस्था बनाई और ऐसा लगा कि वह व्यवस्था हमारे लिए बेहतर ढंग से काम कर रही है। एक विद्यार्थी ने प्रारम्भ रेखा के पास खड़े होने का निश्चय किया और दूसरे ने समाप्ति रेखा के। दौड़ को शुरू करने के लिए प्रारम्भ रेखा पर खड़ा विद्यार्थी ऊँची आवाज़ में 10 से 0 तक उलटी गिनती करेगा और 0 बोलते ही एक रूमाल गिरा देगा। इस संकेत के मिलते ही समाप्ति रेखा पर खड़ा विद्यार्थी स्टॉपवॉच शुरू कर देगा। दोनों विद्यार्थियों ने वास्तविक दौड़ के पहले कुछ बार इस सिलसिले के तालमेल का अभ्यास किया। दोनों धावकों ने अपने सहपाठियों के ज़ोरदार उत्साहवर्धन के बीच यह दौड़ दौड़ी। समाप्ति रेखा तक पहुँचने में एक ने 8 सेकंड तो दूसरे ने 8.5 सेकंड लिए। सभी ने उनके लिए तालियाँ बजाईं।
चाल (स्पीड) की गणना
सातवीं कक्षा के विज्ञान के अपेक्षित अधिगम प्रतिफलों में से एक है कि विद्यार्थी गतिशील वस्तुओं की चाल को मापना और उसकी गणना करना सीखेंगे।6 लेकिन हमारा अनुमान था कि हमारे विद्यार्थी चाल के विचार से केवल रोज़मर्रा के और गुणात्मक अर्थ से परिचित थे। इसलिए हम कक्षा में वापस गए और बोर्ड पर यह लिखा :
50 मीटर → 8 सेकंड
तुम्हारे दोस्त की चाल क्या है?
चूँकि किसी भी विद्यार्थी ने हमारे सवाल का जवाब नहीं दिया, हमें समझ में आया कि वे चाल की गणना से परिचित नहीं थे। इसलिए हमने उनसे कहा कि वह बोल्ट के साथ अपने सहपाठियों की दौड़ की तुलना करें। विद्यार्थियों ने बताया कि उनके सहपाठियों को 100 मीटर दौड़ पूरी करने में 16-17 सेकंड लगते। हमने कहा, “ठीक है, क्या तुम हमें बता सकते हो कि वह एक सेकंड में कितनी दूरी तय करते?” एक विद्यार्थी ने देखा कि यह भी प्रत्यक्ष समानुपात का सवाल है और उसने इसे बोर्ड पर इस तरह से लिख दिया :
100 मीटर 16 सेकंड में
? मीटर 1 सेकंड में
हमने इस सवाल का जवाब देने के लिए कैलकुलेटर का इस्तेमाल किया और विद्यार्थियों से कहा कि वह बोर्ड पर प्रश्नवाचक चिह्न की जगह 6.25 मीटर लिख दें। इस मौक़े पर हमने विद्यार्थियों को इस सिद्धान्त से परिचित कराया कि किसी गतिशील वस्तु द्वारा इकाई समय में तय की गई दूरी चाल या स्पीड कहलाती है (हमारा मतलब ‘औसत चाल’ से था; लेकिन हम विद्यार्थियों के सामने एक साथ कई सारे नए शब्द नहीं रखना चाहते थे)।
हमने उनके सबसे तेज़ दौड़े सहपाठी की औसत चाल को बोर्ड पर लिखकर इस बात को दोहराया : 6.25 मीटर प्रति सेकंड या 6.25 मी/से। इस संख्या को किसी वास्तविक चीज़ से जोड़ने के लिए हमने समझाया कि इस मान का अर्थ था कि उनका सहपाठी एक सेकंड में कक्षा की लम्बाई (7 मीटर) को पार नहीं करेगा।
चूँकि हम उसैन बोल्ट की दौड़ के अन्य ब्योरों की चर्चा करना चाहते थे, हमने विद्यार्थियों से पूछा कि एक सेकंड में बोल्ट कितनी दूरी तय करेगा। एक विद्यार्थी ने पहले ही अपनी राय दी थी कि यह दूरी 10 मीटर से ज़्यादा होगी। हमारी कक्षा अब प्रत्यक्ष समानुपात के उसी तर्क का इस्तेमाल करते हुए बोल्ट की चाल की गणना करने में सफल रही।
चाल के बारे में और विचार
हम चाह रहे थे कि हमारे विद्यार्थी दूरी, समय और चाल के परस्पर/अन्तर्सम्बन्धों के बारे में अधिक गहराई से सोच पाएँ। इस उद्देश्य से हमने बोल्ट द्वारा हर 10 मीटर के ‘हिस्से’ (जिसे अँग्रेज़़ी में ‘स्प्लिट्स’ कहते हैं) को पूरा करने में लिए गए समय के आँकड़े जुटाए और उन्हें बोर्ड पर लिख दिया (चित्र-2क देखें)।7 फिर हमने इन मानों को बोर्ड पर बने ट्रैक के बग़ल में लिख दिया (चित्र-2ख देखें)। हमने अपने विद्यार्थियों से पूछा कि क्या वह अनुमान लगा सकते हैं कि प्रतिक्रिया समय का क्या मतलब होता है। कुछ ने सोचा कि कहीं यह पिस्तौल की आवाज़ ( जिसे दौड़ की शुरुआत के संकेत के तौर पर चलाया जाता है) की प्रतिक्रिया में धावक द्वारा लिया जाने वाला समय तो नहीं। हमने इसकी पुष्टि की और इसे पिस्तौल के चलाए जाने और धावक के दौड़ना शुरू करने के बीच के समय अन्तराल के रूप में दोहराया।
हमने विद्यार्थियों से ट्रैक की संख्याओं को देखने के लिए कहा। क्या उन्हें इनमें कोई पैटर्न दिखाई दिए? कुछ विद्यार्थियों ने कहा कि संख्याएँ यह दिखा रही हैं कि बोल्ट ने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी थी। जब विद्यार्थियों से यह समझाने के लिए कहा गया कि उन्हें ऐसा क्यों लगता है, उन्होंने दिखाया कि दौड़ के आगे बढ़ने के साथ बोल्ट ने वही दूरी (10 मीटर) कम से कमतर समय में पूरी की। एक और विद्यार्थी ने कहा कि बोल्ट ने पहले 70 मीटर में अपनी रफ़्तार बढ़ाई थी, लेकिन उसके बाद लगभग एक जैसी चाल से दौड़ पूरी की थी। हमने यह देखने के लिए फिर से वीडियो देखा कि क्या हम बोल्ट को अपनी रफ़्तार बढ़ाते देख सकते हैं। हम देख सके कि दौड़ शुरू होने के फ़ौरन बाद और दौड़ के पहले आधे हिस्से में सभी धावक कितना ज़ोर लगा रहे थे।

इसके बाद, उसैन बोल्ट के आँकड़ों के बग़ल में हमने विद्यार्थियों के सहपाठियों द्वारा 10-10 मीटर के हिस्सों को पूरा करने में लिए गए समय को लिखा (चित्र-2ग देखें)। हमने अपने विद्यार्थियों से पूछा कि क्या उन्हें यह ठीक लगता है। पूरी कक्षा ने इसका विरोध किया और बताया कि आँकड़े सही नहीं हैं। हमारे पास उनके सहपाठियों के लिए 10-10 मीटर के हिस्सों के समय नहीं थे। हमने केवल उनके सहपाठियों द्वारा समाप्ति रेखा पर पहुँचने में लिए गए कुल समय को मापा था।
इस मौक़े पर, हमने औसत चाल (एवरेज स्पीड) की अवधारणा को प्रस्तुत किया, यानी किसी गतिशील वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी को उसके द्वारा इसे पूरा करने में लिए गए कुल समय से भाग देना। इस बिन्दु पर ज़ोर देने के लिए, हमने उनके ज़्यादा तेज़ दौड़े सहपाठी और उसैन बोल्ट की औसत चालों की पहले की गई गणनाओं, क्रमशः 50 मीटर 8 सेकंड से विभाजित और 100 मीटर 9.58 सेकंड से विभाजित, को दोबारा स्पष्ट रूप से लिखा।
रोज़मर्रा की इकाइयों के साथ जुड़ाव
अब हमने दूरी, समय और चाल की अवधारणाओं को इन मापों के बारे में विद्यार्थियों की रोज़मर्रा की माप की समझ से जोड़ने की कोशिश की। गूगल मैप्स के मुताबिक़, हमारे स्कूल फाटक से मुख्य सड़क तक की दूरी 740 मीटर है। यह ऐसी दूरी थी जिसे हमारे विद्यार्थी स्कूल आने-जाने में हर दिन तय करते थे। हमने बोल्ट की सबसे तेज़ चाल की गणना की : 10 मीटर/0.81 सेकंड = 12.3 मी/से। फिर हमने पूछा कि यदि बोल्ट अपनी सबसे तेज़ चाल पर दौड़े तो उसे मुख्य सड़क और स्कूल के फाटक के बीच की दूरी को तय करने में कितना समय लगेगा :
10 मीटर 0.81 सेकंड में
740 मीटर ? सेकंड में
विद्यार्थियों ने गणना की कि बोल्ट इस दूरी को एक मिनट (तक़रीबन 60 सेकंड) में पूरी करेगा। हमने इस संख्या को बोर्ड पर लिख दिया और इसका इस्तेमाल बोल्ट द्वारा एक घण्टे में तय की जाने वाली दूरी की गणना करने के लिए किया : 740 x 60 = 44500 मी = 44.5 किलोमीटर। अब हमने विद्यार्थियों को इस बात से परिचित कराया कि चाल के बारे में सामान्य रूप से किलोमीटर प्रति घण्टे (किमी/घण्टा) के मात्रकों में बात की जाती है। इन मात्रकों में बोल्ट की चाल 44.5 किमी/घण्टा होगी।
इन नए मात्रकों से सम्बन्ध स्थापित करने में उनकी मदद करने के लिए हमने बोल्ट की चाल की तुलना सबसे तेज़ जानवरों और पक्षियों की चालों से की। उदाहरण के लिए, एक चीते की सबसे तेज़ चाल 100 से 120 किमी/घण्टा जानी जाती है। हमने उल्लेख किया कि यह चाल उसैन बोल्ट की सबसे तेज़ चाल के दोगुने से भी ज़्यादा है। एक विद्यार्थी ने दावा किया कि उसके लिए दौड़कर ऐसे स्कूटर तक पहुँचना मुमकिन है जो 20 किमी/घण्टे की नियत चाल से चल रहा हो। हमने कक्षा से कहा कि वे उसी तर्क का उपयोग करते हुए, जिसका इस्तेमाल अभी हमने किया था, उनके ज़्यादा तेज़ दौड़े सहपाठी की निकाली गई औसत चाल की गणना किमी/घण्टा में करें। कुछ ही मिनटों में विद्यार्थियों ने साझा किया कि यह 6.25 x 60 x 60 मीटर प्रति घण्टा = 22.5 किमी/घण्टा होगी। हमने इस सत्र का अन्त इस बात का उल्लेख करते हुए किया कि इस चाल पर दौड़ते हुए उनका सहपाठी वाक़ई में 20 किमी/घण्टे की रफ़्तार से चल रहे स्कूटर तक पहुँचने में कामयाब हो जाएगा।
समापन
हमारा लक्ष्य था हमारे विद्यार्थियों को गति की पाठ्यपुस्तकीय अवधारणाओं को उनके जीवन के अनुभवों से जोड़ने में मदद करना। हम भाग्यशाली थे कि हम एक ऐसे स्कूल में काम कर रहे थे जो शिक्षकों को यह आज़ादी देता है कि वह इसे करने के नए तरीक़ों को आज़मा सकें। हमारी एक योजना थी उसैन बोल्ट की दौड़ को एक आइस-ब्रेकर की तरह इस्तेमाल करना। पर यह सन्दर्भ हमारे इतने सारे विद्यार्थियों के दिलो-दिमाग़ तक पहुँचा कि हमें लगा कि गति की अवधारणा की खोजबीन की पूरी यात्रा में इस सन्दर्भ को साथ रखा जा सकता है। हमारे विचार में यह भी आया है कि क्या खेलों के क्षेत्र में ऐसे और भी कई सन्दर्भ होंगे जिनका इस्तेमाल विद्यार्थियों को विज्ञान की अवधारणाओं से जोड़ने में मदद करने के लिए किया जा सकता हो।
गति से सम्बन्धित अवधारणाओं में विद्यार्थियों की दिलचस्पी को जगाने और उसे बनाए रखने की चुनौती से निपटने की प्रक्रिया हमारे लिए दुरूह और समय लेने वाली थी। इस प्रक्रिया में तीन चीज़ों ने हमारी मदद की :
- प्रत्येक गतिविधि और चर्चा में हमारे विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी : हमने देखा कि विद्यार्थियों ने कक्षा में कई योगदान दिए। उनके योगदानों ने अकसर उनके साथियों की सोचने की प्रक्रियाओं को ऐसे तरीक़ों से उत्प्रेरित किया जिनसे हमें उनके साथ संवाद बनाए रखने में मदद मिली।
- इस विषय के सह-शिक्षण का हमारा अनुभव : कई शिक्षकों की भाँति हम हर कक्षा के लिए पहले से ही योजना तैयार करते और देखते थे कि हमारे विद्यार्थी उन पर किस प्रकार प्रतिक्रिया करते हैं। इसका अर्थ था कि हमने अकसर वास्तविक समय में अपनी योजना बदली और भविष्य की कक्षाओं में चीज़ों को जोड़ने की तरफ़ आगे बढ़े। साथ मिलकर काम करने ने हमें एक-दूसरे के साथ विचारों को साझा करने और समस्याओं पर चर्चा करने का मौक़ा दिया। इसने हमें नई और प्रयोगात्मक योजनाओं को आज़माने और अपने विद्यार्थियों के सवालों और विचारों के प्रति वहीं-के-वहीं प्रतिक्रिया देने का आत्मविश्वास दिया। इसके अलावा, आप अपने विद्यार्थियों के साथ किस तरह व्यवहार कर रहे हैं और वह कक्षा में हो रही चीज़ों के प्रति किस तरह प्रतिक्रिया कर रहे हैं, इसके बारे में एक साथी का नज़रिया मिलना भी फ़ायदेमन्द रहा।
- हमारे पाठों का दस्तावेज़ीकरण : हमने हर कक्षा के अपने प्रमुख अवलोकनों को दर्ज किया, ब्लैकबोर्ड की तस्वीरें लीं, और अगली कक्षाओं के सिलसिले के लिए योजना बनाने की अपनी प्रक्रिया से निकले बिन्दुओं को नोट किया। इस चीज़ से भी काफ़ी मदद मिली कि हमने इलेक्ट्रॉनिक फ़ाइलें बनाकर रखी थीं। इससे हम अपने दस्तावेज़ों तक पहुँच सकते थे, उन्हें एक-दूसरे के साथ साझा कर सकते थे, और देख सकते थे कि उनसे क्या मुद्दे उभरकर आते हैं।
विज्ञान को विद्यार्थियों के लिए व्यक्तिगत रूप से प्रासंगिक और रोचक बनाना चुनौती भरा काम है। इसके लिए ज़रूरी है कि शिक्षक को विद्यार्थियों को विज्ञान की विषयवस्तु से जोड़ने के प्रभावी व देशीय तरीक़ों को निरन्तर विकसित करते रहने के लिए स्थान और समय मिले। अपनी शिक्षण प्रक्रिया को मज़बूत करने के लिए किसी साथी के साथ सहयोग करना ज़रूरी मदद हासिल करने के सबसे आसानी से उपलब्ध, सुलभ और टिकाऊ रूपों में से एक हो सकता है।
मुख्य बिन्दु
- खेल, विद्यार्थियों को रैखिक गति के इर्द-गिर्द पाठ्यचर्या सम्बन्धी अवधारणाओं से रूबरू कराने और उन्हें दूरी, समय, और चाल के असल अनुभवों से जोड़ने के लिए दिलचस्प सन्दर्भ प्रदान कर सकते हैं।
- वह शिक्षण योजना जो विद्यार्थियों की प्रतिक्रियाओं को समायोजित करने के लिए बदलती है, विद्यार्थियों को एक-दूसरे के साथ अपने विचार साझा करने के लिए बुलाने और सभी गतिविधियों एवं चर्चाओं में उनकी सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करने में महत्त्वपूर्ण है।
- इस तरह के शैक्षणिक विचार की तैयारी और उसे अमलीजामा पहनाने के लिए शिक्षकों को काफ़ी सोच-विचार और समय की ज़रूरत हो सकती है। अन्य शिक्षकों का सहयोग सबसे आसानी से उपलब्ध और स्थाई मदद में से एक हो सकता है जिसे शिक्षक ऐसे प्रयासों में हासिल कर सकते हैं।
टिप्पणियाँ
- लेख के शीर्षक की पृष्ठभूमि में उपयोग किए गए चित्र के लिए आभार : Usain Bolt, Tobi 87, Wikimedia Commons. URL: https://en.wikipedia.org/wiki/Usain_Bolt#/ media/File:Leichtathletik_WM_2013_Moskau_100_m_Vorlauf.jpg. License: CC-BY-SA 3.0 Unported Deed.
- इस शिक्षण विधि नज़रिए में सक्रिय रूप से भागीदारी करने के लिए ज़रूरी है कि आपके विद्यार्थी लम्बाई के मापन (दूसरी कक्षा का गणित), समय के अपूर्णांकीय मानों को समझने के लिए दशमलव (पाँचवीं कक्षा का गणित), और प्रत्यक्ष समानुपात (सातवीं कक्षा का गणित) जैसी अवधारणाओं से परिचित हों। उन्हें अनुमान लगाने के लिए संख्याओं का पूर्णांकन करना भी आना चाहिए।
- अगर आपके स्कूल में या उसके आस-पास 50 मीटर की दौड़ के लिए जगह उपलब्ध नहीं है तो अपने विद्यार्थियों को एक छोटी दौड़ के लिए निशान लगाने हेतु प्रोत्साहित करें और इस गतिविधि को उसके अनुरूप ढाल लें। अगर आपके स्कूल में 5 मीटर का धातु का मापन टेप उपलब्ध नहीं है तो विद्यार्थियों को आसानी से उपलब्ध दूसरे विकल्पों के बारे में सोचने के लिए कहें (जैसे छड़ी या धागे की रील) जो दौड़ की दूरी को मापने के लिए इस्तेमाल किए जा सकें। आप अपने विद्यार्थियों को इस बारे में सोचने व चर्चा करने के लिए भी कह सकते हैं कि यह बदलाव उनके मापन की सटीकता को किस तरह प्रभावित करते हैं।
- इस लेख के साथ एक अलग किया जा सकने वाला कक्षा संसाधन शामिल है : शिक्षक मार्गदर्शिका : रैखिक गति से सम्बन्धित अवधारणाएँ सिखाने के लिए सुझाव।
सन्दर्भ
- National Steering Committee for National Curriculum Frameworks. ‘National Curriculum Framework for School Education 2023’. National Council of Educational Research and Training. URL: https://ncert.nic.in/pdf/NCFSE-2023-August_2023.pdf.
- National Council of Educational Research and Training (2007, 2022). ‘Chapter 5: Measurement of Length and Motion’. Science Textbook for Class VI (Reprint 2024-25): 80-100. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?fecu1=5-12.
- National Council of Educational Research and Training (2007, 2022). ‘Chapter 9: Motion and Time’. Science Textbook for Class VII (Reprint 2024-25): 93-108. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?gesc1=9-13.
- Strogatz, Steven. (2019). ‘Usain Bolt’s Split Times and the Power of Calculus’. Quanta Magazine. Uploaded on April 3, 2019. URL: https://www.quantamagazine. org/infinite-powers-usain-bolt-and-the-art-of-calculus-20190403/.
- Žiga P. Škraba. ‘Usain Bolt 9.58 – 100m World Record [50 fps]’. YouTube. Uploaded on Aug 16, 2015. URL: https://www.youtube.com/watch?v=HFLuduKmnW0.
- National Council of Educational Research and Training. ‘Learning Outcomes at the Elementary Stage’. First Edition. April 2017. National Council of Educational Research and Training, Sri Aurobindo Marg, New Delhi. ISBN 978-93-5007-785-6. URL: https://ncert.nic.in/pdf/publication/otherpublications/tilops101.pdf.
- Jimson Lee. ‘Usain Bolt 10 meter splits, Fastest Top Speed, 2008 vs 2009’. SpeedEndurance.com. Uploaded on Aug 19, 2009. URL: https://speedendurance. com/2009/08/19/usain-bolt-10-meter-splits-fastest-top-speed-2008-vs-2009/.