वैज्ञानिकों के जीवन को जानने का प्रोजेक्ट-केन्द्रित तरीक़ा

अनुवाद : सुबोध जोशी | पुनरीक्षण : सुशील जोशी | कॉपी एडिटर : अनुज उपाध्याय

वैज्ञानिकों की जीवनी विद्यार्थियों को खोज की प्रक्रिया से परिचित कराने का एक प्रभावी और आकर्षक तरीक़ा हो सकता है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हम प्रोजेक्ट-केन्द्रित तरीक़े का उपयोग कैसे करते हैं? इस तरह के तरीक़े से विद्यार्थियों में कौन-से कौशल विकसित होते हैं? वे विज्ञान के बारे में क्या सीखते हैं?

शालेय शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ़-एसई) 2023 सुझाव देती है कि : “…वैज्ञानिकों के जीवन कार्यों और वैज्ञानिक ज्ञान के विकास की जाँच करना विद्यार्थियों के लिए विज्ञान की प्रकृति और प्रक्रिया से जुड़ने और वैज्ञानिक मूल्य और प्रवृत्ति विकसित करने का एक तरीक़ा है।1 इसी उद्देश्य से माध्यमिक स्कूल की विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में वैज्ञानिकों की जीवनियाँ शामिल की गई हैं। कक्षा-8 में विज्ञान पढ़ाने का एक अपेक्षित अधिगम प्रतिफल है : “बच्चे वैज्ञानिक खोजों की कहानियों पर चर्चा करें और उनका महत्त्व समझें।2 लेकिन विद्यार्थियों और सहकर्मियों के साथ बातचीत से पता चला कि विद्यार्थियों को अकसर स्वयं ही पाठ्यपुस्तक के इन हिस्सों का अध्ययन करने के लिए कहा जाता है। कुछ मामलों में, शिक्षक उन विवरणों का चयन करते हैं जो परीक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हों और उन्हें कक्षा में बोर्ड पर लिख देते हैं। बच्चों से कहा जाता है कि वे इन विवरणों को अपनी नोटबुक में उतारकर याद कर लें। मैं जिस ग्रामीण परिवेश में पढ़ाता हूँ, वहाँ मैंने ऐसे कई प्रसंग देखे हैं जहाँ बच्चे एक सामान्य लक्ष्य की दिशा में एक समूह के रूप में मिलकर काम करने की पहल करते हैं। उनका लक्ष्य काफ़ी सरल हो सकता है, जैसे किसी नज़दीकी जगह की यात्रा की योजना बनाना या ‘टीम खेल’ खेलना। ऐसे प्रत्येक प्रसंग में, बच्चे इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक योजना बनाते हैं, इस योजना के कार्यान्वयन में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका तय करते हैं, आवश्यक जानकारी एकत्र करते हैं और उसका विश्लेषण करके ज़रूरी निर्णय लेते हैं। ये क़दम शालेय शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ़-एसई) 2023 में विज्ञान पढ़ाने के लिए सुझाए गए प्रोजेक्ट-केन्द्रित तरीक़े का हिस्सा हैं : “यह दृष्टिकोण कक्षा के भीतर होने वाले अधिगम को कक्षा के बाहर जारी रखने और कुछ समयावधि तक उसे विस्तारित करने की अनुमति देता है। उदाहरण के लिए, चन्द्रमा की कलाओं को समझने के लिए महीने भर में चन्द्रमा में होने वाले परिवर्तनों का अवलोकन करना। इस प्रक्रिया को दैनिक जीवन से भी जोड़ा जाता है। प्रोजेक्ट-केन्द्रित तरीक़ा विद्यार्थियों को कलाकृतियाँ/ उत्पाद (चार्ट, प्रस्तुतियाँ, भाषण) तैयार करने की गुंजाइश देता है जो उनकी उभरती समझ दर्शाते हैं और सम्प्रेषित करते हैं। यह विभिन्न पाठ्यक्रम क्षेत्रों में अवधारणाओं के एकीकरण की भी अनुमति देता है।1 चूँकि ग्रामीण बच्चे अपनी रोज़मर्रा की दुनिया में प्रोजेक्ट-केन्द्रित तरीक़े का उपयोग इतनी सहजता और प्रभावी ढंग से करते हैं, इसलिए मैंने अपने कक्षा-8 के विद्यार्थियों को वैज्ञानिकों की जीवनी से परिचित कराने के लिए इसका उपयोग करने का फ़ैसला किया।

कक्षा में मेरी प्रक्रिया

चरण-1 : कक्षा-8 की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2024-2025) में आठ वैज्ञानिकों की जीवनियाँ शामिल हैं : लुई पाश्चर, अलेक्जेंडर फ्लेमिंग, एडवर्ड जेनर, रॉबर्ट कोच, इयान विल्मुट, ओटो वॉन गेरिक, विलियम निकल्सन और बेंजामिन फ्रैंकलिन। इनमें से कोई भी वैज्ञानिक भारत से नहीं है। शालेय शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ़-एसई) 2023 के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर विज्ञान शिक्षा के पाठ्यचर्या लक्ष्यों में से एक यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक विद्यार्थी : “बीते समय में और वर्तमान समय में विज्ञान के समग्र क्षेत्र में भारत का योगदान समझे और उसकी सराहना करे, जिसमें इसके घटक विषय भी शामिल हैं।1 इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, मैंने उन भारतीयों की एक सूची तैयार की, जिनका विज्ञान के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। इनमें सुश्रुत, चरक, कणाद, आर्यभट्ट, भास्कराचार्य, वराह मिहिर, ब्रह्मगुप्त, नागार्जुन, बीरबल साहनी, हरगोविन्द खुराना, मेघनाद साहा, एम.एस. स्वामीनाथन, होमी जहाँगीर भाभा, विक्रम साराभाई, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, सी.वी. रमन, श्रीनिवास रामानुजन, जगदीश चन्द्र बोस और सत्येन्द्र नाथ बोस शामिल थे। इनमें से दो वैज्ञानिकों के बारे में कक्षा-6 की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2024-2025) में बताया गया है।

चरण-2 : मैंने इन वैज्ञानिकों की तस्वीरें एक मोटे कार्डबोर्ड पर चिपकाकर कक्षा में प्रदर्शित कीं। मैंने अपने विद्यार्थियों को इन तस्वीरों को देखने के लिए 10 मिनट दिए और पूछा कि क्या वे उनमें से किसी को पहचानते हैं। मेरे विद्यार्थी जिस एकमात्र वैज्ञानिक को जानते थे (थोड़ा-बहुत) वे अब्दुल कलाम थे। उनके नाम के अलावा, वे जानते थे कि कलाम एक वैज्ञानिक थे और भारत के राष्ट्रपतियों में से एक थे। मैंने कार्डबोर्ड पर प्रदर्शित प्रत्येक वैज्ञानिक का नाम बताया।

चरण-3 : विद्यार्थियों की सहमति से, मैंने प्रत्येक विद्यार्थी का नाम मेरी सूची में शामिल वैज्ञानिकों में से एक के नाम पर रखा। उनका काम उनके नाम वाले वैज्ञानिक के बारे में जानकारी खोजना था। अपेक्षा यह थी कि दो सप्ताह पूरे होने पर वे उस वैज्ञानिक की जीवनी प्रस्तुत करेंगे। जीवनी में इस तरह के विवरण शामिल हो सकते हैं : (क) हम उस वैज्ञानिक के जीवन और उनके सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में क्या जानते हैं, (ख) विज्ञान के क्षेत्र में उनका क्या योगदान था और (ग) हमने उनके काम से क्या सीखा है या उनके योगदानों से हमें किस तरह लाभ हुआ है। मैंने उन्हें किताबों, अख़बारों, पत्रिकाओं और इंटरनेट पर यह जानकारी खोजने के लिए प्रोत्साहित किया।

चरण-4 : मैंने देखा कि मेरे विद्यार्थी यह कार्य गम्भीरता से कर रहे थे। उसके बाद के दिनों में, मैंने उन्हें आपस में, अपने भाई-बहनों और स्कूल के अन्य शिक्षकों के साथ अपने प्रोजेक्ट पर चर्चा करते सुना। कुछ विद्यार्थी मेरे पास आए और उन्होंने जो कुछ सीखा था, उसे साझा किया या पूछा कि उन्हें कुछ और जानकारी कहाँ से मिल सकती है। दो सप्ताह पूरे होने पर, प्रत्येक विद्यार्थी ने उनके नाम वाले वैज्ञानिक के बारे में एक-एक लेख प्रस्तुत किया (चित्र-1 देखें)।

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चित्र-1 : विद्यार्थियों द्वारा लिखी गई वैज्ञानिकों की जीवनियों के उदाहरण। नोट : इस चित्र में दिख रहे बच्‍चे के फ़ोटो को बच्चे के अभिभावक की अनुमति से प्रकाशित किया गया है। बच्चे की गोपनीयता बनाए रखने के लिए बच्चे का चेहरा धुँधला कर दिया गया है। इस चित्र के पुनः उपयोग के विवरण के लिए कृपया यहाँ ‘इमेज और मीडिया उपयोग’ देखें। Credits: Naresh Kumar Sen. Licence: CC BY-NC-ND 4.0.

चरण-5 : विद्यार्थियों को एक समूह के रूप में एक साथ लाने के लिए, मैंने उनमें से प्रत्येक को दिए गए नाम वाले वैज्ञानिक की भूमिका निभाने के लिए कहा। साथ ही उस वैज्ञानिक के बारे में जो कुछ भी उन्होंने सीखा उसे कक्षा में प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया। मेरे विद्यार्थियों को यह कार्य पसन्द आया। इससे उन्हें अपना स्वयं का काम साझा करने और उन वैज्ञानिकों के बारे में सुनने का मौक़ा मिला जिन पर उनके साथियों ने शोध किया था।

चरण-6 : मैंने कक्षा में चर्चा के साथ प्रोजेक्ट समाप्त किया। मैंने अपने विद्यार्थियों को वह साझा करने के लिए आमंत्रित किया जो उन्होंने अपने और अपने साथियों के काम से सीखा था। इस अभ्यास ने उन्हें एक समूह के रूप में अपनी सीख पर विचार करने और उसे व्यक्त करने का मौक़ा दिया।

चलते-चलते

विद्यार्थियों को भारतीय वैज्ञानिकों के जीवन और योगदान से परिचित कराने के लिए प्रोजेक्ट-केन्द्रित तरीक़े का इस्तेमाल करने के कई फ़ायदे थे। विद्यार्थियों को दिए गए व्यक्तिगत कार्य ने उनकी जिज्ञासु प्रकृति और ख़ुद से नई चीज़ों की खोज करने के प्रति उनमें रुचि जगाई। जीवनी लिखने की प्रक्रिया ने उन्हें विभिन्न स्रोतों से जानकारी एकत्र करने, इसे समझने और मान्य निष्कर्षों तक पहुँचने के लिए इस जानकारी का विश्लेषण करने और उन्होंने जो कुछ भी सीखा था उसे अपने साथियों और शिक्षकों को सम्प्रेषित करने जैसे कौशल विकसित करने का मौक़ा दिया। कक्षा प्रस्तुतियों ने विद्यार्थियों को अपने साथियों से सुनने और सीखने का मौक़ा दिया। ये विज्ञान में ज्ञान निर्माण के महत्त्वपूर्ण पहलू हैं।

अपनी प्रस्तुतियों के बाद हुई चर्चा में, विद्यार्थियों ने बताया कि कैसे सुश्रुत, लुई पाश्चर, एडवर्ड जेनर, बेंजामिन फ्रैंकलिन और एम.एस. स्वामीनाथन जैसे वैज्ञानिकों के काम के बारे में जानने से उन्हें अपनी वास्तविक दुनिया में विज्ञान की उपयोगिता का पता चला। इस अवलोकन ने उन कई तरीक़ों पर चर्चा को आगे बढ़ाया, जिनसे भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों के वैज्ञानिकों के योगदान ने न केवल जानें बचाने में मदद की है, बल्कि हमारे जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार किया है। विद्यार्थियों ने यह भी बताया कि कैसे इस प्रोजेक्ट ने उनकी दो सबसे आम मान्यताओं को चुनौती दी : (क) वैज्ञानिक शायद ही कभी भारतीय होते हैं और (ख) वैज्ञानिकों के पास विशेष क्षमताएँ होती हैं जो उन्हें अन्य लोगों से बहुत अलग बनाती हैं (मेरे विद्यार्थियों के शब्दों में, वे ‘सामान्य’ लोगों की तुलना में ‘अधिक चतुर’ या ‘अधिक बुद्धिमान’ थे)।3 इस प्रोजेक्ट के माध्यम से, विद्यार्थियों ने ऐसे कुछ भारतीयों के बारे में जाना जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है (देखें गतिविधि शीट : ये वैज्ञानिक कौन हैं?)। जैसे-जैसे उन्होंने इन वैज्ञानिकों के जीवन का दस्तावेज़ीकरण किया और कक्षा में उनकी भूमिका निभाई, वे उन वैज्ञानिकों से परिचित होने लगे जिनका नाम उन्हें दिया गया था। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के कुछ समय बाद तक विद्यार्थी एक-दूसरे को उनके वास्तविक नामों की बजाय उन वैज्ञानिकों के नाम से पुकारते थे जिन पर उन्होंने शोध किया था। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह रही कि अब वे अपनी पाठ्यपुस्तकों में दी गई जीवनियों को सहज रुचि और जिज्ञासा के साथ देखते थे, न कि परीक्षाओं के लिए यंत्रवत याद की जाने वाली सामग्री के रूप में।

मुख्‍य बिन्‍दु

वैज्ञानिकों के जीवन को जानने का प्रोजेक्ट-केन्द्रित तरीक़ा
  • वैज्ञानिकों की जीवनियाँ विद्यार्थियों को विज्ञान की प्रक्रिया से परिचित कराने का एक प्रभावी और आकर्षक तरीक़ा हो सकती हैं।
  • एक प्रोजेक्ट-केन्द्रित तरीक़ा जो विद्यार्थियों को वैज्ञानिकों के जीवन और कार्य के प्रमुख पहलुओं का अपने साथियों के साथ दस्तावेज़ीकरण करने और साझा करने के लिए आमंत्रित करता है, उन्हें वैज्ञानिक ज्ञान इकट्ठा करने, उसका विश्लेषण करने और सम्प्रेषित करने जैसे कौशल विकसित करने में मदद कर सकता है।
  • भारत के साथ-साथ दुनिया के अन्य हिस्सों के वैज्ञानिकों पर ध्यान केन्द्रित करने से विद्यार्थियों को इस बारे में अपनी कुछ मान्यताओं को जाँचने का मौक़ा मिलता है कि वैज्ञानिक कहाँ से आते हैं और कौन वैज्ञानिक हो सकता है।
  • वैज्ञानिक खोजों के पीछे जो व्यक्ति रहे हैं उनसे जुड़ने और यह देखने का अवसर कि इन खोजों ने हमारे जीवन को कैसे बेहतर बनाया है, विद्यार्थियों में विज्ञान और वैज्ञानिकों के प्रति रुचि विकसित करने में मदद कर सकता है जो परीक्षाओं से परे है।

आभार

  1. विज्ञान शिक्षण और अधिगम में सहयोग महत्त्वपूर्ण है। लेखक अपने संस्थान के प्रमुख सोनू मिस्त्री और उनके सहयोगियों टीना मिस्त्री और सरूपाराम को उनके निरन्तर सहयोग के लिए धन्यवाद देते हैं।
  2. सम्पादक इस लेख के मसौदे को साझा करने के लिए अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन के गजेन्द्र पाल चौहान और अमोल आनन्दराव काटे को धन्यवाद देते हैं। मसौदे की समीक्षा और डिज़ाइन के हर चरण को सुविधाजनक बनाने में मदद के लिए गजेन्‍द्र पाल का आभार। हम मूल हिन्‍दी में लिखे गए मसौदे के अँग्रेज़ी अनुवाद को साझा करने के लिए अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के राजेश उत्साही को धन्यवाद देते हैं। मसौदे में वर्णित प्रोजेक्ट-केन्द्रित तरीक़े पर इनपुट के लिए सौरव सोम और विनय सूरम को भी धन्यवाद देते हैं।

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  • Credits for the image used in the background of the article title: Constructing knowledge, Kathas_Fotos, Pixabay. URL: https://pixabay.com/photos/ jengawooden-blocks-game-strategy-6380189/. License: CC0.
  • इस लेख में एक अलग करने योग्य कक्षा संसाधन शामिल है : गतिविधि शीट : ये वैज्ञानिक कौन हैं? शीट में दर्शाए गए वैज्ञानिक हैं : (क) जानकी अम्माल, (ख) अन्ना मणि, (ग) असीमा चटर्जी, (घ) इन्दिरा हिन्दुजा, (ड) परमजीत खुराना और (च) कमला सोहोनी। यदि आप अपनी कक्षा में इस गतिविधि को आज़माते हैं, तो आप किन वैज्ञानिकों को शामिल करेंगे और क्यों? हमें बताने के लिए (iwonder@apu.edu.in) पर लिखें।

सन्दर्भ

  1. National Steering Committee for National Curriculum Frameworks. ‘National Curriculum Framework for School Education 2023’. National Council of Educational Research and Training. URL: https://ncert.nic.in/pdf/NCFSE-2023-August_2023.pdf.
  2. National Council of Educational Research and Training. ‘Learning Outcomes at the Elementary Stage’. First Edition. April 2017. National Council of Educational Research and Training, Sri Aurobindo Marg, New Delhi. ISBN 978-93-5007-785-6. URL: https://ncert.nic.in/pdf/publication/otherpublications/tilops101.pdf.
  3. The Nobel Prize Inspiration Initiative (NPII). ‘The five myths about scientists according to Nobel Laureate Martin Chalfie’. URL: https://www.youtube.com/ watch?v=0TBbK6cuuvs.