दिसम्‍बर 2024 अंक

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आई वंडर…के दिसम्‍बर, 2024 अंक में आपका स्‍वागत है। इस अंक में प्रकाशित कोई भी लेख और कक्षा संसाधन आपके कक्षा शिक्षण में कार्य में सहायक हैं, तो हमें बताएँ कैसे। आपके ऐसे अनुभव अगले अंक में शामिल किए जाएँगे जो अन्‍य शिक्षकों के लिए मददगार हो सकते हैं।

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सम्पादक की ओर से...

इस अक्तूबर में, मुझे और मेरी सहकर्मियों (राधा गोपालन तथा विजेता रघुराम) को मध्‍य प्रदेश के दमोह और भोपाल ज़ि‍ले के नौ सरकारी स्कूलों का दौरा करने का मौक़ा मिला। यह एक मौक़ा था उन कई सारे शिक्षकों और शिक्षक-प्रशिक्षकों की कहानियाँ सुनने का जिन्हें निष्क्रिय बैठे रहना मंज़ूर नहीं है। उन्हें मंज़ूर नहीं है कि प्रशासन, नौकरशाही, संसाधनों व समय की कमी, सहकर्मियों के निराशावादी रवैए, उनके काम के प्रति औरों के नकारात्मक नज़रिए, अपने जीवन की परिस्थितियाँ, शिक्षार्थी के रूप में अपने अनुभव, और/ या शिक्षक के रूप में उनके भय उन्हें अपने शिक्षण व सीखने पर नियंत्रण रखने से रोकें। उनके इस अस्‍वीकार की जड़ें इस बात में निहित हैं कि वे ख़ुद अपना मूल्य और समाज में शिक्षक की भूमिका के महत्त्व को देख पा रहे हैं। उस पारदर्शिता के साथ जिसमें उन्होंने अपने सहकर्मियों के साथ अपनी विफलताओं को साझा किया। अपनी कक्षाओं में कुछ नया करने की उनकी इच्छा बलवती है। ये कहानियाँ अकसर बाहरी विद्रोह के ताप के बारे में कम बल्कि उनके शान्त आन्तरिक प्रतिरोध के बारे में ज़्यादा थीं। उनमें एक दैनन्दिन गुणवत्ता थी। हर कहानी अलग थी। फिर भी, सारी कहानियाँ अपने शैक्षणिक अभ्‍यास में निखरते विज्ञान शिक्षकों की थीं।

इस तरह के विकास में कौन-से कारक सहायक होते हैं? मैं दो कारकों के बारे में सोच सकती हूँ जो अभ्‍यास के विभिन्न सन्दर्भों में विज्ञान शिक्षकों के लिए साझा हो सकते हैं। इनमें से एक उस प्रकार के प्रश्न हो सकते हैं जो हमारे भीतर मौजूद हैं। जैसे कि : हम पाठ्यपुस्तकों में दी गई अवधारणाओं में अपने विद्यार्थियों की जिज्ञासा और रुचि कैसे जगाएँ? कक्षा में वे जो कुछ सीखते हैं उसे उनके रोज़मर्रा के अनुभवों से कैसे जोड़ें? विद्यार्थी विज्ञान कक्षा में अभ्यास किए गए कौशल का वास्तविक दुनिया की समस्याओं को समझने-बूझने के लिए कितने प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकते हैं? क्या विज्ञान की प्रक्रिया उन्हें उन सम्‍भावनाओं के लिए खोल सकती है जो अभ्‍यास समुदाय प्रदान करते हैं? क्या यह उन्हें यह समझने में मदद कर सकता है कि आज हम अपनी दुनिया के बारे में जो कुछ भी जानते हैं वह कई लोगों के प्रयासों से उस ज्ञान के आधार पर विकसित हुआ है जो हम कल जानते थे? क्या विज्ञान अधिक स्पष्ट रूप से सोचने, अधिक गहराई से महसूस करने और अधिक साहस और ध्यान के साथ अपने को अभिव्‍यक्‍त करने में विद्यार्थियों की मदद कर सकता है? क्या यह उन्हें प्राकृतिक संसार के प्रति जिज्ञासा और उसके साथ जुड़ाव खोजने में मदद कर सकता है जो जीवन भर उनके साथ बना रहे? दूसरा कारक उस समुदाय से सीखने की क्षमता हो सकती है जिसका हम हिस्सा हैं। इस समुदाय में ऐसे शिक्षक शामिल हैं जो हमारे प्रश्नों को साझा करते हैं और जानते हैं कि वे हमारे लिए क्यों महत्त्वपूर्ण हैं। वे इस बात को अधिक समझ सकते हैं कि इन प्रश्नों का यह तकाज़ा क्‍यों है कि अपने विद्यार्थियों और पाठ्यक्रम से जुड़ने के हमारे तरीक़े को बदलने के लिए छोटे-छोटे क़दम उठाने के लिए धैर्य और आत्मविश्वास की ज़रूरत है।

वे ऐसे लोग हैं जो हमारे संघर्षों और हमारे अनुभव से सबसे अधिक सीख सकते हैं। और वे ऐसे लोग भी हैं जिनके अनुभवों और संघर्षों से हम सबसे अधिक सीख सकते हैं। इस मुद्दे से जुड़े ऐसे कई अनुभव हैं। मैं तीन का ख़ासतौर पर ज़िक्र करना चाहूँगी। नरेश कुमार सेन बताते हैं कि वैज्ञानिकों की जीवनी लिखने में अपने विद्यार्थियों को शामिल करने का उनका निर्णय इस बात से प्रेरित था कि वे अपनी वास्तविक दुनिया में प्रोजेक्‍ट-केन्द्रित दृष्टिकोण के तत्वों का कितनी प्रभावशीलता से उपयोग करते हैं। अनीश मोकाशी और श्रीजा वेलायुधन हमें बताते हैं कि कक्षा में उसैन बोल्ट के रिकॉर्ड तोड़ फर्राटा दौड़ का वीडियो चलाने के उनके निर्णय ने कैसे रैखिक गति में औपचारिक अवधारणाओं के साथ अधिक सक्रिय रूप से जुड़ने में उनके विद्यार्थियों की मदद की। और शिव पाण्डे बताते हैं कि उनके द्वारा चुने गए प्रश्नों ने उनके विद्यार्थियों को एक सस्ता पिनहोल कैमरा बनाने और उसमें हेर-फेर करने के अपने अनुभव के बारे में अधिक रचनात्मक और आलोचनात्मक रूप से सोचने के लिए प्रेरित किया।

क्या आप माध्यमिक स्तर (कक्षा-6 से 8) के विद्यार्थियों को विज्ञान पढ़ाते हैं? एक शिक्षक के रूप में आपके शिक्षण अभ्‍यास के विकास में कौन-से कारक सहायक हैं? किस तरह के प्रश्न इसे प्रेरित करते हैं? अन्य शिक्षक इसमें क्या योगदान देते हैं? आपके विकास ने आपकी कक्षा में शिक्षण को कैसे बदला है? और इसने आपके विद्यार्थियों के सीखने को कैसे बदला है? हमारे साथ अपना अनुभव साझा करें।

चित्रा रवि
सम्पादक