अलग-अलग तरीक़ों से सवाल पूछने के लिए कहने का महत्त्व

“सवाल सीखने और ज्ञान के निर्माण, दोनों का एक केन्द्रीय पहलू है। फिर भी, विद्यार्थी अकसर सवाल से ज़्यादा जवाब को महत्त्व देते प्रतीत होते हैं… मैं इसके बिल्कुल उलट सोचता हूँ। किसी सवाल के जवाब की तलाश से सीखना सम्भव होता है, न कि ख़ुद जवाब से।” – रिचर्ड ज़ेयर, स्टैनफ़ोर्ड विश्वविद्यालय, अमरीका में रसायनविज्ञान के प्राध्यापक।1
हमारे विद्यार्थी अपनी पढ़ाई के समय का अच्छा-ख़ासा हिस्सा परीक्षाओं में आने वाले सवालों के जवाब तैयार करने में बिताते हैं। क्या इतनी समय-खपाऊ यह क़वायद विज्ञान की बेहतर समझ की ओर ले जाती है? इसका सीधा-सा जवाब है — नहीं! हालाँकि विद्यार्थियों के लिए परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करना लगभग अनिवार्य होता है, पर विषय को अच्छे से समझना उनके लिए ज़्यादा महत्त्वपूर्ण है। और यह परीक्षाओं के सवालों के जवाब सीख लेने भर से नहीं होता है। वास्तव में, विद्यार्थी जितने सवालों के जवाब देते हैं, उससे ज़्यादा सवाल उन्हें पूछना चाहिए।
अमरीकी भौतिकविज्ञानी इसिडोर आइज़ैक रबी ने एक बार कहा था : “मेरी माँ ने कोई इरादा न होते हुए भी मुझे वैज्ञानिक बना दिया। ब्रुकलिन में हर दूसरी यहूदी माँ अपने बच्चों के स्कूल से घर आने के बाद उनसे पूछती : तो? आज तुमने कुछ सीखा? लेकिन मेरी माँ ऐसा नहीं करतीं। वे कहतीं, ‘इज़्ज़ी, आज तुमने कोई अच्छा सवाल पूछा?’ इसी अन्तर — अच्छे सवाल पूछना — ने मुझे वैज्ञानिक बनाया।”2 रबी को 1944 में नाभिकीय चुम्बकीय अनुनाद (न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेज़ोनेंस — एनएमआर) की खोज के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला था। इस ग़ैर-आक्रामक विश्लेषणात्मक तकनीक के रसायनविज्ञान, जीवविज्ञान और चिकित्सा जैसे कई क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण उपयोग हैं।
विज्ञान शिक्षक की भूमिका
शालेय शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ़-एसई) 2023 में कहा गया है : “शिक्षण विधि एवं मूल्यांकन को विद्यार्थियों के विज्ञान सीखने के तरीक़े से जोड़ने में शिक्षक की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण है। शिक्षकों को ऐसा वातावरण निर्मित करना चाहिए जो स्वाभाविक जिज्ञासा को बढ़ावा दे, सवाल पूछने को प्रेरित करे, स्वयं करके सीखने वाली गतिविधियों के लिए ज़्यादा-से-ज़्यादा मौक़े उपलब्ध कराए और विचारों पर चर्चा करने के लिए पर्याप्त गुंजाइश दे।”4 रूपरेखा सुझाव देती है कि शिक्षक ऐसी शिक्षण विधियों का इस्तेमाल करें जो ‘विज्ञान की सवाल पूछने जैसी प्रक्रियाओं ’ का अनुकरण करती हों और विद्यार्थियों का आकलन उनके द्वारा देखी गई घटनाओं के बारे उनकी ‘सवाल पूछने’ की क्षमता के लिए करती हों।
यहाँ मैं ऐसे तीन तरीक़े सामने रख रहा हूँ जिन्हें शिक्षक विज्ञान शिक्षा के किसी भी स्तर पर उपयोग कर सकते हैं। मैं भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलूरु में जो कोर्स पढ़ाता हूँ, उसमें विद्यार्थियों को सवाल पूछने के लिए प्रेरित करने हेतु इन तरीक़ों का उपयोग करता हूँ। इन तरीक़ों ने मुझे मेरे विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमताओं का आकलन करने का मौक़ा भी दिया है। मैं अपने विद्यार्थियों को सामान्य क़िस्म का होमवर्क नहीं देता। इसकी बजाय, हर 2-3 हफ़्तों में, मैं उनसे उनके लेखन का एक पेज देने के लिए कहता हूँ जिसमें विज्ञान का एक सवाल और उसका सम्भावित जवाब हो। सम्भावित, क्योंकि हो सकता है उस सवाल का जवाब ज्ञात ही न हो।
मेरी शर्त होती है कि यह सवाल किसी पाठ्यपुस्तक या परीक्षा से लिया गया नहीं हो सकता। साथ ही, बेहतर हो कि उनका जवाब उनकी पाठ्यपुस्तक को पढ़ने से ज़ाहिर न होता हो। बीते सालों में, कई विद्यार्थियों ने मुझे बताया है कि उन्हें इस तरह के होमवर्क में बहुत मज़ा आता था क्योंकि इसके लिए उन्हें पढ़ना और उससे भी ज़्यादा महत्त्वपूर्ण, सोचना पड़ता था। एक शिक्षक के दृष्टिकोण से इस विधि का एक और लाभ है। हर विद्यार्थी एक अलग सवाल लेकर आता है क्योंकि इस कार्य में एक-दूसरे से होमवर्क कॉपी करने की गुंजाइश नहीं होती।
इसी का एक दूसरा रूप मैंने अपने आकलनों में अपनाया है। सामान्य सवालों के अलावा मैं एक सवाल ऐसे चित्र के साथ देता हूँ जो आकलन में शामिल विषयों से सम्बन्धित हो। यह चित्र कोई आलेख या तस्वीर हो सकता है। मैं विद्यार्थियों से विज्ञान के ऐसे कोई भी दो सवाल सामने रखने को कहता हूँ जो कोई व्यक्ति उस चित्र को देखकर पूछ सकता है (देखें गतिविधि शीट : वैज्ञानिक सवाल पूछना और शिक्षक मार्गदर्शिका)।
तीसरी ‘तरक़ीब’ जो मैं अकसर अपनाता हूँ वह है विद्यार्थियों को एक सवाल और उसका जवाब प्रदान करना। मैं उन्हें बताता हूँ कि वह जवाब सही, आंशिक रूप से सही या बिल्कुल ग़लत हो सकता है। विद्यार्थी का काम होता है जवाब की परिशुद्धता का ‘मूल्यांकन’ करना और उसे अंक देना। मैं उनसे उनके मूल्यांकन का समर्थन करने वाले कारण बताने को भी कहता हूँ। मैं उनके मूल्यांकन और कारणों की परिशुद्धता का आकलन करके उन्हें अंक देता हूँ। मेरे विद्यार्थियों को मूल्यांकन का यह तरीक़ा भी पसन्द आया क्योंकि इसमें उन्हें अपने आकलन का सृजनात्मक ढंग से प्रयोग करने का मौक़ा मिलता था।
मुख्य बिन्दु
- हमारे आकलन अकसर विद्यार्थियों द्वारा हमारे सवालों के जवाब देने की क्षमता की परीक्षा लेते हैं, बनिस्बत उनकी सवाल पूछने की क्षमता के।
- प्राकृतिक दुनिया के बारे में वैज्ञानिक सवाल पूछना सीखना एक वैज्ञानिक की भाँति सोचने का एक महत्त्वपूर्ण पहलू है। इससे विद्यार्थियों को अपनी पाठ्यपुस्तकों में दी गई जानकारी से आगे जाने और अपनी रचनात्मकता को अमल में लाने का मौक़ा मिलता है।
- लेख में ऐसे तीन जाँचे-परखे तरीक़ों का उल्लेख किया गया है जिनमें आकलनों का इस्तेमाल करके शिक्षक विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सवाल पूछने का कौशल विकसित करने और उसका अभ्यास करने में मदद कर सकते हैं।
आभार
यह लेख पहले ‘एक्सेलेरेटिंग साइंस’ में प्रकाशित हुआ था जिसका सम्पादन किया था धरणीधर दास और सुरजीत चौधरी ने और प्रकाशक थे प्राचार्य, जमुगुरी हायर सेकेंडरी स्कूल, शोनितपुर 784180 ©2013। इसके बाद यह पुनः प्रकाशित हुआ ‘रेज़ोनेंस’, अंक 20, 2015 में (यूआरएल : https://www.ias.ac.in/article/fulltext/reso/020/01/0073-0075)। यहाँ प्रकाशित संस्करण में : (अ) मिडिल स्कूल विज्ञान शिक्षकों के लिए प्रासंगिक मूल लेख के हिस्सों को शामिल किया गया है, (ब) नए ब्यौरे शामिल हैं जो लेख के मुख्य विचारों को मिडिल स्कूल विज्ञान पाठ्यक्रम के साथ जोड़ते हैं और (स) मूल लेख के वे हिस्से शामिल नहीं हैं जो बड़ी कक्षाओं के लिए उपयुक्त अवधारणाओं या शिक्षण प्रक्रियाओं से सम्बन्धित थे। हम लेखक उदय मैत्रा और कॉपीराइट अधिकारी सुरजीत चौधरी को धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने हमें यह संस्करण छापने की अनुमति दी। सम्पादक इन अनुमतियों को हासिल करने की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, बेंगलूरु की विजेता रघुराम का भी धन्यवाद करते हैं।
टिप्पणियाँ
- लेख के शीर्षक की पृष्ठभूमि में उपयोग किए गए चित्र के लिए आभार: Questions, Pixabay. Questions, Pixabay. URL: https://www.pexels.com/photo/question-mark-on-chalkboard- 356079/. License: CC0.
- इस लेख के साथ दो अलग किए जा सकने वाले कक्षा संसाधन दिए जा रहे हैं ‘गतिविधि शीट वैज्ञानिक सवाल पूछना‘ और एक उससे जुड़ी ‘शिक्षक मार्गदर्शिका‘।
सन्दर्भ
- Richard N Zare. ‘The Power of the Question’. Resonance (Aug 2009): 818-819. URL: https://www.ias.ac.in/article/fulltext/reso/014/08/0818-0819.
- Donald Sheff. ‘Izzy, Did You Ask a Good Question Today?’. New York Times (Jan 1988): 26. URL: https://www.nytimes.com/1988/01/19/opinion/l-izzy-did-you- ask-a-good-question-today-712388.html.
- Nobel Prize Outreach. ‘The Nobel Prize in Physics 1944’. Nobel Prize Foundation. URL: https://www.nobelprize.org/prizes/physics/1944/summary/.
- National Steering Committee for National Curriculum Frameworks. ‘National Curriculum Framework for School Education 2023’. National Council of Educational Research and Training. URL: https://ncert.nic.in/pdf/NCFSE-2023-August_2023.pdf.