कक्षा शिक्षण में NCF-SE की भूमिका

भारत के संविधान में समाज की संकल्पना से दिशा लेकर, NEP 2020 में कहा गया है : “…शैक्षिक प्रणाली का उद्देश्य अच्छे इन्सानों का विकास करना है — जो तर्कसंगत विचार और कार्य करने में सक्षम हों, जिनमें करुणा और सहानुभूति, साहस और लचीलापन, वैज्ञानिक चिन्तन और रचनात्मक कल्पनाशक्ति, नैतिक मूल्य और आधार हों। इसका उद्देश्य ऐसे उत्पादक लोगों को तैयार करना है जो कि अपने संविधान द्वारा परिकल्पित — समावेशी और बहुलतावादी समाज के निर्माण में बेहतर तरीक़े से योगदान करें।”1 शिक्षा की यह दृष्टि बहुत प्रासंगिक होते हुए भी, स्कूली विज्ञान शिक्षकों के लिए उनके कक्षा शिक्षण के सन्दर्भ में कुछ अमूर्त लग सकती है। इस तरह के सवाल उठ सकते हैं : विज्ञान की पाठ्यचर्या में शामिल विषयवस्तु इस उद्देश्य को पूरा करने में कैसे मदद कर सकती है? यह दृष्टि विज्ञान शिक्षकों को उनके कक्षा शिक्षण की प्रक्रिया में कैसे मार्गदर्शन प्रदान कर सकती है?
इन सवालों के उत्तर के लिए, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा — शालेय शिक्षा (NCF-SE) 2023 अधिगम मानक (लर्निंग स्टैन्डर्ड) का ढाँचा प्रदान करती है (चित्र-1 देखें)। यह ढाँचा शिक्षकों को ऐसे शिक्षण अनुभव विकसित करने और उन्हें लागू करने में मार्गदर्शन देने के लिए बनाया गया है, जो शिक्षा के समग्र और अमूर्त लक्ष्यों को ठोस कक्षा अभ्यासों में रूपान्तरित कर सकें।

माध्यमिक स्तर पर विज्ञान के लिए अधिगम मानक
- स्कूल स्तर पर विज्ञान पाठ्यचर्या के उद्देश्य : NCF-SE के अनुसार, स्कूल स्तर पर विज्ञान शिक्षा का उद्देश्य है : “…स्वयं खोजबीन के माध्यम से, प्राकृतिक और भौतिक संसार की समझ विकसित करना। विज्ञान सीखने से विद्यार्थियों में अवलोकन, विश्लेषण और तार्किक निष्कर्ष निकालने जैसे प्रक्रिया कौशल भी विकसित होते हैं। इससे वे समाज और काम की दुनिया में वैज्ञानिक मिज़ाज, आलोचनात्मक व साक्ष्य-आधारित सोच, प्रासंगिक सवाल पूछने, रीति-रिवाज़ों का विश्लेषण करने और आवश्यक बदलाव लाने में सक्रिय रूप से भाग ले पाते हैं।”2 यह इस बात पर ज़ोर देता है कि विज्ञान को केवल तथ्यात्मक ज्ञान के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे ज्ञान के निर्माण और उपयोग के साधन के रूप में भी प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इस ज्ञान के उपयोग का विवरण देते हुए, NCF-SE कहता है कि : “अच्छी विज्ञान शिक्षा में, विद्यार्थियों में सवाल पूछने और शोध करने की मानसिकता विकसित करना शामिल है, जो भारत और दुनिया के सामने आज की चुनौतियों का समाधान करने की लिए महत्त्वपूर्ण है; जैसे जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, टिकाऊ विकास के लिए प्रौद्योगिकी का विकास और उपयोग, न्यायपूर्ण और समान आजीविका का निर्माण और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीना। इससे विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि विज्ञान और वैज्ञानिक अनुसन्धान समाज के सामने खड़ी प्रमुख चुनौतियों का समाधान कैसे कर सकते हैं।”2
- माध्यमिक स्तर पर विज्ञान पाठ्यचर्या के उद्देश्य : NCF-SE के अनुसार, कक्षा-6 से 8 के लिए विज्ञान पाठ्यचर्या में विद्यार्थियों को निम्नलिखित अवसर प्रदान किए जाने चाहिए :
- CG-1 : पदार्थ और इसके घटकों, गुणों और व्यवहार को टटोलना।
- CG-2 : भौतिक दुनिया की वैज्ञानिक और गणितीय तरीक़े से पड़ताल करना।
- CG-3 : जीव-जगत का वैज्ञानिक तरीक़े से अध्ययन करना।
- CG-4 : स्वास्थ्य, स्वच्छता और ख़ुशहाली के घटकों को समझना।
- CG-5 : विज्ञान, प्रौद्योगिकी और समाज के आपसी सम्बन्ध को समझना।
- CG-6 : वैज्ञानिक ज्ञान के विकास से जुड़कर और वैज्ञानिक अन्वेषण के माध्यम से विज्ञान की प्रकृति और प्रक्रियाओं की पड़ताल करना।
- CG-7 : विज्ञान से सम्बन्धित सवालों, अवलोकनों और निष्कर्षों को सम्प्रेषित करना।
- CG-8 : अतीत और वर्तमान में विज्ञान के समग्र क्षेत्र में और उसके विभिन्न विषयों में भारत के योगदान को समझना व सराहना।
- CG-9 : वैज्ञानिक ज्ञान के सभी क्षेत्रों में नवीनतम खोजों, विचारों और सीमाओं के बारे में जागरूकता विकसित करना, ताकि यह समझा जा सके कि विज्ञान निरन्तर विकसित हो रहा है और बहुत-से सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं।2
- प्रत्येक पाठ्यचर्या लक्ष्य के लिए आवश्यक दक्षताएँ : NCF-SE प्रत्येक पाठ्यचर्या लक्ष्य को पूरा करने के लिए आवश्यक दक्षताओं को विभिन्न समूहों में विभाजित करता है (तालिका-1 देखें)। ये सभी शिक्षकों को सम्बन्धित पाठ्यचर्या लक्ष्य प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। विज्ञान शिक्षक इनका उपयोग करके विद्यार्थियों की अवधारणात्मक समझ और प्रक्रिया कौशल में प्रगति का ध्यान रख सकते हैं। साथ ही, ये दक्षताएँ सीखने के प्रत्येक चरण में अवधारणात्मक चर्चाओं के दायरे को स्पष्ट करने में सहायक होती हैं।
- प्रत्येक दक्षता के लिए अधिगम प्रतिफल (लर्निंग ऑउटकम) : स्कूली विज्ञान के शैक्षिक स्तरों के तहत प्रत्येक दक्षता को विशिष्ट छोटे-छोटे पड़ावों में विभाजित किया जा सकता है (तालिका-2 देखें)।
इन चरणों का उपयोग करके हर कक्षा स्तर के अधिगम प्रतिफल की प्रगति को समझा और निर्धारित किया जा सकता है (तालिका-3 देखें)।
| पाठ्यचर्या लक्ष्य (CG) | वांछित दक्षताएँ |
|---|---|
| CG-2 : वैज्ञानिक और गणितीय दृष्टिकोण से भौतिक दुनिया की पड़ताल करना। | C-2.1 : एक-आयामी गति (समान, असमान, क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर गतियों) का विवरण भौतिक मापन (स्थिति, गति और गति में परिवर्तन) के माध्यम से दे सकें और इसे गणितीय व आरेख के रूप में प्रस्तुत कर सकें। |
| C-2.2 : सरल विद्युत परिपथों के विभिन्न घटकों के साथ जोड़-तोड़ करके बिजली कैसे काम करती है को समझा सकें और विद्युत के ऊष्मीय व चुम्बकीय प्रभावों का प्रदर्शन कर सकें। | |
| C-2.3 : चुम्बक (प्राकृतिक और कृत्रिम; पृथ्वी एक चुम्बक के रूप में) के गुणों का वर्णन कर सकें। | |
| C-2.4 : विभिन्न प्रकार के प्रकाश स्रोतों (प्राकृतिक, कृत्रिम और परावर्तक सतहों) से निकलने वाले प्रकाश के सरल रेखा में गमन को प्रदर्शित कर सकें, प्रकाश स्रोतों और वस्तुओं के साथ हेर-फेर करके और उपकरणों और कलाकृतियों (जैसे समतल और गोलीय दर्पण, पिनहोल कैमरा, कैलेडोस्कोप और पेरिस्कोप) का उपयोग करके परावर्तन के नियमों को सत्यापित कर सकें। | |
| C-2.5 : साधारण टेलीस्कोप और चित्रों/ फोटोग्राफ़्स की मदद से रात के आकाश में खगोलीय पिण्डों (तारे, ग्रह, प्राकृतिक और कृत्रिम उपग्रह, तारामण्डल और धूमकेतु) का अवलोकन और पहचान कर सकें और दिशा पता करने, कैलेंडर बनाने व अन्य घटनाओं (जैसे चन्द्रमा की कलाएँ, ग्रहण और पृथ्वी पर जीवन) में इनकी भूमिका को समझा सकें। |
| वांछित दक्षता | उपलब्धि के अन्तरिम संकेतक |
|---|---|
| C-2.1 : एक-आयामी गति (समान,असमान, क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर गतियों) का विवरण भौतिक मापन (स्थिति, गति और गति में परिवर्तन) के माध्यम से दे सकें और इसे गणितीय व आरेख के रूप में प्रस्तुत कर सकें। | गति का वर्णन करने के लिए (सन्दर्भ बिन्दु के सापेक्ष स्थिति और समय जैसी) आवश्यक भौतिक राशियों की पहचान कर सकें और उन्हें माप सकें। |
| इन राशियों को मापने के लिए उपयुक्त उपकरणों और मानक इकाइयों का उपयोग कर सकें (उदाहरण के लिए, किसी गतिशील वस्तु की स्थिति और समय में परिवर्तन मापना और इसका उपयोग गति की गणना के लिए करना)। | |
| इन मात्राओं को मापने के लिए उपयोग में लाई गई विभिन्न इकाइयों की विकास यात्रा को समझें (उदाहरण के लिए, स्थानीय स्तर पर प्रचलित इकाइयों का अध्ययन करें और वर्तमान में उपयोग होने वाली SI इकाइयों तक आगे बढ़ें)। | |
| आँकड़े एकत्र करें और उन्हें विभिन्न तरह से प्रदर्शित करें (जैसे स्थिति-समय के आँकड़े एकत्रित कर उसे चित्रात्मक या तालिका के रूप में प्रस्तुत करें)। | |
| आँकड़ों का विश्लेषण करके निष्कर्ष निकालें, (उदाहरण के लिए, इसका उपयोग यह अनुमान लगाने के लिए करें कि कोई वस्तु स्थिर है या नहीं, वह कितनी तेज़ गति से चल रही है, क्या उसकी चाल स्थिर है और क्या वह समान, असमान गति या बदलती गति प्रदर्शित कर रही है आदि)। | |
| वस्तु की गति की गणना, व्याख्या और उसका पूर्वानुमान लगाने के लिए गणितीय सूत्रों का उपयोग करें। | |
| सम्बन्धित अवधारणाओं का उपयोग करके ऐसे उपकरणों के मॉडल (जैसे रेत घड़ी या सेकंड्स पेंडुलम) तैयार करें जो समय की एक निश्चित अवधि या लम्बाई का निर्धारण कर सकें। |
| कक्षा | कक्षा-विशिष्ट अधिगम प्रतिफल |
|---|---|
| VI | किसी वस्तु की स्थिति को सन्दर्भ के सापेक्ष पहचानें और उसकी स्थिति में होने वाले परिवर्तनों को दर्ज करें; विद्यार्थी अपने परिवेश में पारम्परिक रूप से दूरी को मापने के तरीक़ों और इन मापन के आधार को जानें; दूरी मापने के लिए मानक उपकरणों और इकाइयों का उपयोग करना सीखें; लम्बाई मापने के लिए विभिन्न उपकरणों के मॉडल बनाएँ और उनका उपयोग करें; और दूरी सम्बन्धी चर्चा को गति को समझने के लिए आवश्यक अन्य राशियों तक विस्तार दें। |
| VII | समय मापना; समय मापने के लिए उपकरणों और इकाइयों का उपयोग और निर्माण करना; गतिमान विभिन्न वस्तुओं के स्थिति-समय डेटा को एकत्रित करना और उसे ग्राफ के रूप में प्रस्तुत करना; (औसत) गति की गणना करना और उसका गणितीय सूत्र निकालना। |
| VIII | समय अन्तरालों को कम करके अनुमान लगाएँ कि वस्तु की गति समान है या असमान; गणितीय विधि से वस्तु की स्थिति का अनुमान लगाएँ; और इस ज्ञान का विभिन्न सन्दर्भों में सही तरीक़े से उपयोग करें। |
अधिगम प्रतिफल और कक्षा शिक्षण
किसी कक्षा स्तर के अधिगम प्रतिफल को प्राप्त करना केवल तथ्यात्मक ज्ञान की पुनरावृत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उन प्रक्रिया कौशलों का विकास भी शामिल है जो किसी विशेष दक्षता को प्राप्त करने के लिए आवश्यक हैं। इस नज़रिए से, ये अधिगम प्रतिफल विज्ञान शिक्षकों द्वारा कक्षा शिक्षण में विभिन्न तरीक़ों से मार्गदर्शन कर सकते हैं।
- ये अधिगम प्रतिफल विज्ञान शिक्षकों को माध्यमिक स्कूल के प्रत्येक वर्ष के लिए कक्षा शिक्षण का प्राथमिक उद्देश्य और चर्चा के दायरों का चयन करने में मदद करते हैं। इन प्रतिफलों को सावधानीपूर्वक निर्धारित किया गया है ताकि वे शिक्षकों को इन्हें प्राप्त करने के लिए प्रभावी शिक्षण विधियाँ अपनाने में सहायक हों। उदाहरण के लिए, यदि यह अपेक्षित है कि विद्यार्थी किसी वस्तु की स्थिति में होने वाले परिवर्तन को माप सकें, तो यह ख़ास शिक्षण पद्धति की ओर इशारा करता है कि इसमें विद्यार्थियों को इस प्रकार के मापन को ख़ुद करने का व्यावहारिक अनुभव शामिल होना चाहिए। शिक्षक इस प्रतिफल को प्राप्त करने के लिए विभिन्न सन्दर्भ-आधारित शैक्षणिक अभ्यासों में से चुन सकते हैं। उदाहरण के लिए, वे विद्यार्थियों से स्कूल के मैदान में दौड़ने के ट्रैक की लम्बाई मापने, फर्श पर लुढ़कने वाले कंचे द्वारा तय की गई दूरी मापने या यह गिनने को कह सकते हैं कि स्कूल से घर तक जाने के लिए कितने क़दम लगते हैं। इसी तरह, समय मापने की दक्षता विकसित करने के लिए, शिक्षक विद्यार्थियों को यह मापने का कार्य दे सकते हैं कि घर से स्कूल तक पैदल आने में कितना समय लगता है।
- अधिगम प्रतिफल शिक्षकों को ऐसे आकलन डिज़ाइन करने में मदद कर सकते हैं, जिनसे यह पता लगाया जा सके कि विद्यार्थियों ने कौन-कौन-से ज्ञान और कौशल सीखे हैं। उदाहरण के तौर पर, शिक्षक विद्यार्थियों को स्कूल भवन की ऊँचाई मापने का कोई तरीक़ा सोचने के लिए कह सकते हैं। इस क्रियाकलाप के जवाब के माध्यम से यह आकलन किया जा सकता है कि क्या विद्यार्थी कक्षा में दूरी मापने की अवधारणा को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में लागू कर पा रहे हैं। शिक्षक ऐसे आकलन भी तैयार कर सकते हैं जो विद्यार्थियों के एक से अधिक अधिगम परिणाम हासिल करने के बारे में जानकारी प्रदान करें (देखें बॉक्स-1)। अधिगम प्रतिफलों के आकलन को कक्षा-दर-कक्षा आगे बढ़ाते हुए माध्यमिक स्तर के अन्त तक विस्तारित करने से यह समझने में मदद मिल सकती है कि किसी विशेष दक्षता को हासिल किया गया है या नहीं। इसी प्रकार, तरह-तरह की दक्षताओं को हासिल करने की जानकारी यह संकेत देगी कि पाठ्यचर्या का कोई विशेष लक्ष्य पूरा हुआ है या नहीं।
- कक्षा शिक्षण में शैक्षिक स्तरों के ढाँचे को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए, शिक्षकों को माध्यमिक स्कूल के पाठ्यचर्या के प्रत्येक विषय (उदाहरण के लिए ‘गति’) की समग्र समझ होनी चाहिए। साथ ही, यह जानना आवश्यक है कि इस स्तर के अन्त तक विद्यार्थियों को कौन-कौन-सी दक्षताएँ विकसित करनी हैं और अलग-अलग स्तरों में इन प्रतिफलों को हासिल करने के लिए कैसे आगे बढ़ना चाहिए। उदाहरण के लिए, माध्यमिक स्तर पर वस्तु की गति में बदलाव के आँकड़े एकत्र करना और उनका उपयोग करना सीखने से, अगले स्तर पर इन आँकड़ों को ग्राफ़ रूप में प्रस्तुत करने की दक्षता विकसित करने में मदद मिलेगी।
बॉक्स-1 : गति से सम्बन्धित विभिन्न अधिगम प्रतिफलों की प्राप्ति को मापने के लिए आकलन का उदाहरण
विद्यार्थियों को यह आकलन कार्य देने पर विचार करें : “आपके परिवार में कौन सबसे तेज़ चलता है? अपने उत्तर को उपयुक्त तर्क से प्रमाणित करें।” इस पर काम कर रहे विद्यार्थियों से अपेक्षा है कि वे परिवार के विभिन्न सदस्यों के स्थिति-समय के आँकड़े दर्ज करें और सम्बन्धित गणितीय सूत्र का उपयोग करके उनकी चाल की गणना करें। यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे इस कार्य को करने के लिए एक योजना तैयार करेंगे। हालाँकि ये दोनों कार्य सरल लग सकते हैं, लेकिन विद्यार्थियों को इन्हें पूरा करने के लिए सम्बन्धित अवधारणाओं का सटीक ज्ञान और प्रक्रिया सम्बन्धी कौशल दोनों का प्रदर्शन करना होगा। उदाहरण के लिए, उन्हें यह निर्धारित करना होगा कि परिवार के प्रत्येक सदस्य को एक निश्चित दूरी तय करने में कितना समय लगता है। शिक्षक निम्नलिखित पहलुओं का आकलन कर सकते हैं :
- विद्यार्थी इस अभ्यास के लिए उपयुक्त दूरी का निर्धारण कैसे करते हैं?
- वे निर्धारित दूरी को कैसे चिह्नित करते हैं (जिसमें उपकरणों का सही तरीक़े से उपयोग शामिल होगा)?
- वे मापी जाने वाली राशियों और परीक्षणों की संख्या तय करने के बाद अपने अवलोकनों को दर्ज करने के लिए एक प्रारूप पर कैसे पहुँचते हैं?
- वे परिवार के सदस्यों की चाल की तुलना कैसे करते हैं, ताकि यह पता चल सके कि कौन सबसे तेज़ चलता है?
- क्या वे अपने निष्कर्ष को स्पष्ट और समझने योग्य तरीक़े से प्रस्तुत करते हैं?
इसके बाद, इसे और बढ़ाया जा सकता है, जिसमें विद्यार्थियों से यह पूछा जा सकता है कि क्या उनके परिवार के सदस्य ने इस कार्य के दौरान एकरूप गति या बदलती गति दिखाई। इसके लिए, विद्यार्थियों को अपने द्वारा चिह्नित मार्ग पर स्थान-समय मापन के आँकड़ों की आवश्यकता होगी।
चलते-चलते
NCF-SE विज्ञान शिक्षकों को शिक्षा के मुख्य उद्देश्यों को हासिल करने के लिए कक्षा प्रक्रियाओं को डिज़ाइन करने और उन्हें संचालित करने के लिए एक ढाँचाबद्ध दृष्टिकोण प्रदान करता है। यहाँ हमने साझा किया है कि इस ढाँचे को ‘एक आयामी गति’ जैसे विषय पर कैसे लागू किया जा सकता है, जिससे विद्यार्थी केवल प्रमुख अवधारणाओं को समझने तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें लागू करने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल भी विकसित कर सकें। यह ढाँचा विज्ञान की किसी भी अन्य विषयवस्तु को पढ़ाने के लिए समान रूप से उपयोगी हो सकता है। यह न केवल माध्यमिक स्तर पर विज्ञान के लिए स्पष्ट रूप से परिभाषित पाठ्यचर्या लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है, बल्कि यह विभिन्न कक्षाओं में पाठ्य सामग्री को तार्किक क्रम में व्यवस्थित करने, दक्षताओं को समाहित करने, उनके वास्तविक जीवन में उपयोग पर बल देने और शिक्षण विधियों व आकलन को समग्र शैक्षिक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए दिशा-निर्देश भी प्रदान करता है। शिक्षा के व्यापक उद्देश्यों और माध्यमिक स्कूल की विज्ञान पाठ्यचर्या के प्रत्येक विषय के विशिष्ट अधिगम प्रतिफलों के बीच सम्बन्ध स्थापित करते हुए, NCF-SE इस बात पर भी ज़ोर देता है कि उद्देश्यों और प्रतिफलों को एक निरन्तर और समकालिक दृष्टिकोण से देखना क्यों आवश्यक है।
मुख्य बिन्दु
- NCF-SE शिक्षकों के लिए ऐसा ढाँचा प्रस्तुत करता है, जो जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल और प्रबन्धनीय अधिगम लक्ष्यों में बाँटने में सहायक है। यह ढाँचा प्रत्येक चरण को व्यापक शैक्षिक उद्देश्यों से जोड़ने पर ज़ोर देता है, जिससे शिक्षक कक्षा में एक ऐसा माहौल बना सकते हैं जो गहरी समझ और निरन्तर सीखने को बढ़ावा दे।
- ‘एक आयामी गति’ के उदाहरण के माध्यम से, यह लेख दर्शाता है कि शिक्षक विद्यार्थियों को प्रारम्भिक मापन के कौशल से लेकर आँकड़ों के विश्लेषण जैसी उन्नत दक्षताओं तक कैसे ले जा सकते हैं। यह व्यवस्थित चरण-दर-चरण व्यवस्था विद्यार्थियों को जटिल विषयों को समझने में मदद करती है, जहाँ प्रत्येक शैक्षिक स्तर को विशेष शैक्षिक लक्ष्यों के साथ जोड़ा जाता है।
- शिक्षकों को ऐसे आकलन तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाता है जो केवल तथ्य याद करने से आगे बढ़कर योजना निर्माण और आँकड़ों का विश्लेषण जैसी प्रक्रियात्मक दक्षताओं का आकलन करें। इन आकलनों को इस तरह से डिज़ाइन करना चाहिए कि वे विद्यार्थियों के कक्षा-विशिष्ट अधिगम प्रतिफलों को सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनके अवधारणात्मक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल को भी परख सकें।
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सन्दर्भ
- Ministry of Human Resource Development. ‘National Education Policy 2020’. Government of India. URL: https://www.education.gov.in/sites/upload_files/mhrd/ files/NEP_Final_English_0.pdf.
- National Steering Committee for National Curriculum Frameworks. ‘National Curriculum Framework for School Education 2023’. National Council of Educational Research and Training. URL: https://ncert.nic.in/pdf/NCFSE-2023-August_2023.pdf.