धातु और अधातु : एक शिक्षण योजना

विज्ञान के मिडिल स्टेज की पाठ्यचर्या से विद्यार्थियों में विकसित की जाने वाली अपेक्षित दक्षताओं में से एक रोज़मर्रा की वस्तुओं के दिखाई देने वाले गुणों के आधार पर उन्हें धातु या अधातु के रूप में वर्गीकृत कर पाना है (बॉक्स-1 देखें)।1,2 इस दक्षता में मदद करने वाली अवधारणाएँ प्रिपरेटरी स्टेज के पर्यावरण अध्ययन (EVS) और मिडिल स्टेज की विज्ञान की अलग-अलग कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों में धीरे-धीरे सिखाई जाती हैं।3-7 मुझे तीन सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालयों के कक्षा-9 के 56 विद्यार्थियों के साथ इस विषय पर काम करने का मौक़ा मिला। जब विद्यार्थियों से पूछा गया कि वे धातुओं के बारे में क्या जानते हैं, तो ज़्यादातर विद्यार्थी कुछ सामान्य गुण बता पाए। जैसे धातुओं का कठोर होना, चमकदार होना, पीटने पर चादर बनना (आघातवर्धनीयता), तार बनना (तन्यता) और ऊष्मा एवं बिजली की सुचालक होना। कुछ विद्यार्थियों ने सोना और चाँदी जैसे उदाहरण भी दिए। मैंने उनकी समझ को और अधिक गहराई से परखने के लिए, कक्षा में रोज़मर्रा काम में आने वाली 15 अलग-अलग वस्तुओं को रखा और विद्यार्थियों से कहा कि वे दिखाई देने वाले गुणों के आधार पर इन वस्तुओं को तीन वर्गों में बाँटें − धातु, अधातु, या ‘न धातु, न अधातु’ (गतिविधि शीट देखें)। काम पूरा होने के बाद, विद्यार्थियों से अपने उत्तरों का कारण बताने को कहा गया। इन चर्चाओं से यह साफ़ हुआ कि धातुओं और अधातुओं को लेकर उनकी समझ में कई कमियाँ हैं।8 मैं इस लेख में, ऐसी ही कमियों को दूर करने के लिए बनाई गई एक शिक्षण योजना की मुख्य बातें बता रही हूँ।
बॉक्स-1 : पाठ्यचर्या से सम्बन्ध
धातुओं और अधातुओं के रूप में पदार्थों के वर्गीकरण पर होने वाली चर्चाएँ और गतिविधियाँ शिक्षकों को नीचे दिए गए लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकती हैं :
- मिडिल स्टेज विज्ञान पाठ्यचर्या के लक्ष्य :
- CG-1 : [विद्यार्थी] पदार्थ की दुनिया व उसके अवयवों, गुणों और व्यवहार की खोज-पड़ताल करता है। विशेष रूप से, यह विद्यार्थियों में निम्नलिखित दक्षता (C-1.1) विकसित करने में सहायक हो सकता है “दिखाई देने वाले भौतिक गुणों (जैसे ठोस, द्रव, गैस…, पारभासी…, सुचालक, कुचालक) और रासायनिक गुणों (जैसे शुद्ध, अशुद्ध; अम्ल, क्षार; धातु, अधातु; तत्त्व, यौगिक) के आधार पर पदार्थों का वर्गीकरण करना।’’
- CG-6 : [विद्यार्थी] वैज्ञानिक ज्ञान के विकास के अध्ययन में शामिल होकर और वैज्ञानिक जाँच करते हुए विज्ञान की प्रकृति और उसकी प्रक्रियाओं को समझता है। विशेष रूप से, यह विद्यार्थियों में निम्नलिखित दक्षता (C-6.2) विकसित करने में सहायता कर सकता है “वैज्ञानिक शब्दावली का उपयोग करके प्रश्न तैयार करना… और प्रमाण के रूप में डेटा एकत्र करना (प्राकृतिक वातावरण के अवलोकन, सरल प्रयोगों की रूपरेखा बनाने या सरल वैज्ञानिक उपकरणों के उपयोग के माध्यम से)।”1
- मिडिल स्टेज के विद्यार्थियों के लिए अधिगम के प्रतिफल :
- आमतौर पर जानी-पहचानी वस्तुओं में उनकी मोड़े जाने की क्षमता, पीटकर चादर में बदले जाने की क्षमता, उनको खींचकर तार में बदले जाने की क्षमता व उनकी गूँजने की आवाज़ निकालने की क्षमता और उनकी बिजली और ऊष्मा के चालक होने की क्षमता के आधार पर अन्तर करना।
- आमतौर पर जानी-पहचानी वस्तुओं को धातुओं और अधातुओं में वर्गीकृत करना ताकि उनके भौतिक गुणों को आसानी से समझाया जा सके।2
धातुओं और अधातुओं के गुण क्या हैं?
मिडिल स्टेज विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में विद्यार्थियों को धातुओं के नौ गुणों से परिचय कराया जाता है (तालिका-I देखें)।4,6,7 ज़्यादातर विद्यार्थी इनमें से छह गुणों के बारे में जानते थे। किसी भी विद्यार्थी ने ध्वानिकता (गूँजने का गुण), हवा और पानी के सम्पर्क में आने पर ज़ंग लगना (क्षरण, संक्षारण या क्षय), या क्षारीय ऑक्साइड बनने जैसे गुणों का उल्लेख नहीं किया। हालाँकि जिन छह गुणों को विद्यार्थी जानते थे, वे उनकी पाठ्यपुस्तक से याद की गई परिभाषाएँ बता सकते थे, लेकिन उनका सही उपयोग करने में उन्हें कठिनाई होती थी। उदाहरण के लिए, कई विद्यार्थियों ने संगमरमर को धातु मान लिया क्योंकि वह चमकदार दिखता है और आघातवर्धनीय (जिसे पीटकर चादर बनाई जा सके) लगता है − उन्होंने पॉलिश किए हुए, चादरनुमा संगमरमर के फ़र्श के टाइल्स देखे थे।8 पाठ्यपुस्तकों में स्पष्ट उल्लेख होने के बाद भी यह ग़लतफ़हमी बनी रही।
- कक्षा-6 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, पुनर्मुद्रण 2025–2026) के अध्याय-6 (‘हमारे आस-पास की सामग्री’) में लिखा है : “क्या सभी चमकदार वस्तुएँ धातु होती हैं?एक पुरानी कहावत है, ‘हर चमकती हुई वस्तु सोना नहीं होती।’ सभी चमकदार सामग्रियाँ धातु नहीं होती हैं। कुछ सामग्रियों की सतहों को पॉलिश करके चमकदार बनाया जाता है जबकि कुछ अन्य को प्लास्टिक, मोम या किसी अन्य पदार्थ की पतली परतों से लेपित किया जाता है जिससे वे चमकदार दिखती हैं। ये सामग्रियाँ धातु नहीं भी हो सकती हैं।”4 मैंने समझाया कि संगमरमर धातुओं की तरह प्राकृतिक रूप से चमकदार नहीं होता, बल्कि उसे पॉलिश करके चमकदार बनाया जा सकता है।
- कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-4 में लिखा है : “क्या आप धातुओं से बनी चादरों के कुछ उदाहरण दे सकते हैं? आपने कुछ मिठाइयों पर चाँदी का वर्क और खाद्य वस्तुओं को लपेटने हेतु प्रयुक्त एल्युमिनियम पत्रक को देखा होगा। ये इन धातुओं में विद्यमान गुण आघातवर्धनीयता के कारण बनाए जाते हैं। सोना और चाँदी सबसे अधिक आघातवर्धनीय धातुएँ होती हैं। कोयले अथवा सल्फर के टुकड़े ऐसा व्यवहार नहीं दर्शाते हैं। वे छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं और भंगुर कहलाते हैं। इसके विपरीत लकड़ी न तो चपटी चादर में परिवर्तित होती है और न ही टुकड़ों में टूटती है। अत: लकड़ी न तो आघातवर्धनीय है न ही भंगुर है।”6 इस अध्याय में यह भी सुझाव दिया गया है कि शिक्षक विद्यार्थियों को धातुओं और अधातुओं के कुछ नमूनों को हथौड़े से पीटकर ये फ़र्क़ ख़ुद देखने का मौक़ा दें। पूछने पर पता चला कि किसी भी विद्यार्थी ने कभी संगमरमर को हथौड़े से पीटे जाते हुए नहीं देखा था।
| क्रम संख्या | धातु का गुण | पाठ्यपुस्तक में दी गई परिभाषा | पाठ्यपुस्तक का अध्याय |
|---|---|---|---|
| 1 | चमकदार | “जिन सामग्रियों की सतह प्राय: चमकदार होती है उनका स्वरूप द्युतिमय (चमकदार) होता है। चमक वाली ऐसी सामग्रियाँ सामान्यत: धातु होती हैं।” | कक्षा-6 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, पुनर्मुद्रण 2025–2026) का अध्याय-6 (‘हमारे आस-पास की सामग्री’) |
| 2 | कठोर | “जिन सामग्रियों को आसानी से दबाया या खरोंचा जा सकता है, वे नरम होती हैं जबकि अन्य सामग्रियाँ जिन्हें दबाना या खरोंचना कठिन होता है वे कठोर होती हैं।” | कक्षा-6 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, पुनर्मुद्रण 2025–2026) का अध्याय-6 (‘हमारे आस-पास की सामग्री’) |
| 3 | ध्वानिकता / गूँजने वाला (Sonorous) | “धातुओं का यह गुण जिसके कारण वे निनाद ध्वनि उत्पन्न करती हैं, ध्वानिकता कहलाता है और धातुओं को ध्वानिक प्रकृति का कहा जाता है।” | कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) का अध्याय-4 (‘धातुओं और अधातुओं का संसार’) |
| 4 | आघातवर्धनीय | “सामग्रियों का वह गुण, जिसके कारण उन्हें पीटकर पतली चादरों में परिवर्तित किया जा सकता है, आघातवर्धनीयता कहलाता है। अधिकांश धातुओं में यह गुण होता है।” | कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) का अध्याय-4 (‘धातुओं और अधातुओं का संसार’) |
| 5 | तन्यता | “सामग्रियों का वह गुण, जिसके द्वारा उन्हें तार में खींचा जा सकता है, तन्यता कहलाता है। तन्यता का यह गुण मुख्य रूप से धातुओं में ही पाया जाता है।” | कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) का अध्याय-4 (‘धातुओं और अधातुओं का संसार’) |
| 6 | ऊष्मा का चालक | “ऐसे पदार्थ जो ऊष्मा को अपने में से सरलता से संचरित होने देते हैं, वे ऊष्मा के चालक कहलाते हैं।” | कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) का अध्याय-7 (‘प्रकृति में ऊष्मा का स्थानान्तरण’) |
| 7 | विद्युत का चालक | “वे सामग्रियाँ जो सरलता से विद्युत प्रवाहित करती हैं, उन्हें विद्युत का चालक कहा जाता है।” | कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) का अध्याय-4 (‘धातुओं और अधातुओं का संसार’) |
| 8 | हवा और पानी के सम्पर्क में आने पर ज़ंग लगना | “जल, वायु या अन्य पदार्थों के कारण धातुओं की सतह का धीरे-धीरे ह्रास होना संक्षारण (ज़ंग लगना) कहलाता है।” | कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) का अध्याय-4 (‘धातुओं और अधातुओं का संसार’) |
| 9 | क्षारीय ऑक्साइड बनाना | “प्राय: धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं।” | कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) का अध्याय-4 (‘धातुओं और अधातुओं का संसार’) |
चर्चा से यह बात सामने आई कि विद्यार्थियों को धातुओं और अधातुओं के गुणों से याद करने वाली परिभाषाओं के रूप में परिचित कराया गया था, न कि अवलोकन और गतिविधियों के ज़रिए खोज-पड़ताल किए जाने योग्य विचारों के रूप में। यह बात आश्चर्य पैदा करने वाली थी, क्योंकि इस विषय पर पाठ्यपुस्तकों में कई उदाहरण और गतिविधियाँ दी गई हैं जिनसे विद्यार्थियों को इन गुणों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है (तालिका-2 देखें)।3-7 हालाँकि कुछ विद्यार्थियों को यह याद था कि कक्षा में इन गतिविधियों को पढ़कर सुनाया गया था, लेकिन किसी ने भी इन्हें वास्तव में किया नहीं था। इसके समाधान के लिए, हमने कक्षा-6 की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, पुनर्मुद्रण 2025–2026) के अध्याय-6 और कक्षा-7 की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-4 में दी गई गतिविधियों को कक्षा में किया।4,6 उदाहरण के लिए, मैं कक्षा में कुछ इस प्रकार के नमूने लेकर आई : लोहे की कीलें, कोयले के टुकड़े, ईंटें, संगमरमर के टुकड़े, सख़्त प्लास्टिक के टुकड़े, मोटे ताँबे के तार, नक़ली रत्न, ग्रेफ़ाइट की छड़ें, एल्युमिनियम के मोटे तार, सिक्के आदि। विद्यार्थियों ने अवलोकन किया और लिखा कि क्या हुआ जब हर नमूने पर हथौड़ा मारा गया — क्या वह चपटा होकर चादर बन गया या टूटकर टुकड़ों में बिखर गया? इस अभ्यास के अन्त में, मैंने उनके अवलोकन बोर्ड पर लिखे और उन्हीं के आधार पर आघातवर्धनीयता पर चर्चा की। जब पूछा गया कि कौन-से पदार्थ आघातवर्धनीय हैं, तो किसी भी विद्यार्थी ने संगमरमर का नाम नहीं लिया। कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि हथौड़ा मारने पर वह टूट गया था। मैंने पुष्टि की कि संगमरमर आघातवर्धनीय नहीं होता और यह भी स्पष्ट किया कि जो चादरनुमा संगमरमर की टाइलें उन्होंने देखी थीं, वे काटकर और पॉलिश करके बनाई जाती हैं, हथौड़े से पीटकर नहीं।
| गुण | गतिविधि के लिए सुझाव | पाठ्यपुस्तक का अध्याय |
|---|---|---|
| कठोरता | “जब आप विभिन्न वस्तुओं को अपने हाथों से दबाते हैं, तो पत्थर जैसी कुछ सामग्रियों को दबाना कठिन हो सकता है जबकि कुछ अन्य सामग्रियों जैसे रबर आसानी से दबाया जा सकता है। एक धातु की चाबी लें और उससे लकड़ी, एल्युमिनियम, पत्थर, कील, मोमबत्ती, चॉक और किसी भी अन्य सामग्री से बनी सामग्री की सतह को खरोंचने का प्रयास करें। क्या कुछ सामग्रियाँ दूसरों की तुलना में अधिक आसानी से खरोंची जा सकती हैं?” | कक्षा-6 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, पुनर्मुद्रण 2025-2026) का अध्याय-6 (‘हमारे आस-पास की सामग्री’) |
| ध्वानिकता (Sonority) | “धातु की एक चम्मच और तरह-तरह के पदार्थों, जैसे लकड़ी, धातु, प्लास्टिक, कपड़ा और काँच से बनी कोई पाँच वस्तुएँ लीजिए और प्रत्येक पर धीरे-से चम्मच मारिए। चम्मच से मारने पर पैदा हुई ध्वनियों को ध्यान से सुनिए और इन सभी ध्वनियों को अपने शब्द दीजिए। इन ध्वनियों को शब्दों के माध्यम से बोलकर बनाइए जैसे टिंग-टिंग, धम-धम, डब-डब आदि।” | कक्षा-3 की EVS की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) का अध्याय-10 (‘वस्तुओं की दुनिया’) |
| “कुछ वस्तुएँ लीजिए, जैसे धातु का चम्मच, एक सिक्का, कोयले का एक टुकड़ा और लकड़ी का एक टुकड़ा। (क) इन्हें एक निश्चित ऊँचाई से एक-एक करके नीचे गिराइए। (ख) क्या आपने इन वस्तुओं के गिरने से उत्पन्न होने वाली ध्वनियों में किसी प्रकार के अन्तर का अनुभव किया?” | कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) का अध्याय-4 (‘धातुओं और अधातुओं का संसार’) | |
| आघातवर्धनीयता | “कुछ सामग्री एकत्रित कीजिए, जैसे ताँबे और एल्युमिनियम के कुछ अनुपयोगी टुकड़े, लोहे की एक कील, कोयले का एक टुकड़ा, मटर के दाने के आकार का सल्फर का एक टुकड़ा और लकड़ी का एक टुकड़ा। अब इनमें से प्रत्येक वस्तु को एक-एक करके किसी कठोर सतह पर रखिए और हथौड़े से पीटिए। आपको क्या लगता है कि क्या होगा? क्या वस्तुएँ कुछ चपटी हो जाएँगी अथवा टुकड़ों में टूट जाएँगी?” | कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) का अध्याय-4 (‘धातुओं और अधातुओं का संसार’) |
| ऊष्मा का चालन | “एक काँच का गिलास मेज़ पर रखिए। इसे गर्म जल से भरिए। लगभग समान आकार और मोटाई का एक धातु का चम्मच और एक लकड़ी का चम्मच लीजिए। दोनों चम्मचों को एक साथ गर्म जल में डाल दीजिए और कुछ समय के लिए उन्हें स्थिर छोड़ दीजिए। और कुछ मिनट तक वैसे ही रहने दें। अब सावधानी से दोनों चम्मचों के ऊपरी भाग को स्पर्श कीजिए। कौन-सा चम्मच अधिक गर्म हुआ? यह प्रयोग हमें दोनों चम्मचों में ऊष्मा चालन के विषय में क्या बताता है?” | कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) का अध्याय-4 (‘धातुओं और अधातुओं का संसार’) |
| “एक 15 सेमी लम्बी एल्युमिनियम अथवा या लोहे की पट्टी लीजिए। चार पिनों को मोम की सहायता से इस पट्टी पर लगभग 2 सेमी की समान दूरी पर चिपका दीजिए। पिनों को 1, 2, 3 और 4 नाम दें।… (यदि स्टैंड उपलब्ध न हो तो पट्टी के एक छोर को दो ईंटों के मध्य में रखिए)। पट्टी के अन्तिम छोर को मोमबत्ती अथवा स्पिरिट लैम्प से गर्म कीजिए। पिनों का क्या होगा? क्या वे पट्टी से जुड़ी रहेंगी या नीचे गिर जाएँगी? पिनों के गिरने के क्रम का अनुमान लगाइए।… क्या आपको लगता है कि धातु की पट्टी में ऊष्मा का स्थानान्तरण उस सिरे से हो रहा है जहाँ से धातु की पट्टी को गर्म किया जा रहा है?” | कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) का अध्याय-7 (‘प्रकृति में ऊष्मा का स्थानान्तरण’) | |
| विद्युत का चालन | “एक विद्युत सेल और एक लैम्प इस प्रकार जोड़िए कि तारों के दो सिरे मुक्त रहें… तारों के दोनों मुक्त सिरों को क्षण भर के लिए परस्पर स्पर्श कराइए। क्या लैम्प दीप्तिमान होता है? यदि हाँ, तो हमारा परीक्षण-यंत्र उपयोग के लिए तैयार है। हम इस परीक्षण-यंत्र का उपयोग उन पदार्थों को पहचानने के लिए कर सकते हैं जिनमें से होकर विद्युत-धारा प्रवाहित हो सकती है। विभिन्न पदार्थों की बनी वस्तुएँ एकत्रित कीजिए, जैसे धातु की चम्मचें, सिक्के, कॉर्क, रबर, काँच, चाबियाँ, पिन, प्लास्टिक का मापक, लकड़ी का टुकड़ा, एल्युमिनियम पर्णिका, मोमबत्ती, सिलाई की सुई, गत्ता, काग़ज़ तथा पेंसिल की लेड। अपने परीक्षण-यंत्र के मुक्त तारों के दोनों सिरों को आपके द्वारा एकत्रित की गई प्रत्येक वस्तु के दो सिरों से स्पर्श कराइए। यह सुनिश्चित कीजिए कि तार परस्पर सम्पर्क में न आएँ। क्या लैम्प प्रत्येक प्रकरण में दीप्तिमान होता है?” | कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) का अध्याय-3 (‘विद्युत परिपथ एवं उनके घटक’) |
| हवा और पानी के सम्पर्क में आने पर ज़ंग लगना (क्षरण) | “कुछ चमकदार लोहे की कीलें लीजिए। यदि आप पुरानी लोहे की कीलों का उपयोग कर रहे हैं, तो रेगमाल की सहायता से उनकी सतह पर विकसित भूरे रंग के निक्षेप को रगड़कर हटा दीजिए। (क) स्वच्छ,शुष्क व बन्द ढक्कन वाली काँच की तीन बोतलें अथवा डाट लगी तीन परखनलियाँ लीजिए। उन्हें क, ख और ग नाम दें। (ख) तीन लोहे की कीलें लीजिए और प्रत्येक कील पर एक धागा बाँधिए। (ग) काँच की बोतल ‘क’ में एक लोहे की कील और थोड़ा सिलिका जेल रखिए और ढक्कन अथवा डाट को भली प्रकार बन्द कीजिए। (घ) काँच की बोतल ‘ख’ में एक लोहे की कील रखिए। जल को उबालकर ठण्डा कर लीजिए जिससे जल में विद्यमान घुलनशील गैसें निकल जाएँ। इस जल को बोतल ‘ख’ में इस प्रकार डालिए कि लोहे की कील पूर्णत: जल में डूब जाए। अब जल की सतह के ऊपर थोड़ा तेल डालकर एक परत बनाइए।… काँच की बोतल को कसकर बन्द कीजिए। (ड) काँच की बोतल ‘ग’ में एक लोहे की कील रखिए और उसमें थोड़ा जल डालिए ताकि लोहे की कील आंशिक रूप से डूबी रहे। इस बोतल को खुला रखिए। इससे लोहे की कील जल और वायु दोनों के सम्पर्क में आ जाती है।… (च) सभी काँच की बोतलों को कमरे के तापमान पर रखिए और 8-10 दिनों तक परिवर्तनों का अवलोकन कीजिए।” | कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) का अध्याय-4 (‘धातुओं और अधातुओं का संसार’) |
| ऑक्साइडों का pH | “लगभग 3–4 सेमी लम्बी मैग्नीशियम की रिबन लीजिए। इसे रेगमाल के टुकड़े से रगड़कर साफ़ कीजिए। इसे चिमटे से पकड़िए। दूसरे सिरे को स्पिरिट लैम्प मोमबत्ती का उपयोग करके जलाइए।… मैग्नीशियम के रिबन को जलने दीजिए।… वह श्वेत चूर्ण में परिवर्तित हो जाता है। इस श्वेत चूर्ण में कुछ बूँदें गर्म जल की डालिए। इसे अच्छी तरह से हिलाइए।… पता लगाइए कि मैग्नीशियम ऑक्साइड का विलयन अम्लीय है, क्षारीय है या उदासीन? आप किसी भी अम्ल-क्षार सूचक का उपयोग कर सकते हैं। इस विलयन का नीले और लाल लिटमस पत्रों पर क्या प्रभाव होता है?” | कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) का अध्याय-4 (‘धातुओं और अधातुओं का संसार’) |
क्या सभी पदार्थ धातु या अधातु ही होते हैं?
प्रारम्भिक वर्गीकरण गतिविधि में उपयोग की गई 15 वस्तुओं में से छह (लकड़ी, प्लास्टिक, चॉक, संगमरमर, ईंट और ग्रीन बोर्ड) न तो धातु थीं न ही अधातु। हालाँकि विद्यार्थियों के पास इस श्रेणी को चुनने का विकल्प था, फिर भी बहुत कम विद्यार्थियों ने इसका उपयोग किया (तालिका-3 देखें)।8 चर्चा से यह बात सामने आई कि कई विद्यार्थी यह मानते थे कि हर पदार्थ या तो धातु होता है या अधातु। इसी वजह से, जिन धातुओं के गुणों को वे जानते थे, उन्हीं के आधार पर उन्होंने वस्तुओं का वर्गीकरण किया :
- जिन वस्तुओं में धातुओं के एक या अधिक गुण दिखाई दिए, उन्हें अकसर धातु मान लिया गया। उदाहरण के लिए, आधे से अधिक विद्यार्थियों ने लकड़ी और प्लास्टिक को धातु माना, क्योंकि वे कठोर थे। कुछ विद्यार्थियों ने कहा कि प्लास्टिक चमकदार भी दिख सकता है, जबकि कुछ ने प्लास्टिक की चादरों और इंसुलेटेड तारों का उदाहरण देकर यह तर्क दिया कि प्लास्टिक आघातवर्धनीय और तन्य है।
- जिन वस्तुओं में ये गुण नहीं दिखे, उन्हें आमतौर पर अधातु माना गया। उदाहरण के लिए, चॉक को ज़्यादातर विद्यार्थियों ने अधातु बताया, क्योंकि वह न तो कठोर थी न ही चमकदार। ये दोनों गुण ऐसे थे जिनके बारे में कई विद्यार्थियों का मानना था कि ये सभी धातुओं में होना ज़रूरी हैं।
| वस्तुएँ | विद्यार्थियों की प्रतिक्रियाओं की संख्या (कुल = 56) |
|||
|---|---|---|---|---|
| धातु | अधातु | न धातु, न अधातु | तय नहीं कर पाए | |
| लकड़ी की कुर्सी और मेज़ | 33 | 23 | 0 | 0 |
| कठोर प्लास्टिक का टुकड़ा | 34 | 22 | 0 | 0 |
| चॉक | 0 | 35 | 11 | 10 |
| संगमरमर का टुकड़ा | 41 | 0 | 0 | 15 |
| ईंट | 4 | 22 | 10 | 20 |
| ग्रीन बोर्ड | 2 | 21 | 10 | 23 |
कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-4 में अधातुओं की परिभाषा इस तरह दी गई है : “सल्फर और फॉस्फोरस… जैसे पदार्थ सामान्यत: दिखने में नरम होते हैं और द्युतिहीन होते हैं। वे न तो आघातवर्धनीय होते हैं, न ही तन्य होते हैं और न ही ध्वानिक होते हैं। वे ऊष्मा और विद्युत के भी कुचालक होते हैं। इन्हें अधातु कहा जाता है। इनके ऑक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते हैं। ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, कार्बन इत्यादि कुछ अन्य अधातुएँ हैं।”6 लेकिन इसी अध्याय में यह भी बताया गया है कि “प्लास्टिक, काँच, लकड़ी, रबर और काग़ज़ जैसी सामग्रियों को अधातु समझने का भ्रम नहीं किया जाना चाहिए। इन सामग्रियों को धातु या अधातु के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाता, क्योंकि ये तत्त्व नहीं हैं।”6 इसके बाद पाठ्यपुस्तक में विद्यार्थियों को ‘तत्त्व’ शब्द से परिचित कराया गया है : “वे पदार्थ जिन्हें तत्व कहा जाता है उन्हें धातु और अधातु की श्रेणी में वर्गीकृत किया जाता है। तत्त्व वह पदार्थ है जिसे और अधिक पदार्थों में नहीं तोड़ा जा सकता है। वर्तमान में 118 तत्त्व ज्ञात हैं। ये तत्त्व सभी पदार्थों की मूल निमार्ण इकाई हैं।”6 मैंने इन बातों पर विद्यार्थियों के साथ और विस्तार से चर्चा की। इसके बाद मैंने कक्षा में आवर्त सारणी दिखाई और उसमें केवल उन तत्त्वों को उभारा जिनका उल्लेख प्रिपरेटरी स्टेज की पर्यावरण अध्ययन और मिडिल स्टेज की विज्ञान की पाठ्यचर्या में आता है (चित्र-1 देखें)। धातुओं में मैंने सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, लोहा, कोबाल्ट, निकेल, ताँबा, जस्ता, सोना, चाँदी, पारा और एल्युमिनियम को दिखाया। अधातुओं में मैंने कार्बन (जिसमें कोयला, ग्रेफ़ाइट और हीरा शामिल हैं), हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, सल्फर और आयोडीन को उभारा। इससे यह समझाने का अवसर मिला कि भले ही ज़्यादातर धातुएँ और अधातुएँ पाठ्यपुस्तकों में बताए गए गुण दिखाती हैं, फिर भी कुछ अपवाद होते हैं। मैंने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि :
- अधिकांश विद्यार्थियों (56 में से 43) ने पारे को अधातु माना था, क्योंकि वह कमरे के तापमान पर तरल होता है और उसमें कठोरता, चमक, आघातवर्धनीयता और तन्यता नहीं होती।
- अधिकांश विद्यार्थियों (56 में से 45) ने हीरे को उसकी कठोरता और चमक के कारण धातु माना था।
- अधिकांश विद्यार्थियों (56 में से 43) ने ग्रेफ़ाइट को धातु माना था, क्योंकि वह चमकदार होता है और बिजली का सुचालक है − विद्यार्थियों ने यह कक्षा में दिए गए सरल परिपथ से जाँचा था।8

मैंने यह भी बताया कि –
- सभी तत्त्व धातु या अधातु नहीं होते। कुछ तत्त्व उपधातु होते हैं। उपधातुओं में धातुओं और अधातुओं, दोनों के गुण पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, वे कठोर और ठोस होती हैं, लेकिन भंगुर होती हैं और गूँजने वाली आवाज़ नहीं करतीं।9
- सभी पदार्थ तत्त्व नहीं होते। कुछ यौगिक होते हैं और कुछ मिश्रण। इन दोनों में धातुएँ और/या अधातुएँ शामिल हो सकती हैं। लेकिन “…विभिन्न तत्व एक निश्चित अनुपात में संयोजित होकर पूर्णतया नया पदार्थ बनाते हैं जिसे यौगिक कहते हैं।”9 इसलिए यौगिकों के गुण उनके घटक तत्त्वों से अलग होते हैं। इसके उलट, मिश्रण तब बनते हैं जब “…दो या ज़्यादा पदार्थ मिलाए जाते हैं और हर पदार्थ अपने गुण बनाए रखता है।”9 यहाँ मैंने विद्यार्थियों को सिक्कों और स्टील के चम्मच का ध्यान दिलाया। 56 में से 55 विद्यार्थियों ने इन्हें धातु माना था, क्योंकि इनमें चमक, कठोरता, आघातवर्धनीयता और विद्युत चालकता (जिन्हें उन्होंने परिपथ से जाँचा था) जैसे गुण थे। मैंने बताया कि इन दोनों में धातु जैसे गुण तो होते हैं, लेकिन ये मिश्रधातुएँ हैं। मिश्र धातुओं को ‘धातुओं के मिश्रण’ के रूप में समझाने की बात पहली बार कक्षा-4 की पर्यावरण अध्ययन की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2024) के अध्याय-10 ‘वस्तुओं की दुनिया’ में आती है।3 इस अध्याय में शिक्षक के लिए यह सुझाव दिया गया है : “बच्चों को उनके परिवेश में सामान्य तौर पर पाई जाने वाली धातुएँ, जैसे लोहा, ताँबा, एल्युमिनियम, सोना, चाँदी, थर्मामीटर में मौजूद पारा, या फिर मिश्रित धातुएँ, जैसे स्टील, पीतल और काँसा आदि दिखाइए।”3 इसमें कक्षा के लिए कुछ गतिविधियों के सुझाव भी दिए गए हैं (तालिका-4 देखें)।3 मैंने इसमें जोड़ते हुए विद्यार्थियों को रोज़मर्रा इस्तेमाल होने वाली अलग-अलग कटलरी, औज़ार, दरवाज़ों के हैंडल, पदक, डिब्बे, पाइप और साधारण गहने जैसी मिश्रधातुओं से बनी वस्तुएँ भी दिखाईं।
| क्रम संख्या | गतिविधि के लिए सुझाव |
|---|---|
| 1 | “अपनी कक्षा को जानिए : अपनी कॉपी में कक्षा का चित्र बनाइए। आपने जिन वस्तुओं के चित्र बनाए हैं, उनके नाम कॉपी में लिखिए। दरवाज़े के क़ब्ज़े, कीलें और कुण्डियाँ धातुओं से बने होते हैं।“ |
| 2 | “धातुओं को पहचानिए : धातुओं से बनी अधिक-से-अधिक वस्तुओं तथा उनके भागों के बारे में पता लगाइए। आप अपने आस-पास किन धातुओं को पहचान पाते हैं? यदि आप किसी धातु का नाम नहीं जानते, तो अपने मित्रों या अपने बड़ों से पूछकर पता लगाइए। अपनी कॉपी में इन धातुओं के नाम की एक सूची बनाइए।“ |
| 3 | “आपका चम्मच किससे बना है? क्या यह धातु, लकड़ी या किसी अन्य पदार्थ से बना है? अनुमान लगाइए।“ |
चलते-चलते
पहली गतिविधि के एक महीने बाद, मैंने विद्यार्थियों से वर्गीकरण की वही गतिविधि फिर से करने को कहा। पहली बार, विद्यार्थियों ने चीज़ों का वर्गीकरण मुख्य रूप से दो बातों के आधार पर किया था : (क) क्या वे उन पदार्थों को उनके रूप में पहचान पा रहे हैं जिनके बारे में मिडिल स्टेज विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में धातुओं या अधातुओं के उदाहरण के रूप में बताया गया है, और (ख) क्या उनमें एक या दो गुण मौजूद हैं या नहीं, ख़ासतौर पर कठोरता और चमक। इस बार, विद्यार्थियों ने हर चीज़ को ध्यान से देखा और उन सात भौतिक गुणों में से हर एक की मौजूदगी या ग़ैर-मौजूदगी पर विचार किया जिन्हें वे धातुओं से जोड़कर सीख चुके थे। जब विद्यार्थियों ने गतिविधि पूरी कर ली, तो मैंने उनसे पूछा कि क्या वे सूची में से ऐसा कोई एक गुण बता सकते हैं जो सभी धातुओं में पाया जाता हो और किसी भी अधातु में न पाया जाता हो। जवाब था, ‘नहीं।’ जब कठोरता और चमक के बारे में पूछा गया, तो ज़्यादातर विद्यार्थियों ने माना कि केवल इनमें से कोई एक गुण किसी पदार्थ को धातु बताने के लिए पर्याप्त नहीं है। कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि पारा एक धातु है, लेकिन वह कठोर नहीं होता। वहीं दूसरी ओर, हीरा और स्टील कठोर तथा चमकदार होते हैं, लेकिन वे धातु नहीं हैं। इसके बाद मैंने कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-4 में इस्तेमाल किए गए शब्दों की ओर विद्यार्थियों का ध्यान दिलाया : “हमने सीखा कि धातुएँ सामान्यत: कठोर, द्युतिमय, आघातवर्धनीय एवं तन्य होती हैं तथा ऊष्मा एवं विद्युत की सुचालक होती हैं।”6 यहाँ मैंने ‘आमतौर पर’ शब्दों पर ज़ोर दिया। मैंने यह सुझाव दिया कि किसी पदार्थ का ज़्यादा सटीक वर्गीकरण करने के लिए उसकी संरचना को समझना और उसके जितने अधिक गुण हो सकें, उतने गुणों का ध्यान से अवलोकन करना ज़रूरी है। इसी बात के साथ हमने कक्षा ख़त्म की।
मुख्य बिन्दु
- प्रिपरेटरी स्टेज की पर्यावरण अध्ययन और मिडिल स्टेज की विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों के कई अध्याय धातुओं और अधातुओं के गुणों के बारे में बताते हैं और रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से इनके उदाहरण भी देते हैं।
- विद्यार्थी इन परिभाषाओं और उदाहरणों को याद कर लेते हैं, लेकिन जब उनसे इन्हीं बातों को नई या अलग तरह की वस्तुओं पर लागू करने को कहा जाता है, या अपवादों के बारे में पूछा जाता है, तो उनकी समझ की कमियाँ सामने आ जाती हैं।
- ऐसी ही एक कमी धातुओं और अधातुओं के गुणों को समझने में दिखाई देती है। पाठ्यपुस्तकों में कई प्रायोगिक गतिविधियाँ सुझाई गई हैं जिनमें विद्यार्थी कई पदार्थों की छान-बीन करके इन गुणों को ख़ुद देखकर समझ सकें और अपवादों को पहचान सकें। यह ज़रूरी है कि शिक्षक कक्षा में विद्यार्थियों को ये गतिविधियाँ करने का मौक़ा दें।
- एक दूसरी कमी इस विचार से जुड़ी है कि धातु और अधातु, तत्त्वों की श्रेणियाँ हैं। सभी तत्त्व धातु या अधातु नहीं होते और सभी पदार्थ तत्त्व भी नहीं होते। इसे तत्त्व, यौगिक और मिश्रण की एक सरल पहचान के ज़रिए समझाया जा सकता है जिसमें केवल उन्हीं धातुओं और अधातुओं पर ध्यान दिया जाए जिनके बारे में मिडिल स्टेज के विद्यार्थी पहले से ही जानते हैं।
टिप्पणियाँ
- Credits for the image (Listening to the sound of tapping a steel thali with a steel spoon in schoolyard) used in the background of the article title: Created for i wonder… using ChatGPT, under prompting by Chitra Ravi (Nov 2025). License: CC BY-NC-ND 4.0.
- इस लेख में एक अलग किया जा सकने वाला कक्षा संसाधन शामिल है : गतिविधि शीट : क्या ये रोज़मर्रा की वस्तुएँ धातुओं या अधातुओं से बनी हैं?
- लेख के हिन्दी अनुवाद की समीक्षा के लिए हम हृदय कान्त दीवान के आभारी हैं।
सन्दर्भ
- National Steering Committee for National Curriculum Frameworks (2023). ‘National Curriculum Framework for School Education 2023’. National Council of Educational Research and Training. URL: https://ncert.nic.in/pdf/NCFSE-2023-August_2023.pdf.
- Central Board of Secondary Education (2020). ‘Teachers’ Resource for Achieving Learning Outcomes, Classes 1 to 10′. URL: https:// cbseacademic.nic.in/web_material/Manuals/TeachersResource_LODoc.pdf.
- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (2025)। ‘अध्याय-10 : वस्तुओं की दुनिया’। हमारा अद्भुत संसार, कक्षा-3 की पर्यावरण विज्ञान की पाठ्यपुस्तक : 123-134. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?ceev1=10-12.
- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ( पुनर्मुद्रण 2025-2026)। ‘अध्याय- 6 : हमारे आस-पास की सामग्री’। जिज्ञासा, कक्षा-6 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक : 101-122. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?fecu1=6-12.
- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (2025)। ‘अध्याय- 3 : विद्युत परिपथ और उनके घटक’। जिज्ञासा, कक्षा-7 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक : 23-40. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?gecu1=3-12.
- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (2025)। ‘अध्याय-4: धातुओं और अधातुओं का संसार’। जिज्ञासा, कक्षा-7 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक : 41-56. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?gecu1=4-12.
- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (2025)। ‘अध्याय- 7: प्रकृति में ऊष्मा का स्थानान्तरण’। जिज्ञासा, कक्षा-7 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक : 89-104. URL: https://ncert.nic.in/textbook/pdf/gecu107.pdf.
- ख़ान, शिफ़ा (2025). ‘रोज़मर्रा की सामग्रियों का धातुओं और अधातुओं के रूप में वर्गीकरण। आई वंडर.., 13 : 36-45. URL: https:// publications.azimpremjiuniversity.edu.in/6318/.
- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (2025-2026)। ‘अध्याय- 8: द्रव्य की प्रकृति : तत्व, यौगिक और मिश्रण’। जिज्ञासा, कक्षा-8 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक : 116-133. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?hecu1=8-13.