विद्यार्थियों को पक्षी-अवलोकन से क्‍यों परिचित कराया जाए?

अनुवाद : प्रियेश गुप्‍ता | पुनरीक्षण : प्रतिका गुप्‍ता | कॉपी एडिटर : अतुल अग्रवाल

विद्यार्थी अपने आस-पास के पक्षियों को स्कूल परिसर, खेतों या गाँव के रास्तों पर बिना किसी अतिरिक्त उपकरण का उपयोग किए केवल अपनी आँखों से देख सकते हैं। साधारण-सी पक्षी-अवलोकन की गतिविधियाँ कैसे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और पर्यावरणीय समझ को विकसित कर सकती हैं?

प्रिपरेटरी स्‍टेज के पर्यावरण अध्ययन की और मिडिल स्‍टेज के विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में पक्षियों और हमारे जीवन में उनकी भूमिका के बहुत सारे सन्‍दर्भ मिलते हैं। इनमें कुछ ऐसी सरल गतिविधियों के विचार भी शामिल हैं जिनमें विद्यार्थियों को अपने आस-पड़ोस के पक्षियों का अवलोकन करना और उन अवलोकनों को दर्ज करना होता है (तालिका-1 देखें)।1-4 किन्‍तु पक्षी इस ग्रह (पृथ्वी) के सबसे अच्‍छे ढंग से दस्‍तावेजित प्राणियों में से हैं। तो हमारे विद्यार्थी इनका अध्ययन करके क्या सीख सकते हैं?

वैज्ञानिक कौशल का विकास करना

पक्षी-अवलोकन विद्यार्थियों को वैज्ञानिक प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव करवाने का एक सरल तरीक़ा है (बॉक्स-1 देखें)।5 इसमें विद्यार्थी विस्तृत अवलोकन करना, डेटा को सावधानीपूर्वक दर्ज करना, वैज्ञानिक विवरण लिखना और वैज्ञानिक रूप से वैध निष्कर्ष निकालना सीखते हैं। चूँकि पक्षी बग़ीचों से लेकर स्कूल परिसरों सहित लगभग सभी जगह पाए जाते हैं, इसलिए वे ऐसी खोज-बीन के लिए आदर्श पात्र हैं।

बॉक्स-1 : पाठ्यचर्या से सम्बन्ध

पक्षी-अवलोकन से जुड़ी चर्चाएँ और गतिविधियाँ शिक्षकों को पाठ्यक्रम के निम्नलिखित लक्ष्यों को पूरा करने में सहायता कर सकती हैं :

  • प्रिपरेटरी स्‍टेज पर्यावरण अध्ययन :
  • CG-1 : [विद्यार्थी] अपने परिवेश में प्राकृतिक और सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण के बारे में खोज-बीन करते हैं और उससे जुड़ते हैं। विशेष रूप से, इससे विद्यार्थियों को निम्‍नलिखित दक्षताएँ विकसित करने में मदद मिलती है : (C-1.1) : “अपने समीपवर्ती पर्यावरण में मौजूद प्राकृतिक (कीट, पौधे, पक्षी, जन्तु, भौगोलिक विशेषताएँ, …प्राकृतिक संसाधन आदि) तथा सामाजिक (घर, सम्बन्ध) घटकों का अवलोकन करना और उनकी पहचान करना।”
  • CG-4 : [विद्यार्थी] सामाजिक और प्राकृतिक वातावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करते हैं। विशेष रूप से यह विद्यार्थियों को निम्‍नलिखित दक्षताएँ विकसित करने में मदद कर सकती हैं :
    • (C-4.1) : “अपने निकटतम परिवेश के पौधों, पक्षियों और जानवरों के बीच विविधता (आकृति, ध्वनियाँ, खान-पान की आदतें, वृद्धि, प्राकृतिक आवास की) का अवलोकन करना और उसका वर्णन करना।“
    • (C-4.5) : “पौधों, पक्षियों और जानवरों की आवश्यकताओं (पानी, भोजन, मिट्टी, देखभाल) को पहचानना तथा यह समझना कि उन्‍हें किस तरह पूरा किया जा सकता है।“
  • CG-6 : [विद्यार्थी] विभिन्न स्रोतों से प्राप्त डेटा और जानकारियों का उपयोग करके अपने आस-पास के पर्यावरण से सम्बन्धित सवालों की जाँच-पड़ताल करते हैं। विशेष रूप से यह विद्यार्थियों में निम्‍नलिखित दक्षता विकसित करने में मदद करता है :
    • (C-6.1) : “स्वतंत्र या सामूहिक रूप से खोज-बीन आधारित सवालों की पड़ताल करना।”
    • (C-6.2) : “विभिन्न रचनात्मक माध्यमों (चित्रकला, आरेख, कविता, नाटक, नुक्कड़ नाटक, मौखिक और लिखित अभिव्यक्ति) के द्वारा अवलोकनों और निष्कर्ष को प्रस्तुत करना।”
  • मिडिल स्‍टेज विज्ञान :
  • CG-3 : [विद्यार्थी] वैज्ञानिक सन्‍दर्भों में सजीव जगत की खोज-बीन करते हैं। विशेष रूप से यह विद्यार्थियों में निम्‍नलिखित दक्षताएँ विकसित करने में मदद करता है :
    • (C-3.1) : “अपने प्राकृतिक परिवेश में दिखाई देने वाले जीव-जन्तुओं (कीट, केंचुए, घोंघे, पक्षी, स्तनधारी, सरीसृप, मकड़ियाँ, विभिन्न प्रकार के पौधे और कवक) में दिखने वाली विविधता, जिनमें सूक्ष्म जीव-जन्तुओं (सूक्ष्मजीवों ) की विविधता भी शामिल है, का वर्णन करने।”
    • (C-3.3) : “सजीवों और उनके वातावरण के बीच एक-दूसरे पर निर्भरता और प्रतिक्रिया के सम्बन्धों के पैटर्न का विश्लेषण करना।”
  • CG-7 : [विद्यार्थी] विज्ञान से सम्बन्धित सवालों, अवलोकनों और निष्कर्षों को सम्‍प्रेषित करते हैं। विशेष रूप से यह विद्यार्थियों में निम्‍नलिखित दक्षता विकसित करने में मदद करता है : (C-7.1) : “मौखिक और लिखित रूप में, और तस्‍वीरों द्वारा वर्णन के ज़रिए विज्ञान को सटीक रूप से सम्प्रेषित करने के लिए वैज्ञानिक शब्‍दावली का उपयोग करना।“5

प्रिपरेटरी और मिडिल स्‍टेज के विद्यार्थियों के लिए इन कौशलों में से सबसे महत्त्वपूर्ण है अवलोकन करने का कौशल। विद्यार्थियों को आस-पड़ोस के पक्षियों का अवलोकन करने के लिए प्रोत्साहित करने का एक मुख्य कारण यह है कि इससे उन्हें अपने अवलोकन कौशल को बेहतर करने में मदद मिलती है।6 यहाँ यह बात ध्यान देने वाली है कि प्राकृतिकविज्ञान और खगोलविज्ञान जैसे विज्ञान के कई क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से भौतिक जगत के दीर्घकालिक, व्यवस्थित और सावधानीपूर्वक किए गए अवलोकनों पर निर्भर रहे हैं। ख़ासकर प्राणी-व्यवहार विज्ञान (ethology) जैसे क्षेत्रों के शोध के सवाल (शोध-विषय) जीव-जन्तुओं के उनके प्राकृतिक परिवेश में किए गए अवलोकनों के आधार पर तय होते आए हैं और हो रहे हैं।

क्रम संख्या सुझाई गईं गतिविधियाँ पाठ्यपुस्तक का अध्याय
1 “अपनी आँखें बन्द करके पक्षियों की बोली सुनने की कोशिश कीजिए। क्या आपको किसी पक्षी की बोली सुनाई दी? क्या आप देख सकते हैं कि कौन-से पक्षी ये बोलियाँ निकाल रहे हैं?…अपने हाथों को कानों से लगाएँ और पक्षियों की आवाज़ की दिशा में अपना मुख करके ध्‍यान से उनकी बोली सुनने की कोशिश कीजिए। क्या अब आप इन बोलियों को और अधिक स्‍पष्‍टता से सुन सकते हैं? पक्षियों की जिन बोलियाँ को आपने सुना था, उन्‍हें एक बार फिर से याद करने की कोशिश कीजिए। अलग-अलग पक्षियों द्वारा निकाली जाने वाली बोलियाँ स्‍वयं भी निकालने की कोशिश कीजिए। जिन पक्षियों की बोलियाँ आपने सुनी हैं, उन बोलियों और उस पक्षी का नाम लिखने की कोशिश करें… (पक्षी का नाम, बोली)। अगर आपको किसी पक्षी की बोली सुनाई नहीं दे रही है, तो आपको क्या लगता है इसका क्या कारण है? आपको पक्षियों की बोलियाँ कब ज़्यादा सुनाई देती हैं : (क) सुबह-सुबह? (ख) दोपहर में? (ग) शाम को?” कक्षा-3 की पर्यावरण अध्ययन की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025-26) का अध्याय-5 (‘पेड़-पौधे और पशु-पक्षी हैं साथ’)
2 “अलग-अलग खाद्य पदार्थ जैसे अनाज, सरस फल (बेरी), गिरियाँ और फल के टुकड़े आदि लीजिए। इन खाद्य पदार्थों को चम्मच, टूथपिक या एक जोड़ी चॉपस्टिक की सहायता से उठाने का प्रयास कीजिए…प्रत्येक खाद्य पदार्थ को उठाकर खाने के लिए उपयुक्त साधन का नाम लिखिए।… यह जानना रोचक है कि पक्षियों की चोंच और पंजे होते हैं, जो उन्हें खाने और अन्य गतिविधियों में सहायता करते हैं। एक बाज़ की नुकीली, मुड़ी हुई चोंच और नुकीले पंजे होते हैं, जिससे वह अपने शिकार को पकड़ता है, जबकि शकरखोरा (sunbird) की चोंच लम्बी होती है जिससे वे फूलों से मकरन्द पीते हैं। हम किसी पक्षी की चोंच और पंजों को देखकर उसके भोजन की प्रवृत्तियों का अनुमान लगा सकते हैं।” कक्षा-4 की पर्यावरण अध्ययन की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) का अध्याय-3 (‘प्रकृति की पाठशाला’)
3 “आप अपने क्षेत्र में आने वाले 5 पक्षियों का पोस्टर बनाइए। यह जानने का प्रयास कीजिए कि वे कहाँ से आते हैं। एक धागे की मदद से गुलाबी मैना की यात्रा को ग्‍लोब पर एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान तक दर्शाइए। कल्पना कीजिए कि आप एक पक्षी हैं जो विश्‍व की यात्रा कर रहे हैं। एक छोटा-सा पोस्‍टकार्ड या संदेश लिखिए जिसमें आप यह बताएँगे कि रास्‍ते में आपने क्‍या-क्‍या देखा है और यात्रा के दौरान आपकी कौन-कौन सहायता करता है (हवा, समुद्री धाराएँ, गर्म मौसम)। इसे अपने साथियों के साथ साझा भी कीजिए।” कक्षा-5 की पर्यावरण अध्ययन की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) का अध्याय-10 (‘पृथ्वी — हमारा साझा घर’)
4 “यदि किसी पौधे या जन्‍तु का आवास क्षतिग्रस्त हो जाए तो क्या होगा? यदि बकरी को खाने के लिए घास न मिले तो क्या होगा? क्या मछली बिना जल के जीवित रह सकती है? अपने माता-पिता, दादा-दादी और पड़ोसियों से उन पौधों, पक्षियों, कीटों अथवा अन्‍य जन्‍तुओं के बारे में जानें जिन्‍हें वे बचपन में प्राय: देखते थे, लेकिन अब वे कम दिखाई देते हैं। ये परिवर्तन तब होते हैं जब आवास नष्‍ट हो जाते हैं। पौधों और जन्‍तुओं के आवास की क्षति से वे अपने घर, भोजन और अन्य संसाधनों से वंचित हो जाते हैं। इससे जैव विविधता की हानि होती है।” कक्षा-6 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, पुनर्मुद्रण 2025-26) का अध्याय -2 (‘सजीव जगत में विविधता’)
तालिका-1 : स्कूली पाठ्यचर्या में पक्षी। यहाँ प्रिपरेटरी स्‍टेज की पर्यावरण अध्ययन और मिडिल स्‍टेज की विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में पक्षियों से सम्बन्धित सुझाई गई गतिविधियों के कुछ उदाहरण दिए गए हैं।1–4

पक्षियों का प्रभावी ढंग से अवलोकन करने के लिए, विद्यार्थियों का छोटे-से-छोटे पहलुओं पर बारीक़ी से ध्यान देना और जिस जटिल वातावरण में पक्षी बसते हैं उसका पारखी होना ज़रूरी है (बॉक्स-2 देखें)।7,8 इसके लिए शिक्षक विद्यार्थियों की सहायता इस तरह के सवाल पूछकर कर सकते हैं : क्या एक ही प्रजाति के पक्षी अलग-अलग दिखते हैं? वे एक-दूसरे से किस प्रकार अलग हैं? क्या आप उनके गीतों या बोलियों (पुकारों) में अन्तर कर सकते हैं? आपने कितने पक्षी देखे? क्या वे अलग-अलग ऊँचाइयों पर या अलग-अलग पेड़ों पर थे? इन अवलोकनों का क्या अर्थ हो सकता है?

बॉक्स-2 : वे सवाल जो शिक्षकों द्वारा बार–बार पूछे जाते हैं।

  1. यदि कोई विद्यार्थी ऐसे पक्षी का नाम पूछ ले जिसका नाम मैं नहीं जानता/ती हूँ तब क्या करूँ? किसी पक्षी का नाम न पता होने में कुछ ग़लत नहीं है। विद्यार्थी से पक्षी का आकार, आकृति, रंग, चोंच और कोई अन्य व्यवहार जो उसने ग़ौर किया हो आदि विवरण बताने के लिए कहें और इन सभी जानकारियों को दर्ज कर लें। यदि आप किसी भी भाषा (स्थानीय, क्षेत्रीय या कोई अन्य भाषा) में पक्षी का नाम जानते हैं तो विद्यार्थी को वही बता दें। यदि आप नहीं जानते हैं तो विद्यार्थी को समझाएँ कि भारत में हज़ारों प्रजाति के पक्षी पाए जाते हैं और किसी के लिए भी सभी का नाम पता होना बहुत मुश्किल है। विद्यार्थी को उन किताबों के बारे में बताएँ जो पक्षियों की पहचान करने में मदद कर सकती हैं, और सुझाव दें कि वे और आप, दोनों मिलकर पक्षी का नाम पता कर सकते हैं। यदि ज़रूरत हो तो आप‍ किसी स्थानीय पक्षी विशेषज्ञ से सम्पर्क कर सकते हैं।
  2. क्या विद्यार्थियों को अधिक सावधानीपूर्वक अवलोकन करना ‘सिखाने’ का कोई तरीक़ा है? अवलोकन करने का कौशल अभ्यास करने से धीरे-धीरे विकसित होता है। अवलोकन-आधारित और पक्षियों की विशेषताओं का वर्णन करने वाली सरल और रुचि बनाए रखने वाली गतिविधियों की मदद से आप विद्यार्थियों को उनके प्रथम पक्षी-अवलोकन अनुभव के लिए तैयार कर उनका उत्साहवर्धन कर सकते हैं (देखें शिक्षक मार्गदर्शिका)। आप परीक्षण के तौर पर एक पक्षी-अवलोकन की अभ्यास क्रिया भी कर सकते हैं, जिसमें विद्यार्थी कक्षा की खिड़की से या स्कूल परिसर में कम-से-कम पाँच मिनट तक शान्ति से किसी पक्षी का अवलोकन करें। उनसे कहें कि वे अपने अवलोकन को जितना हो सके, उतने विस्तार से लिखें। निजी चिन्तन के बाद समूह चर्चा (देखें गतिविधि शीट) से विद्यार्थियों को अपने अवलोकनों को बेहतर और सटीक बनाने में मदद मिलती है। यह परीक्षण अभ्यास विद्यार्थियों को स्वतंत्र रूप से विस्तृत अवलोकन करना सीखने में मदद करता है।
  3. यदि विद्यार्थी कहें कि वे पक्षी के विवरणों का अवलोकन नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि पक्षी बहुत दूर है, तब क्या करें? विद्यार्थियों को समझाएँ कि दूरबीन और टेलीस्कोप के आने से पहले लोग यह सीखकर, कि कहाँ और कैसे पक्षी को देखना है, केवल अपनी आँखों से ही सावधानीपूर्वक अवलोकन करते थे (देखें स्‍टूडेंट हैंडआउट)। यह अभ्यास आँखों को अवलोकन का प्रभावी उपकरण बनाने के लिए प्रशिक्षित करता है। विद्यार्थियों को उन आम पक्षियों के अवलोकन से शुरुआत करने के लिए प्रोत्‍साहित करें, जिन्‍हें देखना आसान हो। यदि कोई विद्यार्थी कहीं दूर स्थित या दुर्लभ पक्षी का अवलोकन करना चुनता है, तो जितना उससे हो सके उतना विवरण दर्ज करने के लिए उसे प्रोत्साहित करें। यह हो सकता है कि उसे पक्षी का अवलोकन लम्बे समय तक करना पड़े, लेकिन थोड़े अवलोकन भी मूल्यवान होते हैं।
  4. यदि विद्यार्थी पक्षी के ऐसे व्यवहार के बारे में पूछते हैं जिसे मैं समझा न सकूँ, तब क्या करें? आप इसे सीखने के अवसर में बदल सकते हैं। आप विद्यार्थियों को यह देखने के लिए प्रोत्साहित करें कि क्या उनके अवलोकन इन सवालों के जवाब देने में मदद कर सकते हैं। उन्हें सुझाव दें कि वे शुरू में इंटरनेट का उपयोग करने से बचें, क्‍योंकि पहले से पढ़े गए तथ्‍य या जानकारी उनके अवलोकन और विवरण को प्रभावित कर सकते हैं। यदि उनके सवालों के जवाब अवलोकन से भी नहीं मिलते हैं (उदाहरण के लिए, ‘क्यों’ वाले सवालों के जवाब पाने के लिए अकसर अवलोकन से आगे जाना पड़ता है), और विद्यार्थी उत्सुक हैं तो उन्‍हें पुस्तकों और अन्य विश्वसनीय स्रोतों, जिनमें इंटरनेट भी शामिल है, की ओर बढ़ने का मार्गदर्शन करें। स्रोतों को परखने व उनका सत्यापन करने के महत्त्व पर ज़ोर दें। आप विद्यार्थियों के साथ मिलकर शोध भी कर सकते हैं और एक अनौपचारिक मंच ‘विशेषज्ञ से पूछें’ स्थापित करने पर विचार कर सकते हैं, जहाँ विद्यार्थियों के सवाल उन विशेषज्ञों या पेशेवरों से पूछे जाएँगे जो इन सवालों के जवाब देने के इच्छुक हों।
  5. यदि विद्यार्थी, जिस पक्षी का वे अवलोकन कर रहे हैं, उसकी फ़ोटो लेना चाहें, तब क्या करें? यह तो उचित है। लेकिन यह स्पष्ट कर दें कि फ़ोटोग्राफ़ हाथ से चित्र बनाने (ड्राइंग) की जगह न ले। ड्राइंग करने से विद्यार्थियों में बारीक़ी से अवलोकन करने का कौशल विकसित होता है। इसके अलावा, सभी विद्यार्थियों के लिए कैमरे या फ़ोन उपलब्‍ध नहीं हो सकते हैं, इसलिए फ़ोटोग्राफ़ लेना अनिवार्य नहीं होना चाहिए। ऐसे विद्यार्थियों को सबके सामने प्रोत्साहित करें जो अपने काम के लिए सरल उपकरणों / साधनों का उपयोग करते हैं, और इस विचार को मज़बूती से सामने रखें कि सार्थक वैज्ञानिक अध्ययन के लिए महँगे उपकरणों की ज़रूरत नहीं होती है।
  6. यदि विद्यार्थियों को लगे कि उनकी ड्राइंग ‘सुन्दर’ नहीं है, तब क्या करें? विद्यार्थियों को भरोसा दिलाएँ कि इस ड्राइंग का उद्देश्य सुन्दर चित्र बनाना नहीं, बल्कि महत्त्वपूर्ण विवरणों को स्पष्टता से दिखाना है। कोई भी ड्राइंग, जो इसके उद्देश्य की पूर्ति करती हो, मूल्यवान है। उन्हें बताएँ कि कई प्रकृतिविद् (Naturalists) अकसर फ़ौरी (quick), कच्ची-पक्की (rough) ड्राइंग बनाते हैं − कभी-कभी केवल सरल स्टिक फ़िगर (चन्द डण्डे / रेखा से बना चित्र) − क्योंकि उनका ध्यान मुख्य विशेषताओं को देखकर दर्ज करने पर होता है। इस बात पर ज़ोर दें कि अधिक आकर्षक ड्राइंग ज़रूरी नहीं कि अधिक उपयोगी हो, न ही इससे उन्हें अधिक अंक मिलेंगे।
  7. क्या विद्यार्थियों के अवलोकन कौशल में सुधार का आकलन करने का कोई अनौपचारिक तरीक़ा है? एक सरल तरीक़ा यह है कि तीन से चार सप्ताह बाद (इस बॉक्स के सवाल 2 में जो विवरण है) पक्षी-अवलोकन कार्य दोहराया जाए। विद्यार्थियों से कहें कि वे कक्षा की खिड़की से उसी तरह के पक्षी को पाँच मिनट तक देखें और अपने अवलोकन दर्ज करें। फिर इन नए रिकॉर्डों की तुलना उनके पहले के रिकॉर्डों से करें, ताकि यह देखा जा सके कि उनके विवरण अधिक समृद्ध और विस्तृत हुए हैं या नहीं।
  8. क्या आप पक्षी-अवलोकन की कुछ और गतिविधियाँ सुझा सकते हैं? आप सामान्य पक्षियों जैसे − पहाड़ी बुलबुल (Red-whiskered Bulbul), कालासिर बुलबुल (Red-vented Bulbul), दर्ज़ी चिड़िया (Common Tailorbird) और दहियर (Oriental Magpie Robin) − की तस्वीरों को एक साथ एक जगह एकत्रित कर सकते हैं, और विद्यार्थियों से उनके शरीर के अंगों का वर्णन करने के लिए कह सकते हैं। एक अन्य गतिविधि में समान दिखने वाली कोतवाल (Black Drongo) और राखिया ड्रोंगो (Ashy Drongo) जैसी प्रजातियों के बीच अन्तर पहचानने को कहा जा सकता है। आप कक्षा में आम पक्षियों के छोटे वीडियो भी दिखा सकते हैं, और विद्यार्थियों से अपने अवलोकन रिकॉर्ड करने के लिए कह सकते हैं।
    ये गतिविधियाँ अवलोकन और वर्णन कौशल को और मज़बूत करती हैं।7,8

विविधता की सराहना

जिन अलग-अलग तरह के पक्षियों का अवलोकन विद्यार्थियों ने किया है, उनके बारे में कक्षा में चर्चाएँ, जीवित प्राणियों की विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक हो सकती हैं। इस कार्य में शिक्षक इस ओर ध्यान दिलाकर मदद कर सकते हैं कि कैसे पक्षियों के एक छोटे-से समूह में भी आकार, आकृतियों और चोंच जैसे विशिष्ट अंगों के रंगों में असाधारण विविधता दिख सकती है। ग़ौर करने वाली बात यह है कि पक्षियों की चोंच में जो विविधता दिखाई देती है वह केवल हड्डियों और केराटिन के उपयोग से आती है। (केरोटिन वही पदार्थ है जो हमारे नाख़ूनों में होता है।) शिक्षक इस बात को भी रेखांकित कर सकते हैं कि पक्षियों की चोंच टटोलने, मसलने, कीट पकड़ने, लकड़ी में छेद करने आदि जैसे और इसके अलावा कई और कामों में मदद करती है। उदाहरण के लिए, कक्षा-3 की पर्यावरण अध्ययन की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025-2026) के अध्याय-9 (‘स्वस्थ रहो, प्रसन्न रहो’) में विद्यार्थी पढ़ते हैं कि “आपने पक्षियों को भी देखा होगा कि वे अपनी चोंच से अपने पंखों को साफ़ करते हैं।“9 इसी तरह, कक्षा-5 की पर्यावरण अध्ययन की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-8 (‘कपड़े—चीज़ें कैसे बनती हैं’) में विद्यार्थी दर्ज़ी चिड़िया (tailorbird) के बारे में सीखते हैं : “पौधे के रेशों या मकड़ी के रेशम (जाले) का उपयोग करके अपनी चोंच से यह एक बड़े पत्ते के किनारों को आपस में सिलती है। यह पत्ते के किनारे पर छेद करती है और धागे को अपनी चोंच से ऐसे खींचती है, जैसे कोई दर्ज़ी कपड़ा सिलता है। इस तरह यह अण्डे देने और चूज़ों को पालने के लिए एक नरम और सुरक्षित घोंसला बनाती है।“10

ऐसे अवलोकन योग्य उदाहरणों का उपयोग करने से शिक्षकों को उन कई उत्तरजीविता तंत्रों (survival mechanisms) को समझाने में मदद मिलती है, जिन्हें पक्षियों ने लाखों वर्षों में विकसित किया है। शिक्षक यह भी दिखा सकते हैं कि कैसे इन अनुकूलनों ने मनुष्य के कई नवाचारों और आविष्कारों के लिए प्रेरणा दी है और लगातार देते रह सकते हैं। उदाहरण के लिए, शिनकानसेन बुलेट ट्रेन को डिज़ाइन करने वाले जापानी इंजीनियरों को शुरू में ट्रेन के सुरंग से निकलते समय उत्पन्न होने वाले ध्वनि-विस्फोट (sonic boom) के बारे में शिकायतें मिलीं। एक पक्षी प्रेमी और उन इंजीनियरों में से एक, एइजी नाकात्सु ने देखा कि कैसे एक किंगफ़िशर कितनी शान्ति से चोंच के बल पानी में गोता लगाता है (चित्र-1 देखें)। इससे प्रेरित होकर, उन्होंने ट्रेन के अगले हिस्से को पक्षी की शंकु के आकार की चोंच की तरह फिर से डिज़ाइन किया, जिसके परिणामस्वरूप एक शान्त, तेज़ और अधिक ऊर्जा कुशल ट्रेन बनी।11,12

fig-1 A pied kingfisher starting
चित्र-1 : एक चितकबरा किंगफ़िशर अपनी चोंच के बल पर गोता लगाने के पहले। इस व्‍यवहार के अवलोकन ने शिनकानसेन बुलेट ट्रेन के आगे के हिस्से (nose) के डिज़ाइन में बदलाव करने के लिए प्रेरित किया। Credits: Mehmet Karatay, Wikimedia Commons. License: CC BY-SA 3.0 Unported Deed. URL: https://commons.wikimedia. org/wiki/File:Pied_kingfisher_started_diving.jpg.

पक्षियों की पारिस्थितिक भूमिका को पहचानना

विद्यार्थी अकसर सुनते हैं कि पक्षी हानिकारक जीव होते हैं या वे फ़सलों को खा जाते हैं। कक्षा-3 की पर्यावरण अध्ययन की पाठ्यपुस्तक के अध्याय-6 (‘निर्भरता एक-दूसरे पर’) में दिए चर्चा बिन्‍दुओं का इस्‍तेमाल कर ऐसी मान्यताओं की पड़ताल की जा सकती है, जैसे कि : “क्या विद्यार्थियों ने अपने घर में या उसके आस-पास कोई पक्षी देखा है? क्या कोई बिन बुलाए पक्षी आपके घर आए हैं? वे क्यों आते हैं? उनकी उपस्थिति से आप कैसा महसूस करते हैं? आपको कौन-सा पक्षी पसन्द है, और जब आपको वह पसन्द नहीं आता तो आप क्या करते हैं?“13

पक्षी-अवलोकन पक्षियों को कई प्राकृतिक वासों के मूल्यवान सदस्य के रूप में देखने में मदद करता है। कई पक्षी फल खाकर और उनके बीज फैलाकर वन पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखते हैं।14 सनबर्ड, लीफ़बर्ड और व्हाइट-आई जैसे कुछ पक्षी परागण में सहायता करते हैं और फ़सलों के प्रसार के माध्यम से किसानों की मदद करते हैं।15,16 अन्य पक्षी कीटों को खाकर फ़सलों की रक्षा करते हैं और जैविक कीटनाशकों के समान कार्य करते हैं। उदाहरण के लिए, कक्षा-5 की पर्यावरण अध्ययन की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-10 में विद्यार्थी पढ़ते हैं कि कैसे गुलाबी मैना पक्षी प्रत्येक शीत ऋतु में “रूस के दक्षिणी भाग, मंगोलिया और आस-पास के देशों से यात्रा करते हुए हज़ारों किलोमीटर दूर भारत में आते हैं। ये पक्षी यहाँ आकर गर्म मौसम का आनन्द लेते हैं और टिड्डे-टिड्डियों तथा कीड़ों-मकोड़़ों को खाकर किसानों की सहायता करते हैं क्‍योंकि ये कीट फ़सलों को क्षति पहुँचाते हैं।”3

कक्षा-8 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-12 (‘प्रकृति कैसे सामंजस्य में काम करती है’) में विद्यार्थियों को जानने को मिलता है कि प्रदूषण, वनों की कटाई, पर्यावास का नुक़सान, जलवायु परिवर्तन, घुसपैठिया प्रजातियाँ और अति-दोहन जैसी कई मानवीय गतिविधियों के प्रभाव पारिस्थितिकी तंत्र के लिए ख़तरे उत्पन्न करते हैं। उदाहरण के लिए, कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग खेतों में रहने वाले पक्षियों के भोजन को ज़हरीला बना देता है, जिससे वे अपने प्राकृतिक वासों से विलुप्त होने लगते हैं। विद्यार्थियों को “खेतों के पक्षियों की किस तरह रक्षा की जा सकती है और इससे मानव को क्या लाभ होगा?” जैसे सवालों पर चर्चा करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

पर्यावरण परिवर्तन के संकेतकों के रूप में पक्षियों को देखना

पक्षी कब और कहाँ दिखाई देते हैं, यह अवलोकन करना विद्यार्थियों में उनके अपने स्थानीय पर्यावरण और इसे ख़तरा पहुँचाने वाले कारकों के प्रति और अधिक जिज्ञासु बना सकता है। कक्षा-8 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-13 (‘हमारा आवास : पृथ्वी, एक अद्वितीय जीवनदायी ग्रह’) में विद्यार्थी पढ़ते हैं कि “…पृथ्वी पर जीवन सजीव और निर्जीव वस्‍तुओं के परस्‍पर सन्तुलन पर निर्भर करता है… वैश्विक तापमान, ऑक्सीजन का स्तर अथवा ओज़ोन परत में अंशमात्र परिवर्तन भी जीवन के लिए गम्‍भीर संकट बन सकता है।”18 किन्तु मानव गतिविधियाँ “इस सन्तुलन को बिगाड़ रही हैं” और जैव विविधता पर गम्भीर प्रभाव डाल रही हैं।18

इन मानव गतिविधियों के प्रभावों को संकेतक प्रजातियों के ज़रिए भी समझा जा सकता है। यह संकेतक प्रजातियाँ ऐसे विशेष पौधे या जीव-जन्तु होते हैं जिनकी मौजूदगी, ग़ैर–मौजूदगी, तादाद, सेहत स्थानीय पर्यावरणीय परिस्थितियों के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती है। यह प्रजातियाँ प्रायः सामान्य, आसानी से पहचानी जाने वाली होती हैं और विशेष पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रति अकसर इस तरह की तीव्र प्रतिक्रिया देती हैं जो बिना विशेष प्रशिक्षण या उपकरण के भी पहचानी जा सकती हैं।19 पक्षियों में इसके कई उदाहरण मिलते हैं :

  • हानिकारक पदार्थों के प्रति त्वरित संवेदनशीलता : कक्षा-6 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, पुनर्मुद्रण 2025-2026) के अध्याय-11 (‘प्रकृति की अमूल्य सम्पदा’) में विद्यार्थी पढ़ते हैं कि कोयला “भारत के कई हिस्सों में पाया जाता है” और इसका खनन “बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है।”20 कोयला खनन में मीथेन, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन जैसी ज़हरीली गैसें निकलती हैं। इन गैसों के सम्पर्क में आने से मनुष्यों में साँस सम्बन्धी गम्भीर बीमारियाँ (जैसे अस्थमा और ब्रोंकाइटिस) हो सकती हैं और ये जानलेवा भी हो सकती हैं।21 1960 के दशक तक, दुनिया के कई हिस्सों में खदानों में काम करने वाले मज़दूर कैनरी पक्षियों को पिंजरे में बन्‍दकर अपने साथ भूमिगत खदानों में ले जाते थे (देखें चित्र-2)। ये छोटे, पीले पक्षी ज़हरीली गैसों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। यदि पक्षी परेशानी के कोई भी लक्षण दिखाता था जैसे गीत गाना बन्द कर देना या बैठने की जगह से गिर जाना तो खदान के मज़दूर ज़हरीली गैस होने के बारे में सतर्क हो जाते थे, भले ही गैस दिखाई न दे रही हो या उसकी गंध न आ रही हो। ऐसे में खदान को ख़ाली करा लिया जाता था, यह एक ऐसी प्रथा थी जिसने अनगिनत जानें बचाईं।22
  • रासायनिक प्रदूषकों का संकेत देने वाली गिरावट : 1990 के दशक से भारत में गिद्धों की आबादी में आई भारी गिरावट से खाद्य शृंखला में हानिकारक रासायनिक प्रदूषकों के उपस्थित होने के संकेत मिले हैं।23,24 जैसा कि कक्षा-8 की भूगोल की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2024-2025) के अध्याय-2 (‘भूमि, मृदा, जल, प्राकृतिक वनस्पति और वन्यजीव संसाधन’) में विद्यार्थी पढ़ते हैं, वैज्ञानिकों ने पाया है कि : “भारतीय उप-महाद्वीप में जिन पशुओं का उपचार डिक्लोफिनैक, एस्‍प्रीन अथवा इबूप्रोफ़ेन जैसे पीड़ानाशी से किया जाता था, उनके अपमार्जन उपरान्‍त गिद्ध किडनी ख़राब होने से मर रहे थे।”25 गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र को स्वच्छ रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी संख्या में गिरावट का सम्बन्ध आवारा कुत्तों (जो गिद्धों की संख्या कम होने के कारण उन शवों को खा जाते हैं जिन्हें गिद्ध खाते थे) की बढ़ती आबादी और भारत भर में रेबीज़ के बढ़ते मामलों से भी जोड़ा गया है।26,27
  • पारिस्थितिक इतिहास को उजागर करने वाली विविधताएँ : पक्षियों के गुणों में होने वाले परिवर्तन उनके प्राकृतिक आवासों के पर्यावरणीय इतिहास का संकेत देते हैं। कक्षा-6 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2024) के अध्याय-2 में रेखांकित किया गया है कि पौधों और जीव-जन्तुओं की उत्तरजीविता के गुणों/विशिष्टताओं को प्राकृतिक पर्यावास कैसे आकार देते हैं।4 डार्विन की फिंच (Darwin’s finches – छोटी चिडि़या) इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण है। जब चरम पर्यावरणीय परिवर्तनों के कारण भोजन की उपलब्धता कम हो गई, तब इन छोटे, गौरैया जैसे पक्षियों में लगभग 18 अलग-अलग आकारों और प्रकारों की चोंच का विकास हो गया। इससे वे अलग-अलग द्वीपों पर सख़्त बीज, कीट, कैक्टस और कलियों जैसे विभिन्न खाद्यों स्‍त्रोतों का इ्रस्‍तेमाल कर पाने में सक्षम हो पाईं।28 इस विविधता का अध्ययन करने से गैलापागोस द्वीप में हुए पर्यावरणीय परिवर्तनों के बारे में महत्त्वपूर्ण अन्‍तर्दृष्टि मिलती है।
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चित्र-2 : 1928 में ली गई एक तस्वीर जिसमें खनन फ़ोरमैन आर थॉर्नबर्ग एक छोटे पिंजरे को हाथ में पकड़े हुए है, जिसमें एक कैनरी पक्षी है। खनिक इस पक्षी का उपयोग भूमिगत खदानों में कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी ज़हरीली गैसों का पता लगाने के लिए एक पूर्व-चेतावनी प्रणाली के रूप में करते थे, ताकि वे समय रहते खदान से बाहर आ सकें। Credits: George McCaa, U.S. Bureau of Mines, Wikimedia Commons. License: CC BY. URL: https://commons.wikimedia. org/wiki/File:Canary_coal_mine.jpg.

प्राकृतिक जगत से जुड़ाव

पक्षी-अवलोकन हमारे प्राकृतिक जगत से कमज़ोर होते जुड़ाव को पुनः स्थापित करने में भी सहायक हो सकता है। कई दार्शनिकों और वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि मनुष्य जिस प्रकार से प्राकृतिक जगत से सम्बन्ध रखते हैं, उसमें एक सौन्दर्यपरक आयाम मौजूद है। हम अकसर इसकी भौतिक सुन्दरता से आश्चर्यचकित रह जाते हैं, और इसके बीच होने पर तृप्ति और सन्तुष्टि का अनुभव करते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि ऐसे अनुभव विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए लाभकारी हो सकते हैं।29

चलते-चलते

पक्षी-अवलोकन अलग-अलग सामाजिक-सांस्कृतिक और प्राकृतिक परिवेशों के विद्यार्थियों के लिए एक सुलभ और सस्ती गतिविधि हो सकती है। यह उन्हें पक्षियों (उनकी उपस्थिति, व्यवहार और उनमें दिखने वाली किसी भी प्रकार की विविधता) और उनके आस-पास के वातावरण (अजैविक, जैविक, प्राकृतिक या कृत्रिम) के बीच सम्बन्ध समझने में मदद कर सकती है। यह विद्यार्थियों को अवलोकन, बारीक़ियों पर ध्यान देने और दस्तावेज़ीकरण जैसे कौशल विकसित करने में भी मदद कर सकती है, और ये सभी वैज्ञानिक प्रक्रिया के अनिवार्य अंग हैं।6

मुख्‍य बिन्‍दु

विद्यार्थियों को पक्षी-अवलोकन से क्‍यों परिचित कराया जाए?
  • प्रिपरेटरी स्‍टेज की पर्यावरण अध्ययन और मिडिल स्‍टेज की विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में ऐसी कई सरल गतिविधियाँ दी गई हैं जो विद्यार्थियों को अपने आस-पास के पक्षियों का अवलोकन करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
  • पक्षी-अवलोकन विद्यार्थियों को वैज्ञानिक प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करता है। इससे उनमें विस्तृत अवलोकन करने, आँकड़ों को सावधानीपूर्वक दर्ज करने, वैज्ञानिक विवरण लिखने और उचित निष्कर्ष निकालने जैसे महत्त्वपूर्ण कौशल विकसित होते हैं।
  • विभिन्न पक्षियों का लम्बे समय तक अवलोकन उनकी विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिकाओं के प्रति सराहना को बढ़ावा देता है, साथ ही विद्यार्थियों के प्राकृतिक दुनिया से जुड़ाव को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

आभार

यह लेख और इससे सम्बन्धित कक्षा संसाधन सबसे पहले विज्ञान प्रतिभा प्रोजेक्ट के ‘रीडिस्कवर, डिस्क्राइब, एंड ड्रॉ बर्ड्स’ लर्निंग यूनिट के तहत विकसित किए गए थे। विज्ञान प्रतिभा प्रोजेक्ट होमी भाभा सेंटर फ़ॉर साइंस एजुकेशन (HBCSE), TIFR, मुम्बई का प्रोजेक्ट है। URL: https://vigyanpratibha.in/index.php/ rediscover-describe-and-draw-birds-2/. These were published as a four-part series in Teacher Plus magazine: (a) Muralidhar A & Krishnan, A (2018). ‘Why study birds?’ Teacher Plus, 16(7): 48–50. URL: https://teacherplus.org/2018/2018/august-2018/why-study-birds/. (b) Muralidhar, A (2018). ‘Discover, Describe and Draw Birds.’ Teacher Plus, 16(9): 32–35. URL: https://teacherplus.org/2018/2018/october-2018/discover-describeand-draw-birds/. (c) Muralidhar, A (2019). ‘Discover, Describe and Draw birds: Handouts and Resource List for the Activity on Observing Birds.’ Teacher Plus, 17(1): 52–56. URL: https://teacherplus.org/2019/ecowatch/discover-describe-and-draw-birds-2/. (d) Muralidhar, A (2019). ‘A fancy for flight’. Teacher Plus, 17(2): 52–56. URL: https://teacherplus.org/2019/ecowatch/a-fancy-for-flight/. They have also been printed as: Muralidhar, A, & Krishnan, A (2021). ‘Rediscover, describe, and draw birds’. In Choksi, B, Date, G, Gupta, A, Mani, R & Subramaniam, K (Eds.), Exploring Science and Mathematics with Vigyan Pratibha Learning Units, Class 8: Teacher Version: 105-136. Mumbai: HBCSE.

लेख का यहाँ प्रकाशित संस्करण चित्रा रवि द्वारा पुनर्गठित और संशोधित किया गया है ताकि मूल लेख के विचारों को प्रिपरेटरी स्‍टेज के पर्यावरण अध्ययन और मिडिल स्‍टेज के विज्ञान पाठ्यक्रमों से जोड़ा जा सके। यहाँ प्रकाशित कक्षा संसाधनों की संरचना और शब्‍दों में मामूली बदलाव किए गए हैं। आई वंडर… टीम लेखकों का धन्यवाद देती है कि उन्होंने इन संस्करणों को प्रकाशित करने की अनुमति दी।

टिप्पणियाँ

  • Credits for the image (School kids birdwatching at Annamalai Hills, Tamil Nadu) used in the background of the article title are: PJeganathan, Wikimedia Commons. URL: https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Birdwatching_in_India_JEG0901.jpg. License: CC BY-SA 4.0 International Deed.
  • इस लेख में तीन अलग किए जा सकने वाले कक्षा संसाधन शामिल हैं : गतिविधि शीट : अपने आस-पड़ोस के किसी पक्षी का अवलोकन करना; स्‍टूडेंट हैंडआउट : पक्षी-अवलोकन के लिए मार्गदर्शिका; शिक्षक मार्गदर्शिका : अपने आस-पड़ोस के किसी पक्षी का अवलोकन करना।
  • लेख के हिन्‍दी अनुवाद की समीक्षा के लिए हम हृदय कान्‍त दीवान के आभारी हैं।

सन्दर्भ

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