कैसे बनता है दूध से दही?

कक्षा-8 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-1 (‘विज्ञान के अन्वेषी संसार की खोज यात्रा’) की शुरुआत में कहा गया है : “हम नहीं चाहते कि आप मात्र नए तथ्यों को जानें; अपितु हमारी अभिलाषा है कि आप नए तथ्यों को खोजना भी सीखें। विज्ञान में अन्वेषण का अर्थ मात्र किसी विषय को जानना ही नहीं अपितु उस विषय में सरल प्रश्नों को पूछना भी है। अब आप विषय-आधारित प्रश्नों को पूछ सकते हैं और उन प्रश्नों के उत्तर देने के लिए सरल प्रयोगों की अभिकल्पना करके अपने अवलोकनों का उपयोग अपनी समझ को उत्कृष्ट बनाने में कर सकते हैं। ऐसा करने से, आपमें से प्रत्येक व्यक्ति न केवल शिक्षार्थी बनेगा अपितु अन्वेषक एवं युवा वैज्ञानिक भी बनेगा जो वास्तविक संसार की पहेलियों को सुलझाएगा। ये प्रश्न दैनिक जीवन के प्रश्नों से लेकर… पृथ्वी के बड़े रहस्यों और इससे भी आगे तक हो सकते हैं।”1 वास्तविक संसार का ऐसा मसला, जिसका उपयोग विद्यार्थियों को वैज्ञानिक जाँच-पड़ताल से परिचित कराने के लिए किया जा सकता है, दूध का दही में बदलना है।
चूँकि भारत के बहुत-से घरों में दही जमाना रोज़मर्रा की बात है, विद्यार्थी इस प्रक्रिया से वाकिफ़ होगें ही। लेकिन जब इसी जानी-पहचानी प्रक्रिया की जाँच विज्ञान की कक्षा में की जाती है तो यह उन जिज्ञासु विद्यार्थियों के लिए सीखने के कई अच्छे मौक़े दे सकती है जो अभी विज्ञान की दुनिया को समझना शुरू कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, कक्षा-8 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-2 (‘अदृश्य जीव-जगत : हमारी आँखों की क्षमता से परे’) की गतिविधि 2.9 में विद्यार्थियों को एक चम्मच दही गुनगुने दूध में और एक चम्मच दही ठण्डे दूध में मिलाने के प्रभाव की तुलना करने के लिए कहा गया है।2 लेकिन यह दही बनने की प्रक्रिया का सिर्फ़ एक पहलू है। इस प्रक्रिया से जुड़े कई और भी सवाल हैं जिन्हें विद्यार्थी आसान और कम ख़र्च वाले प्रयोगों के माध्यम से समझ सकते हैं। ऐसी जाँच के लिए बस थोड़ी-सी जगह, ध्यान से देखना, और दूध व दही के साथ प्रयोग करने की इच्छा (और बाद में सफ़ाई करना) ही काफ़ी हो सकता है (बॉक्स-1 देखें)।3,4 मैं ऐसी कुछ सरल सम्भावनाएँ आगे बता रही हूँ।
बॉक्स-1 : पाठ्यचर्या से सम्बन्ध
ये गतिविधियाँ और चर्चाएँ नीचे दी गई बातों को पूरा करने में मदद करती हैं :
- मिडिल स्टेज विज्ञान के पाठ्यचर्या लक्ष्य :
- CG-6 : [विद्यार्थी] वैज्ञानिक ज्ञान के विकास के अध्ययन में शामिल होकर और वैज्ञानिक जाँच करते हुए विज्ञान की प्रकृति और उसकी प्रक्रियाओं को समझता है। विशेष रूप से, यह विद्यार्थियों में निम्नलिखित दक्षता (C-6.2) विकसित करने में सहायता कर सकता है “वैज्ञानिक शब्दावली का उपयोग करके प्रश्न तैयार करना… और प्रमाण के रूप में डेटा एकत्र करना (प्राकृतिक वातावरण के अवलोकन, सरल प्रयोगों की रूपरेखा बनाने या सरल वैज्ञानिक उपकरणों के उपयोग के माध्यम से)।”
- CG-7 : [विद्यार्थी] विज्ञान से सम्बन्धित प्रश्नों, अवलोकनों और निष्कर्षों को सम्प्रेषित करता है। विशेष रूप से, यह विद्यार्थियों में निम्नलिखित दक्षता (C-7.1) विकसित करने में सहायता कर सकता है “वैज्ञानिक शब्दावली का उपयोग करके मौखिक, लिखित और चित्रों के माध्यम से वर्णन करके विज्ञान को सटीक रूप से सम्प्रेषित करना।”3
- मिडिल स्टेज विज्ञान से जुड़ी अपेक्षाएँ : विद्यार्थियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे विज्ञान से जुड़े प्रक्रिया कौशल विकसित करें। इसमें शामिल हैं − अवलोकन करना, प्रश्न पूछना,सीखने के विविध संसाधन ढूँढ़ना, खोज-बीन की योजना बनाना, परिकल्पना करना और उसकी जाँच करना,डेटा का संग्रहण करना और उसे समझने और उसका विश्लेषण करने के लिए अलग-अलग उपकरणों का उपयोग करना, प्रमाण के आधार पर व्याख्या का सम्बलन करना, गहराई से सोचकर अलग-अलग सम्भावित कारणों को परखना और आंकना, और ख़ुद के अपने विचारों पर मनन करना।4
- मिडिल स्टेज विज्ञान के अधिगम के प्रतिफल :
- अपने प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़ने के लिए सरल खोज-बीन करना।
- प्रक्रियाओं और परिघटनाओं का सम्बन्ध उनके होने के कारणों से जोड़ना।
- वैज्ञानिक अवधारणाओं की सीख का उपयोग रोज़मर्रा के जीवन में करना।4
दही, दूध से कैसे अलग है?
विद्यार्थी दूध और दही के छोटे नमूनों (बिना नाम-लेबल वाले) की तुलना से शुरुआत कर सकते हैं। विद्यार्थियों को सिवाय चखने के, अपनी बाकी सभी इन्द्रियों का इस्तेमाल करने और अपने उत्तरों के समर्थन में अवलोकनों को रिकार्ड के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आमतौर पर विद्यार्थी बताते हैं कि दही गाढ़ा होता है और उसमें खट्टी गन्ध आती है। ऐसे शुरुआती अवलोकनों को नीचे दिए गए सवालों के द्वारा आगे बढ़ाया जा सकता है :
- क्या दूध हमेशा पतला होता है? क्या उबालने से दूध के गाढ़ेपन पर प्रभाव पड़ता है? दही कितना गाढ़ा होता है? क्या दही पतला और बहने वाला भी हो सकता है? क्या दही के गाढ़ेपन को नियंत्रित किया जा सकता है?
- दूध की गन्ध कैसी होती है? क्या दही से हमेशा खट्टी गन्ध आती है? क्या ताज़े दही की गन्ध पुराने दही की गन्ध से अलग होती है? क्या दूध में नींबू के रस की कुछ बूँदें डालने से दही जैसी गन्ध आएगी? (कक्षा में इसकी जाँच की जा सकती है।)
ये अवलोकन दूध और दही के गुणों की और गहरी जाँच-पड़ताल के लिए आधार तैयार करते हैं (गतिविधि शीट-1 देखें)। नीचे दो आसान तरीक़े सुझाए गए हैं :
- फैलाव जाँच : इस जाँच के लिए काँच की स्लाइड जैसी एक समतल और पारदर्शी सतह की ज़रूरत होती है। ड्रॉपर की मदद से एक स्लाइड पर दूध की एक बूँद और दूसरी स्लाइड पर दही की एक बूँद डालें। शिक्षक विद्यार्थियों का ध्यान इस ओर खींच सकते हैं कि ड्रॉपर से दूध और दही किस तरह बाहर आते हैं। क्या दही को दूध की तुलना में कम समय लगता है या अधिक? अगर विद्यार्थी दूध और दही को अपनी-अपनी स्लाइड पर हल्का-सा फैलाते हैं और तुलना करते हैं, तो क्या दोनों की संगतता और गाढ़ेपन में कोई साफ़ फ़र्क़ दिखता है? विद्यार्थी आमतौर पर देखेंगे कि दूध का फैलाव दही (जो कि दानेदार दिखता है) की तुलना में बहुत अधिक समरूप है, और यह कि दूध का ज़्यादातर भाग उसके फैलाव क्षेत्र के बीच में इकट्ठा हो जाता है (चित्र-1 देखें)। विद्यार्थियों को यह याद दिलाना उपयोगी होगा कि दूध और दही को लेने के लिए अलग-अलग ड्रॉपर और फैलाने के लिए अलग-अलग उँगलियों का इस्तेमाल करें। इसे प्रयोग के दौरान अपनाई जाने वाली एक सामान्य सावधानी के रूप में समझाया जा सकता है, साथ ही विद्यार्थियों को यह सोचने और कारण समझाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है कि इस विशेष गतिविधि में यह सावधानी क्यों महत्त्वपूर्ण है।
- pH जाँच : कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-2 (‘पदार्थों की खोज : अम्लीय, क्षारीय और उदासीन’) में बताया गया है कि “…जिन पदार्थों का स्वाद खट्टा होता है, उनमें अम्ल होता है और वे अम्लीय प्रकृति के होते हैं।”5 इसके बाद विद्यार्थियों से दही में मौजूद सबसे आम अम्ल का नाम पता करने के लिए कहा जाता है। शिक्षक इस गतिविधि की शुरुआत विद्यार्थियों से यह पूछकर कर सकते हैं कि उनके पूर्वानुमान में दूध और दही अम्लीय होंगे, क्षारीय होंगे या उदासीन होंगे। साथ ही, उन्हें अपने जवाबों के समर्थन में कारण देने के लिए भी कहा जा सकता है। आमतौर पर विद्यार्थी यही पूर्वानुमान लगाएँगे कि दही अम्लीय होगा। फिर उनसे pH पेपर की मदद से अपने पूर्वानुमान की जाँच करने के लिए कहा जा सकता है। यदि pH पेपर सीमित मात्रा में हैं, तो pH पेपर के छोटे टुकड़े का इस्तेमाल करके दूध और दही के pH में फ़र्क़ को दिखाया जा सकता है। यह प्रयोग शिक्षक ख़ुद कर सकते हैं या दो विद्यार्थियों से कह सकते हैं कि वे पूरी कक्षा को करके दिखाएँ। अगर pH पेपर उपलब्ध नहीं है, तो विद्यार्थी इसके बजाय लाल गोभी या गुड़हल के अर्क जैसे श्रेणीबद्ध प्राकृतिक अम्ल–क्षार सूचक तैयार करके इस्तेमाल कर सकते हैं। यह गतिविधि प्राकृतिक सूचकों के एक और उपयोग को रेखांकित कर सकती है जिनके बारे में विद्यार्थियों ने कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-2 में पढ़ा है।5 विद्यार्थी आमतौर पर यही पाते हैं कि दही(~4.5–5.5), दूध (~6.5–6.7) की तुलना में ज़्यादा अम्लीय होता है।

यह गतिविधि इस बात की पुनरावृत्ति करती है कि वैज्ञानिक अवलोकन में केवल एक नहीं बल्कि ‘कई’ इन्द्रियाँ शामिल हो सकती हैं और इसे ‘सरल उपकरणों’ का उपयोग करके बेहतर बनाया जा सकता है। इसका उपयोग करके दही बनने के दौरान होने वाले परिवर्तनों के बारे में विद्यार्थियों की समझ को भी परखा जा सकता है। कक्षा-7 की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) का अध्याय-5 (‘हमारे आस-पास होने वाले परिवर्तन : भौतिक और रासायनिक’) विद्यार्थियों का ध्यान रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से जुड़े कई आम परिवर्तनों के उदाहरणों (जैसे पानी उबालना, सब्ज़ियाँ काटना आदि) की ओर खींचता है। इसके बाद उन्हें दो तरह के परिवर्तनों से परिचित कराया जाता है : “भौतिक परिवर्तन वह परिवर्तन होता है जिसमें किसी पदार्थ या वस्तु के केवल भौतिक गुणों में बदलाव होता है और कोई नया पदार्थ नहीं बनता है। रासायनिक परिवर्तन वह परिवर्तन होता है जिसमें एक-या-एक से ज़्यादा नए पदार्थ बनते हैं। इसमें रासायनिक अभिक्रिया होती है और इसे एक रासायनिक समीकरण से दर्शाया जा सकता है।”6 इसके बाद विद्यार्थियों से ऐसे प्रश्न पूछे जा सकते हैं :
- दूध का दही में बदलना भौतिक परिवर्तन है या रासायनिक परिवर्तन? या दोनों?
- क्या यह परिवर्तन स्थाई है या इसे वापस बदला जा सकता है? क्या दही को वापस दूध में बदला जा सकता है?
विद्यार्थियों को दूध और दही के बीच के अन्तर के अवलोकनों के आधार पर अपने जवाबों को सही ठहराने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
दूध, दही में कैसे बदलता है?
हम इस खोज-बीन की शुरुआत विद्यार्थियों से यह पूछकर कर सकते हैं कि दही कैसे बनाया जाता है। बहुत-से विद्यार्थी शायद यह जवाब देंगे कि दूध में एक चम्मच पुराना दही मिलाकर दही की ताज़ा खेप बनाई जाती है। आम धारणा और कुछ ऑनलाइन स्रोत यह भी बताते हैं कि पुराने दही के बिना भी नींबू के रस, चाँदी के सिक्के, या हरी/लाल मिर्च जैसी दूसरी चीज़ों का उपयोग करके ताज़ा दही जमाया जा सकता है (चित्र-2 देखें)। इस थीम पर एक छोटा-सा लेख या वीडियो विद्यार्थियों के साथ साझा किया जा सकता है।
इसके बाद विद्यार्थियों को 5-6 के समूहों में बाँटा जा सकता है और उन्हें ख़ुद करके देखने की एक आसान गतिविधि (गतिविधि शीट-2 देखें) के माध्यम से इस प्रश्न को समझने के लिए कहा जा सकता है। इस गतिविधि में 5-6 घण्टे लग सकते हैं, इसलिए इसे स्कूल के दिन की शुरुआत में प्रारम्भ करना सबसे अच्छा है, और अवलोकन दिन के आख़िरी कालखण्ड तक जारी रहेंगे। हर समूह अपने कुछ साथियों को यह काम दे सकता है कि वे तय समय पर जो भी बदलाव देखें, उन्हें लिखें। जब विद्यार्थी गतिविधि पूरी कर लें, तो प्रत्येक समूह को अपने निष्कर्ष कक्षा के साथ साझा करने के लिए कहा जा सकता है। आमतौर पर मिलने वाले परिणाम ये हैं : (क) दूध को यूँ ही छोड़ देने से दही नहीं बनता, (ख) पुराने दही को मिलाने पर ही नया दही बनता है, (ग) चाँदी का सिक्का दूध को दही में नहीं बदलता, और (घ) दूध में नींबू का रस डालने से दही नहीं, बल्कि पनीर बनता है।

विद्यार्थियों को अब इस बात पर विचार करने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है कि क्या दूध का ख़राब होना, पनीर बनना और दही बनना भौतिक परिवर्तन हैं या रासायनिक। उनसे यह भी पूछा जा सकता है : क्या इन प्रक्रियाओं में शामिल परिवर्तनों में कोई अन्तर है? विद्यार्थी ताजे दूध की अम्लता की तुलना ख़राब हुए दूध, पनीर और दही से करने के लिए pH पेपर का उपयोग कर सकते हैं। इससे वे स्वयं यह देख पाएँगे कि ये तीनों प्रक्रियाएँ अम्लता को बढ़ाती हैं। निर्देशित चर्चा विद्यार्थियों को यह समझने में मदद कर सकती है कि जहाँ इन तीनों प्रक्रियाओं में अपरिवर्तनीय रासायनिक परिवर्तन शामिल हैं, वहीं दूध का ख़राब होना और दही का बनना जैविक परिवर्तनों को दर्शाते हैं। शिक्षक यह समझा सकते हैं कि पनीर तब बनता है जब दूध में मौजूद अम्ल (जैसे नींबू का रस) दूध के प्रोटीन केसीन (Casein) को जमा देता है और उसे मट्ठे (whey) से अलग कर देता है। जबकि दही और ख़राब हुआ दूध जीवाणु किण्वन (bacterial fermentation) के कारण अम्लीय हो जाते हैं।
शिक्षक सवाल कर सकते हैं : पुराने दही में ऐसा क्या होता है जो दूध को दही की ताज़ी खेप में बदल देता है? क्या यह दूध में रासायनिक परिवर्तन लाता है या जैविक परिवर्तन? यहाँ विद्यार्थी कक्षा-8 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-2 के इस अंश से सम्बन्ध जोड़ सकते हैं : “…दही में कई प्रकार के बैक्टीरिया होते हैं। इनमें से एक लैक्टोबैसिलस है। यह बैक्टीरिया दूध में मौजूद शर्करा (लैक्टोज़) से भोजन प्राप्त करता है, गुणन करता है, और दूध को किण्वित करके दही बनाता है… ये बैक्टीरिया लैक्टिक अम्ल बनाते हैं जिससे दही खट्टा होता है।”2 शिक्षक समझा सकते हैं कि इन बैक्टीरिया को सामूहिक रूप से लैक्टिक अम्ल बैक्टीरिया (LAB—Lactic Acid Bacteria) कहा जाता है। यहाँ कुछ और सवाल दिए गए हैं जिन पर विद्यार्थियों को सोचने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है :
- जब हम पुराने दही का इस्तेमाल करके नया दही जमाते हैं, तब हम पुराने दही से कुछ जीवित लैक्टिक अम्ल बैक्टीरिया (Lactic Acid Bacteria – LAB) को ताज़े दूध में डालते हैं। सूक्ष्मजीवों का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक (microbiologists) पुराने दही को स्टार्टर कल्चर कहते हैं। ये जीवित लैक्टिक अम्ल बैक्टीरिया (LAB) दूध में बढ़ते हैं और दही बनाते हैं। हम जब दही खाते हैं, तब क्या हम जीवित बैक्टीरिया खा रहे होते हैं या मरे हुए?
- जीवित लैक्टिक अम्ल बैक्टीरिया खाना हमारे लिए स्वास्थ्यवर्धक है या नुक़सानदेह? रोज़मर्रा के अनुभव और घर पर सुनी बातों के आधार पर कई विद्यार्थी दही को स्वास्थ्यवर्धक खाना मानेंगे। कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-9 (‘जन्तुओं में जैव प्रक्रम’) में विद्यार्थी पढ़ते हैं कि “फ़ाइबर वाला खाना, और ख़ासकर ‘किण्वित खाना’ (जैसे दही, छाछ, श्रीखण्ड, कांजी, अचार, गुण्डरुक और पोइता भात) पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और पूरी सेहत के लिए फ़ायदेमन्द होते हैं।”7 शिक्षक विद्यार्थियों को कक्षा-8 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-2 के ‘खोजो, डिज़ाइन करो और चर्चा करो’ भाग में दी गई इस गतिविधि को करने के लिए भी प्रोत्साहित कर सकते हैं : “अपने माता-पिता और शिक्षकों की मदद से, अपने इलाक़े के कुछ पारम्परिक किण्वित खाने की चीज़ों की सूची बनाएँ। उन्हें बनाने में कौन-सी सामग्री लगती है; उन्हें कैसे तैयार किया जाता है; किण्वन के लिए कौन-सा सूक्ष्मजीव ज़िम्मेदार होता है, और किण्वित खाने का सांस्कृतिक व पोषण से जुड़ा महत्त्व क्या है।”2 विद्यार्थियों को कक्षा में अपने निष्कर्ष साझा करने देने से उन्हें किण्वन के रोज़मर्रा के इस्तेमाल को समझने में मदद मिल सकती है जो एक चयापचय (metabolic) प्रक्रिया है जिसमें यीस्ट और बैक्टीरिया जैसे सूक्ष्मजीव शर्करा को शराब, गैस या अम्लों में बदलते हैं।
इसी तरह, शिक्षक विद्यार्थियों से ये सवाल भी कर सकते हैं कि दूध ऐसे ही छोड़ देने पर ख़राब क्यों हो जाता है। यह बहुत सम्भव है कि कुछ विद्यार्थी इस सवाल को कक्षा-8 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-2 के इस वाक्य से जोड़ें : “क्या आपने कभी देखा है… कोई खाने की चीज़ कुछ देर बाहर रखने पर सड़ जाती है?… ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वह सूक्ष्मजीवों से संक्रमित हो जाती हैं।”2 शिक्षक यह बता सकते हैं कि दूध का ख़राब होना भी बैक्टीरिया के कारण होता है। और आगे इसके बाद पाठ्यपुस्तक के उसी अध्याय से यह सवाल पूछ सकते हैं : “लेकिन ये सूक्ष्मजीव आए कहाँ से? और खाने के सम्पर्क में कैसे आए?”2 इन सभी सवालों के जवाबों से विद्यार्थियों का ध्यान इस बात पर लाया जा सकता है कि “…सूक्ष्मजीव सर्वत्र पाए जा सकते हैं, चाहे वह पानी, मिट्टी, हवा या कुछ खाने की चीज़ों में ही क्यों न हों।”2 नीचे कुछ सवाल दिए गए हैं जिनके बारे में विद्यार्थियों को सोचने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है :
- क्या स्वाद के अलावा दूसरी इन्द्रियों से दूध ख़राब होने का पता लगाया जा सकता है? यह बात क्यों महत्त्वपूर्ण है कि भोजन या पानी ख़राब है या नहीं यह पता लगाने के लिए स्वाद की इन्द्रिय का उपयोग नहीं किया जाए? कक्षा-8 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-3 (‘स्वास्थ्य : एक अमूल्य निधि’) में बताया गया है कि “…दूषित भोजन या पानी” से बीमारियाँ हो सकती हैं।8 तो ख़राब दूध के बारे में क्या? ऐसा दूध पीने से हम पर क्या असर पड़ सकता है?
- कक्षा-8 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-2 में विद्यार्थी सीखते हैं कि अचार और मुरब्बा जल्दी ख़राब नहीं होते क्योंकि इनमें नमक या चीनी की सान्द्रता (मात्रा) अधिक होती है, जो सूक्ष्मजीवों को बढ़ने से रोकती है।2 कक्षा-8 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-3 में बताया गया है कि संक्रमण से बचने के लिए कुछ सरल सावधानियाँ ज़रूरी होती हैं, जैसे “ख़ुद को और अपने आस-पास को साफ़ रखना”, “बीमारी पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों को हटाने के लिए साबुन और पानी से हाथ धोना”, पीने से पहले पानी को “उबालना”।8 क्या इसी तरह की सावधानियाँ दूध को ख़राब होने से रोक सकेंगी?
- दूध जल्दी ख़राब हो जाता है, लेकिन जब उसे दही में बदल दिया जाता है, तो वह ज़्यादा समय तक खाने योग्य रहता है। क्या इसका पुराने दही में मौजूद लैक्टोबैसिलस से कोई सम्बन्ध है? क्या किण्वन को भोजन को सुरक्षित रखने की एक प्रक्रिया माना जा सकता है?
शिक्षक इस चर्चा के ज़रिए यह समझा सकते हैं कि पनीर बनना केवल एक रासायनिक बदलाव है, जबकि दही बनने और दूध ख़राब होने में रासायनिक और जैविक, दोनों तरह के बदलाव शामिल होते हैं। वे कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025) के अध्याय-5 का यह सवाल भी पूछ सकते हैं : क्या सभी बदलाव वांछनीय होते हैं? उसी अध्याय में, विद्यार्थी पढ़ते हैं : “हमारी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में अनेक उपयोगी बदलाव होते हैं। उदाहरण के लिए, दूध का दही में बदलना, फलों का पकना, फलों को काटना और खाना पकाना। ये सभी बदलाव वांछनीय हैं… दूसरी तरफ़, लोहे में ज़ंग लगने या खाने का भण्डारण करने पर उसका ख़राब होने जैसे कुछ बदलाव अवांछनीय हो सकते हैं।”6
चलते-चलते
शालेय शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ़-एसई) 2023 इस बात पर ज़ोर देती है कि स्कूली शिक्षा से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जाँच-पड़ताल की क्षमता विकसित करने में मदद मिलनी चाहिए। दूध से दही बनने की जाँच द्वारा शिक्षक विद्यार्थियों को वैज्ञानिक प्रक्रिया से एक सरल, कम ख़र्च वाले और रोज़मर्रा के लिए प्रासंगिक माध्यम से परिचित करा सकते हैं। इससे विद्यार्थियों को अम्ल-क्षार, भौतिक और रासायनिक परिवर्तन, तथा सूक्ष्मजीवों के बारे में मिडिल स्टेज की विज्ञान की अवधारणाओं को अपने दैनिक जीवन से जोड़ने में मदद मिलती है। ऐसी खोज-बीन विद्यार्थियों को “…अपने आस-पास की दुनिया को और गहराई से समझने, चर्चा और प्रयोग के माध्यम से विभिन्न स्तरों पर वैज्ञानिक प्रश्नों पर खोज-बीन करने, तथा इस समझ को अलग-अलग तरीक़ों से सम्प्रेषित करना सिखाती है।”1
मुख्य बिन्दु
- भारत के बहुत-से घरों में दही जमाना जाना-माना रोज़मर्रा का काम है। इस रोज़मर्रा की प्रक्रिया पर कक्षा में शिक्षक विद्यार्थियों को आसान, सुलभ और कम ख़र्च द्वारा वैज्ञानिक जाँच से परिचित करवा सकते हैं।
- दूध और दही का ध्यान से अवलोकन करने और उनके बीच अन्तरों को लिखने के लिए प्रोत्साहित करने से विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिलती है कि वैज्ञानिक जाँच में किस प्रकार कई इन्द्रियों और काँच की स्लाइड, pH पेपर या श्रेणीबद्ध प्राकृतिक सूचक जैसे सरल उपकरणों का इस्तेमाल होता है।
- ख़ुद से करके देखने पर यह जाँच, कि नया दही जमाने के लिए पुराने दही की ज़रूरत होती है या नहीं, विद्यार्थियों को भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों के बारे में विचारों को और साथ ही सूक्ष्मजीवों की लाभकारी और हानिकारक भूमिकाओं को अपने रोज़मर्रा के जीवन की स्थितियों से जोड़ने में सक्षम बनाती है।
आभार
यह लेख और इससे सम्बन्धित कक्षा संसाधन पहली बार आई वंडर…पत्रिका में अगस्त 2019, में प्रकाशित हुए थे। ये आगे दी गई लिंक पर उपलब्ध हैं : https://anuvadasampada.azimpremjiuniversity.edu.in/5278/ । मूल लेख को चित्रा रवि ने संशोधित कर उसमें कुछ नई सामग्री शामिल कर मिडिल स्टेज विज्ञान के अध्यायों और अवधारणाओं को कक्षाओं में पढ़ाने से सीधा सम्बन्ध जोड़ा है। संसाधनों के मूलपाठ को भी विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक की अवधारणाओं के बारे में आलोचनात्मक रूप से सोचने के लिए प्रोत्साहित करने वाले प्रश्नों को जोड़कर संशोधित किया है। आई वंडर… टीम मूलपाठ के संशोधित संस्करणों को प्रकाशित करने की अनुमति देने के लिए लेखिका को धन्यवाद देती है।
टिप्पणियाँ
- Credits for the image (Preparing curd) used in the background of the article title: Created for i wonder… using ChatGPT, under prompting by Chitra Ravi (Dec 2025). License: CC BY-NC-ND 4.0.
- इस लेख के साथ अलग किए जा सकने वाले दो कक्षा संसाधन हैं : गतिविधि शीट-1 : दूध, दही से कैसे अलग है? और गतिविधि शीट-2 : किन कारणों से दूध, दही में बदल जाता है?
- ताज़ा दूध लगभग उदासीन होता है (pH ~6.5–6.7) और दही हल्का अम्लीय होता है (pH ~4.5–5.0)। लिटमस पेपर और कुछ सरल प्राकृतिक सूचक (जैसे हल्दी की जड़ का अर्क) इन दोनों द्रवों के बीच अम्लता के मामूली अन्तर को विश्वसनीय रूप से नहीं दिखा सकते हैं। कुछ श्रेणीबद्ध प्राकृतिक सूचक, जैसे लाल गोभी या गुड़हल के अर्क, यह दिखा सकते हैं कि दही दूध की तुलना में अधिक अम्लीय है। लेकिन यह अन्तर अकसर सूक्ष्म हो सकता है और सूचक की सघनता, ताजगी तथा प्रकाश की स्थिति के आधार पर इसे पहचानना कठिन हो सकता है। pH पेपर, अपने श्रेणीबद्ध रंग पैमाने (graded colour scale) के साथ, यह दिखाने के लिए सबसे विश्वसनीय कक्षा उपकरण है कि दही, दूध की तुलना में अधिक अम्लीय है।
- लेख के हिन्दी अनुवाद की समीक्षा के लिए हम हृदय कान्त दीवान के आभारी हैं।
सन्दर्भ
- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (2025)। ‘अध्याय-1 : विज्ञान के अन्वेषी संसार की खोज यात्रा’।जिज्ञासा, कक्षा-8 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक : 1-7. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?hecu1=1-13.
- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (2025)। ‘अध्याय-2 : अदृश्य जीव-जगत हमारी आँखों की क्षमता से परे’। जिज्ञासा, कक्षा-8 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक : 8-27. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?hecu1=2-13.
- National Steering Committee for National Curriculum Frameworks (2023). ‘National Curriculum Framework for School Education 2023’. National Council of Educational Research and Training. URL: https://ncert.nic.in/pdf/NCFSE-2023-August_2023.pdf.
- National Council of Educational Research and Training (2017). ‘Learning Outcomes at the Elementary Stage’. National Council of Educational Research and Training. URL: https://एनसीईआरटी.nic.in/pdf/publication/otherpublications/tilops101.pdf.
- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (2025)। ‘अध्याय-2 : पदार्थों का अन्वेषण : अम्लीय, क्षारीय एवं उदासीन’। जिज्ञासा, कक्षा-7 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक : 7-22. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?ghcu1=2-12.
- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (2025)। ‘अध्याय-5 : हमारे आस-पास के परिवर्तन : भौतिक एवं रासायनिक’। जिज्ञासा, कक्षा-7 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक : 57-72. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?ghcu1=5-12.
- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (2025)। ‘अध्याय-9 : जन्तुओं में जैव प्रक्रम’। जिज्ञासा, कक्षा-7 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक : 121-136. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?ghcu1=9-12.
- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (2025)। ‘अध्याय-3 : स्वास्थ्य : एक अमूल्य निधि’। जिज्ञासा, कक्षा-8 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक : 28-35. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?hhcu1=3-13.