क्या फूले हुए गुब्बारे में भरी हवा उसका भार बढ़ाती है?

कक्षा-8 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025-2026) के अध्याय-7 (‘Particulate Nature of Matter’) के शुरुआती ‘जाँच और विचार’ खण्ड में यह सवाल पूछा गया है : ‘‘हम हवा को देख तो नहीं सकते, फिर यह एक फूले हुए गुब्बारे का वज़न कैसे बढ़ा देती है?’’1
यह सवाल विद्यार्थियों को विज्ञान की कुछ महत्त्वपूर्ण अवधारणाएँ जो वे विभिन्न कक्षाओं में सीखते हैं, को एक साथ लाने का मौक़ा देता है। उदाहरण के लिए, कक्षा-3 की पर्यावरण अध्ययन (ईवीएस) की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025-2026) के अध्याय 10 (‘वस्तुओं की दुनिया’) में, विद्यार्थी सीखते हैं कि : ‘‘…वस्तुओं को ठोस, तरल और गैसों के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।’’2 वे यह भी सीखते हैं कि : ‘‘हवा एक कप में नहीं रुकती है; यह सिर्फ़ अन्दर और बाहर आती-जाती रहती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हवा एक गैस है।’’2 कक्षा-8 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक के अध्याय-7 में, विद्यार्थी सीखते हैं कि पदार्थ तीन अवस्थाओं में पाया जाता है : ठोस, द्रव और गैस।1 इससे पता चलता है कि हवा पदार्थ है। कक्षा-6 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (पुनर्मुद्रण 2024-2025) के अध्याय-6 (‘हमारे आस-पास की सामग्री’) में, विद्यार्थी सीखते हैं कि : ‘‘ कोई भी वस्तु जो स्थान घेरती है और द्रव्यमान रखती है उसे ‘द्रव्य’ कहते हैं।’’3 इससे संकेत मिलता है कि हवा का भी द्रव्यमान होता है। फिर भी, यह बात कि हवा ‘द्रव्यमानहीन’ है, विद्यार्थियों में फैली एक व्यापक ग़लत धारणा है।4 कक्षा-8 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक के अध्याय-7 में, विद्यार्थी यह भी सीखते हैं कि : ‘‘… पदार्थ बहुत सारे अत्यन्त सूक्ष्म कणों से मिलकर बने होते हैं। ये कण इतने छोटे होते हैं कि इन्हें साधारण सूक्ष्मदर्शी से भी नहीं देखा जा सकता।’’1 हालाँकि विद्यार्थी पदार्थ की कणिकीय प्रकृति को ठोस और द्रव/तरल पदार्थों से जोड़ पाते हैं, लेकिन हवा के बारे में उसी तरह सोच पाना उन्हें मुश्किल लगता है। इसलिए वे उबलते पानी से उठती भाप को एक ग्राम पानी की द्रव्यमानहीन वाष्प में बदलने के रूप में समझ सकते हैं!
विद्यार्थी इस ग़लत धारणा पर कैसे पहुँचते हैं कि हवा द्रव्यमानहीन है? हम अकसर द्रव्य के बारे में सिर्फ़ मानवीय इन्द्रियों और उनकी क्षमताओं के सन्दर्भ में ही सोचते हैं। उदाहरण के लिए, हम अपनी आँखों से उसके कितने हिस्से को देख सकते हैं? अगर हम उसे अपने हाथों में पकड़ें तो क्या उसका भार महसूस कर सकते हैं? इसलिए विद्यार्थी पंख या आँख की पलक जितनी हल्की चीज़ को भी द्रव्य से बना मान सकते हैं। लेकिन उन्हें हवा जैसी अदृश्य या पारदर्शी चीज़ को द्रव्य मानना चुनौतीपूर्ण लग सकता है। ख़ासकर इसलिए क्योंकि वे उसके भार का अनुभव ही नहीं कर पाते। अगर उन्हें बताया जाए कि हवा का द्रव्यमान तो होता है, इस पर विद्यार्थी पूछते हैं कि क्या इसे मापा जा सकता है और इसका सटीक मान क्या है। कुछ मामलों में, विद्यार्थी यह दिलचस्प तर्क देते हैं कि ‘‘हवा का द्रव्यमान मापा नहीं जा सकता क्योंकि हवा नीचे की ओर नहीं धकेलती, बल्कि ऊपर उठती है।’’ और आगे पूछने पर, विद्यार्थी यह अवलोकन साझा करते हैं कि पार्टी में उपयोग किए जाने वाले गुब्बारे सिर्फ़ हवा (हीलियम) से फुलाए जाने पर ही हवा में उठते हैं। यहाँ फिर से विद्यार्थी भार (और इसलिए, द्रव्यमान) की अवधारणा को सिर्फ़ उन वस्तुओं से जोड़ रहे हैं जो ख़ुद से ऊपर नहीं उड़ सकतीं या जिनका इस्तेमाल फूले हुए गुब्बारे को हवा में उठ जाने से रोकने के लिए किया जा सकता है।
यह प्रदर्शित करना कि हवा में द्रव्यमान होता है
कक्षा-6 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक का अध्याय-6 एक गतिविधि (गतिविधि 6.8 : आइए मापें) के विचार के ज़रिए द्रव्यमान की अवधारणा से परिचय की शुरुआत करता है। विद्यार्थियों को तीन समान कप लेकर उन्हें क्रमशः पानी, रेत और कंकड़ से भरने के लिए कहा जाता है। उन्हें यह अनुमान लगाने के लिए कहा जाता है कि इनमें से कौन-सा भारी होगा और कौन-सा हल्का। फिर, उन्हें तीनों कपों को एक तराज़ू पर तौलकर अपने अनुमान की जाँच करने के लिए कहा जाता है। यह गतिविधि निम्नलिखित शब्दों के साथ समाप्त होती है: ‘‘…हम कह सकते हैं कि कोई भी वस्तु जो भारी या हल्की है, उसे द्रव्यमान नामक गुण के आधार पर मापा जा सकता है। जो भारी है उसका द्रव्यमान ज़्यादा है, और जो हल्की है उसका द्रव्यमान कम है।’’3
इसी तरह की एक और गतिविधि का इस्तेमाल विद्यार्थियों को यह बताने के लिए किया जा सकता है कि हवा का भी द्रव्यमान होता है (गतिविधि शीट देखें)। इस गतिविधि में, लगभग एक जैसे दो गुब्बारों को समान साइज़ में फुलाया जाता है। फिर प्रत्येक गुब्बारे को एक लम्बी छड़ी (जैसे एक मीटर स्केल) के अलग-अलग सिरों पर बाँध दिया जाता है। छड़ी के बीचों-बीच बँधी एक डोरी के ज़रिए उसे दीवार पर लगे हुक या दरवाज़े के हैंडल से इस तरह लटकाया जाता है कि वह स्वतंत्र रूप से लटकी रहे। छड़ी पर डोरी की स्थिति को सावधानीपूर्वक समायोजित किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि छड़ी सन्तुलित रहे (ज़मीन के समानान्तर)। फिर, एक गुब्बारे की हवा निकालने के लिए पिन का इस्तेमाल किया जाता है। गुब्बारे को फटने से बचाने के लिए, पिन को धीरे से गुब्बारे के मुँह के पास से डाला जाता है। जब गुब्बारा पूरी तरह से पिचक जाता है और छड़ी फिर से स्थिर हो जाती है, तो छड़ी फूले हुए गुब्बारे के सिरे की ओर थोड़ी झुकी हुई दिखाई देती है (चित्र-1 देखें)।

चूँकि बीम तराजू (बीम बैलेंस) विद्यार्थियों के दैनिक जीवन में आम है, इसलिए वे अकसर इस व्यवस्था को एक बीम बैलेंस से जोड़कर देखते हैं। जब उनसे पूछा जाता है कि छड़ी फूले हुए गुब्बारे के सिरे की ओर क्यों झुकी हुई है, तो वे यह निष्कर्ष निकालते हैं कि फूला हुआ गुब्बारा पिचके हुए गुब्बारे से भारी है। विद्यार्थी जानते हैं कि दोनों गुब्बारे एक ही पदार्थ से बने हैं और लगभग समान आकार के हैं। इसलिए अगर उनसे पूछा जाए, ‘‘फूला हुआ गुब्बारा भारी क्यों है?’’ तो उनमें से अधिकांश इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि दोनों गुब्बारों के भार में अन्तर फूले हुए गुब्बारे में भरी हवा के द्रव्यमान के कारण है। विद्यार्थियों को पिन के द्वारा दूसरे गुब्बारे को भी पिचकाकर इस निष्कर्ष का परीक्षण करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। छड़ी को ज़मीन के समानान्तर वापस आते हुए देखने से विद्यार्थियों को यह पुष्टि करने में मदद मिल सकती है कि पिछले चरण में भार में देखा गया अन्तर फूले हुए गुब्बारे में भरी हवा के कारण था।
बॉक्स-1 : क्या फूले हुए गुब्बारे का आभासी भार उसके वास्तविक भार से भिन्न है?
इस गतिविधि में, दो गुब्बारों की तरह, किन्हीं दो वस्तुओं के भार की तुलना करते समय, हम उनके द्रव्यमानों पर लगने वाले बल की तुलना कर रहे हैं। इनमें से एक बल गुरुत्वाकर्षण है। दूसरा बल हवा द्वारा लगाया जाता है। मनुष्यों सहित, ज़मीन पर मौजूद सभी वस्तुएँ वायुमण्डलीय हवा में डूबी रहती हैं। अन्य तरल पदार्थों की तरह, हवा भी उसमें डूबी वस्तुओं पर ऊपर की ओर बल लगाती है। कक्षा-8 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025-2026) के अध्याय-5 (‘Exploring Forces’) में, विद्यार्थी सीखते हैं कि : ‘‘किसी द्रव द्वारा किसी वस्तु पर ऊपर की दिशा में लगाया गया बल उत्प्लावन बल कहलाता है।”5 इस उत्प्लावन बल का परिमाण वस्तु द्वारा विस्थापित की गई हवा के आयतन के भार के बराबर होता है। दूसरे शब्दों में,
- हवा में डूबी वस्तु पर लगने वाला उत्प्लावन बल = वस्तु द्वारा विस्थापित की गई हवा के आयतन का भार।
- हवा में डूबी वस्तु का आभासी भार = वस्तु का वास्तविक भार – वस्तु द्वारा विस्थापित की गई हवा के आयतन का भार।
इस गतिविधि को प्रभावित करने वाले कारक
फूले हुए गुब्बारे में मौजूद हवा उसे पिचके हुए गुब्बारे से ज़्यादा वज़न देती है। लेकिन इसका मतलब यह भी है कि फूला हुआ गुब्बारा पिचके हुए गुब्बारे से ज़्यादा जगह घेरता है। इसलिए, यह पिचके हुए गुब्बारे की तुलना में आस-पास की हवा को ज़्यादा विस्थापित करता है। इस कारण, विद्यार्थी फूले हुए और पिचके हुए गुब्बारे के बीच वज़न में जो अन्तर देख सकते हैं (~आभासी वज़न) उसके बहुत कम होने की सम्भावना है (बॉक्स-1 देखें)। ऐसे कौन-से कारक हैं जो हमें इस अन्तर को और स्पष्ट रूप से देखने में मदद कर सकते हैं?
- फूले हुए गुब्बारे के अन्दर हवा का घनत्व : कक्षा-8 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025-2026) के अध्याय-9 (‘The Amazing World of Solutes, Solvents, and Solutions’) में, विद्यार्थी सीखते हैं कि ‘‘एक लकड़ी की छड़ी और एक लोहे की छड़ एक ही साइज़ की हों तो भी लोहे की छड़ बहुत भारी लगती है। जब हम कहते हैं कि लोहा लकड़ी से भारी है, तो हम घनत्व नामक एक विशेष गुण की बात कर रहे होते हैं, जो किसी वस्तु के भारीपन को बताता है…। घनत्व को [किसी] पदार्थ के एक इकाई आयतन में मौजूद द्रव्यमान के रूप में परिभाषित किया जाता है।”6 जब हम एक गुब्बारे में हवा को ‘धकेलने/भरने’ के लिए एक एयर पम्प का उपयोग करते हैं, तो इसके अन्दर की हवा बाहर की हवा से ज़्यादा सघन हो जाती है। दूसरे शब्दों में, गुब्बारे के अन्दर हवा के कण, बाहर उतने ही आयतन में हवा के कणों की तुलना में ‘ज़्यादा’ होते हैं। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि फूले हुए गुब्बारे के अन्दर भरी हवा का भार उसके द्वारा विस्थापित हवा के भार से ज़्यादा है। इसलिए, फूले हुए और पिचके हुए गुब्बारों के भार में अन्तर ज़्यादा दिखाई दे सकता है। अगर हम गुब्बारों को अपने मुँह से हवा भरकर फुलाएँ तो क्या होगा? एयर पम्प से फुलाए गए गुब्बारे में हवा का संघटन (composition) उस हवा के समान होता है जिसे हम साँस के साथ अन्दर लेते हैं। लेकिन मुँह से फूले हुए गुब्बारे में हवा का संघटन उस हवा के समान होता है जिसे हम साँस के साथ बाहर छोड़ते हैं। चूँकि विद्यार्थी कक्षा-7 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (NCERT, 2025-2026) के अध्याय-9 (‘जन्तुओं में जैव प्रक्रम’) में ‘मनुष्यों में श्वसन’ के बारे में पढ़ते हैं, तो हम उनके साथ यह तथ्य साझा कर सकते हैं कि साँस के साथ बाहर छोड़ी गई हवा में साँस के साथ अन्दर ली गई हवा की तुलना में कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प ज़्यादा और ऑक्सीजन कम होती है।8,9 हम विद्यार्थियों को यह भी बता सकते हैं कि ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड से हल्की और जलवाष्प से भारी होती है। साँस के साथ बाहर छोड़ी गई हवा का संघटन, फूले हुए और पिचके हुए गुब्बारे के भार के अन्तर को कैसे प्रभावित करेगा? क्या यह अन्तर अभी भी हमें स्पष्ट रूप से दिखाई देगा? विद्यार्थियों को पूर्वानुमान लगाने और इसका परीक्षण करने के लिए कहना उपयोगी हो सकता है। वे इस विधि के परिणामों की तुलना एयर पम्प से फुलाए गए गुब्बारों का उपयोग करके प्राप्त परिणामों से भी कर सकते हैं।
- बीम तराजू की संवेदनशीलता : इस गतिविधि में हम जिस बीम तराजू का इस्तेमाल करते हैं, वह एक मीटर लम्बी छड़ी और डोरी के एक टुकड़े से बनी होती है। इसमें वैसी मज़बूती और स्थिरता नहीं होती जिसको विद्यार्थी उन तराजूओं के आम उदाहरणों (जैसे फलों और सब्ज़ियों को तौलने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तराजू) से जोड़ सकें, जिन्हें वे अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में देखते हैं। लेकिन इसकी संवेदनशीलता उल्लेखनीय होती है जो दो गुब्बारों के बीच वज़न में छोटे-से अन्तर का भी पता लगा लेती है। हमारे अवलोकन के आधार पर लगता है कि एक मीटर से छोटी छड़ी तराजू की संवेदनशीलता को कम कर सकती है। विद्यार्थियों को गतिविधि शीट में सुझाई गई तराजू के उपयोग के परिणामों की तुलना पारम्परिक तराजू से करने के लिए कहना उपयोगी हो सकता है। वे यह प्रयोग भी करके देख सकते हैं कि छड़ी की लम्बाई (या छड़ी या छड़ी से गुब्बारों को लटकाने वाली डोरी की लम्बाई) को कम करने या बढ़ाने से दोनों गुब्बारों के बीच वज़न में अन्तर देखने की उनकी क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ता है।
बॉक्स-2 : पाठ्यक्रम से सम्बन्ध
यह गतिविधि और इसके इर्द-गिर्द होने वाली चर्चाएँ, मिडिल स्टेज की विज्ञान के लिए एनसीएफ़-एसई (2023) में उल्लेखित निम्नलिखित पाठ्यक्रम लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकती हैं :
- CG-1 : [विद्यार्थी] पदार्थ की दुनिया और उसके घटकों, गुणों व व्यवहार पर खोज-बीन करते हैं। ख़ासतौर से, ये विद्यार्थियों को निम्नलिखित योग्यताएँ विकसित करने में मदद कर सकते हैं :
- (C-1.1) : ‘‘पदार्थ को सुस्पष्ट/प्रत्यक्ष भौतिक (ठोस, द्रव, गैस…) और रासायनिक गुणों के आधार पर वर्गीकृत करना।’’
- (C-1.2) : ‘‘पदार्थ में होने वाले (भौतिक और रासायनिक) परिवर्तनों की व्याख्या करना और पदार्थ की कणिकीय प्रकृति का उपयोग करके उसके गुणों व परिवर्तनों को दर्शाना…।’’
- CG-6 : [विद्यार्थी] वैज्ञानिक ज्ञान के विकास से अन्त:क्रिया करके और वैज्ञानिक जाँच-पड़ताल करके विज्ञान की प्रकृति और प्रक्रियाओं पर खोज-बीन करते हैं। ख़ासतौर से, वे विद्यार्थियों को निम्नलिखित योग्यताएँ विकसित करने में मदद कर सकते हैं (C-6.2) : ‘‘वैज्ञानिक शब्दावली का उपयोग करके सवाल तैयार करना (किसी घटना, पैटर्न या वस्तुओं के व्यवहार के सम्भावित कारणों की पहचान करने के लिए) और साक्ष्य/सबूत के बतौर डेटा एकत्र करना (प्राकृतिक वातावरण के अवलोकन, सरल प्रयोगों की डिज़ाइन, या सरल वैज्ञानिक उपकरणों के उपयोग के ज़रिए)।’’
- CG-7 : [विद्यार्थी] विज्ञान से सम्बन्धित सवालों, अवलोकनों और निष्कर्षों को सम्प्रेषित करते हैं। ख़ासतौर से, वे विद्यार्थियों को निम्नलिखित योग्यताएँ विकसित करने में मदद कर सकते हैं (C-7.1): ‘‘मौखिक और लिखित रूप में, और तस्वीरों द्वारा वर्णन के ज़रिए विज्ञान को सटीक रूप से सम्प्रेषित करने के लिए वैज्ञानिक शब्दावली का उपयोग करना।’’7
चलते-चलते
वास्तविक दुनिया में हवा के गुणों के कई अवलोकन और अनुभव विद्यार्थियों को यह विश्वास दिला सकते हैं कि यह द्रव्यमानहीन है। यदि छुटपन में ही इस पर बात नहीं की गई, तो यह ग़लत धारणा बड़े होने और यहाँ तक कि वयस्कता तक बनी रह सकती है। यह सरल गतिविधि, जिसे विद्यार्थी ख़ुद से कर सकते हैं, इस बात का ठोस दृश्य प्रमाण प्रदान करती है कि हवा अपने द्रव्यमान के ज़रिए एक फूले हुए गुब्बारे के भार में योगदान देती है। यह विद्यार्थियों को हवा की कणिकीय प्रकृति को समझने में आने वाली चुनौती को भी कम कर सकती है (बॉक्स-2 देखें)।
गतिविधि को तैयार करने के लिए सस्ती और रोज़मर्रा की वस्तुओं (जैसे गुब्बारे, छड़ियाँ और डोरी) का उपयोग विद्यार्थियों को अधिक संसाधन सम्पन्न बनाने में मदद कर सकता है और उन्हें इन सामग्रियों को नए और रचनात्मक तरीक़ों से इस्तेमाल करने की आज़ादी दे सकता है। उदाहरण के लिए, अपनी रोज़मर्रा की दुनिया में, विद्यार्थी मानक द्रव्यमान की मदद से वस्तुओं के निरपेक्ष द्रव्यमान को मापने के लिए बीम तराजूओं के उपयोग से परिचित होते हैं। हालाँकि, इस गतिविधि में विद्यार्थी ख़ुद जो मॉडल बनाते हैं, वह उन्हें सिर्फ़ एक फूले हुए गुब्बारे के द्रव्यमान की तुलना एक पिचके हुए गुब्बारे के द्रव्यमान से करने देता है। दूसरी ओर, विद्यार्थी अकसर इस मॉडल की संवेदनशीलता से चकित होते हैं जिससे यह मॉडल भार में छोटे-से अन्तर का भी पता लगा सकता है। विद्यार्थियों को गतिविधि के सेटअप में विविधता लाने के लिए कहने से (जैसे गुब्बारे फुलाने के अलग-अलग तरीक़े या अलग-अलग लम्बाई की छड़ियों का इस्तेमाल) उन्हें उनके पूर्वानुमान, अवलोकन और प्रयोग कौशल विकसित करने में मदद मिल सकती है। ये सभी महत्त्वपूर्ण विज्ञान कौशल हैं।
मुख्य बिन्दु
- मिडिल स्टेज का विज्ञान पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को द्रव्य की कणिकीय प्रकृति, उसकी विभिन्न अवस्थाओं और उसके गुणों से परिचित कराता है। फिर भी, विद्यार्थी अकसर इन अवधारणाओं को हवा से जोड़कर देखने में कठिनाई महसूस करते हैं।
- यह विचार कि हवा द्रव्यमानहीन होती है, विद्यार्थियों में फैली एक व्यापक ग़लत धारणा है। दो गुब्बारे, एक मीटर लम्बी छड़ी और कुछ डोरी जैसी सस्ती रोज़मर्रा की वस्तुओं के साथ एक सरल गतिविधि इस बात का दृश्य प्रमाण प्रदान कर सकती है कि हवा में द्रव्यमान होता है।
- विद्यार्थियों को उन कारकों की पहचान करने और उनके साथ प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना जो उन्हें फूले हुए और पिचके हुए गुब्बारे के भार में अन्तर देखने में मदद करते हैं, उन्हें सम्बन्धित अवधारणाओं से और अधिक परिचित होने और महत्त्वपूर्ण विज्ञान कौशल का अभ्यास करने में मदद कर सकता है।
टिप्पणियाँ
- Credits for the image (Balloon Floating in the Sky) used in the background of the article title: PickPik. URL: https://www.pickpik.com/balloon- sky-blue-green-fly-helium-70975. License: Royalty Free.
- लेख में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा प्रकाशित कक्षा-6 एवं 7 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक ‘जिज्ञासा’ तथा कक्षा-3 की पर्यावरण अध्ययन पाठ्यपुस्तक ‘हमारा अद्भुत संसार’ के विभिन्न अध्यायों से उद्धरण साभार लिए गए हैं और उन्हें हिन्दी में अनूदित किया गया है।
- इस लेख में एक कक्षा संसाधन दिया गया है जिसे पत्रिका से अलग किया जा सकता है : गतिविधि शीट : क्या हवा का द्रव्यमान होता है?
- लेख के हिन्दी अनुवाद की समीक्षा करने के लिए हम हृदय कान्त दीवान के आभारी हैं।
सन्दर्भ
- National Council of Educational Research and Training (2025-2026). ‘Chapter 7: Particulate Nature of Matter’. Curiosity, Textbook of Science for Grade VIII: 98-115. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?hecu1=7-13.
- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान और प्रशिक्षण परिषद (2025-2026)। ‘अध्याय-10 : वस्तुओं की दुनिया’। हमारा अद्भुत संसार,कक्षा-3 की पर्यावरण विज्ञान पाठ्यपुस्तक : 123-134. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?ceev1=10-12.
- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान और प्रशिक्षण परिषद (पुनर्मुद्रण 2025-2026)। ‘अध्याय-6 : हमारे आस-पास की सामग्री’। जिज्ञासा, कक्षा-6 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक : 99-118. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?fecu1=6-12.
- M, Ramesh, Victor SR & Nagaraju MTV (2020). ‘Misconceptions in Certain Science Concepts Among Tribal Students’. Shodh Sanchar Bulletin. 10: 24-28. URL: https://www.researchgate.net/publication/350007120_MISCONCEPTIONS_IN_CERTAIN_SCIENCE_CONCEPTS_AMONG_ TRIBAL_STUDENTS.
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- National Steering Committee for National Curriculum Frameworks (2023). ‘National Curriculum Framework for School Education 2023’. National Council of Educational Research and Training. URL: https://ncert.nic.in/pdf/NCFSE-2023-August_2023.pdf.
- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान और प्रशिक्षण परिषद (2025-2026)। ‘अध्याय-9 : जन्तुओं में जैव प्रक्रम’। जिज्ञासा, कक्षा-7 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक : 121-136. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?gecu1=9-12.
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