प्राकृतिक सूचकों से अम्ल और क्षार की जाँच-पड़ताल

कक्षा-7 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक (एनसीआरटी, 2024-2025) का अध्याय-4 ( अम्ल, क्षार और लवण) अम्ल और क्षार से विद्यार्थियों का परिचय उनके स्वाद के माध्यम से कराता है। फिर वह उन्हें अज्ञात पदार्थों को न चखने की चेतावनी देते हुए प्रश्न पूछता है : “अगर हम हरेक पदार्थ को चख नहीं सकते तो हम उनकी प्रकृति को कैसे पहचानेंगे?”1 इस प्रकार विद्यार्थियों का परिचय सूचकों से करवाया जाता है, जिन्हें इस प्रकार परिभाषित किया गया है : “विशेष प्रकार के पदार्थ जिनका उपयोग यह जानने के लिए किया जाता है कि कोई पदार्थ अम्लीय है या क्षारीय — किसी अम्लीय या क्षारीय पदार्थ के घोल में मिलाए जाने पर सूचक अपना रंग बदलते हैं।”1 प्रयोगशालाओं में उपयोग किए जाने वाले कुछ प्रचलित सूचकों में मिथाइल ऑरेंज, ब्रोमोफ़ेनॉल ब्लू, मिथाइल रेड, ब्रोमोक्रेसॉल ग्रीन, लिटमस और यूनिवर्सल इंडिकेटर पेपर शामिल हैं। हो सकता है कि कई स्कूलों में ये उपलब्ध न हों। अगर हुए भी तो वे इतने महँगे और इतनी कम मात्रा में होते हैं कि उनका उपयोग केवल शिक्षक द्वारा कुछेक पदार्थों के साथ प्रदर्शन के लिए किया जा सकता है। यह भी सम्भव है कि कुछ शालाओं में विज्ञान में औपचरिक रूप से प्रशिक्षित शिक्षक न हों और अप्रशिक्षित शिक्षक पढ़ा रहे हों। ऐसे शिक्षकों में ऐसे रसायनों के साथ काम करने का आत्मविश्वास शायद न हो। ऐसी स्थिति में विद्यार्थी सूचकों के बारे में केवल ‘तथ्य’ पढ़ सकते हैं।
ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए कक्षा-7 की पाठ्यपुस्तक का अध्याय-4 दो प्राकृतिक सूचकों का उदाहरण देता है : हल्दी और गुड़हल के फूलों का रस। वह दो सरल गतिविधियों (गतिविधि-4.2 और 4.3) द्वारा विद्यार्थियों को इन सूचकों को बनाने और दैनिक जीवन की कई वस्तुओं की अम्लीयता और क्षारीयता जाँचने के लिए कहता है।1 मैं अपने उस अनुभव को साझा कर रही हूँ जिसमें इन गतिविधियों का उपयोग करते हुए प्राकृतिक जगत के ऐसे अन्य पदार्थों की व्यापक खोज की शुरुआत की गई जो अम्ल-क्षार सूचक का कार्य कर सकें।
प्राकृतिक सूचकों के गुण
जब विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक की गतिविधियाँ-4.2 और 4.3 कर लें, उसके बाद शिक्षक इस ओर ध्यान आकर्षित कर सकते हैं कि ये दोनों सूचक पौधों के रस (extract) हैं। वास्तव में, सभी ज्ञात प्राकृतिक सूचक पौधों से ही आते हैं। वे विद्यार्थियों से पूछ सकते हैं कि क्या उन्होंने इन सूचकों में कोई अन्य साझा गुण देखे हैं। इस चर्चा से विद्यार्थी यह पहचान सकेंगे :
- अम्ल या क्षार के साथ सम्पर्क होने पर दोनों सूचकों के रंग में तेज़ी से स्पष्ट परिवर्तन होता है। शिक्षक यह बता सकते हैं कि कुछ सूचक ऐसे भी हैं जो गन्ध में परिवर्तन करते हैं। ऐसे गन्ध-आधारित सूचकों का औपचारिक परिचय तो कक्षा-10 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (2024-2025) के अध्याय-2 (‘अम्ल, क्षार और लवण’) में कराया गया है, लेकिन आप विद्यार्थियों से कह सकते हैं कि वे यह अवलोकन करने का प्रयास करें कि नींबू के रस और चूने के पानी से सम्पर्क होने पर प्याज़ और लौंग की गन्ध में क्या फ़र्क़ आता है।2
- दोनों सूचकों में अम्ल से सम्पर्क होने पर और क्षार से सम्पर्क होने पर उत्पन्न रंग भिन्न-भिन्न होते हैं। शिक्षक विद्यार्थियों से यह पूर्वानुमान लगाने के लिए कह सकते हैं कि क्या ये परिवर्तन पलटे जा सकते हैं और वे अपने उत्तर की जाँच कैसे करेंगे।
प्राकृतिक सूचकों के स्रोत
शिक्षक विद्यार्थियों से पूछ सकते हैं कि क्या वे ऐसे अन्य पौधों के रस के बारे में सोच सकते हैं जो प्राकृतिक सूचकों का कार्य कर सकें। विद्यार्थियों से कहा जा सकता है कि वे अपने पर्यावरण से कम-से-कम एक सम्भावित स्रोत (तने, पत्तियाँ, फूल, फल या/ और बीज) कक्षा में लेकर आएँ।
इस परीक्षण के लिए विद्यार्थी सम्भवतः कई रंगीन पौधों के भाग लेकर आएँगे। हर भाग का नाम बोर्ड पर लिखा जा सकता है। उस भाग को जो विद्यार्थी लाया है उसके बारे में उससे अधिक जानकारी पूछी जाए, जैसे वह किस पौधे का भाग है (वे स्थानीय नाम भी बता सकते हैं), यह पौधा उन्हें कहाँ मिला और उन्होंने कक्षा में लाने के लिए कौन-सा भाग चुना। उनसे यह भी पूछा जा सकता है कि वे ऐसा क्यों सोचते हैं कि उस पौधे का वह भाग एक अच्छा अम्ल-क्षार सूचक बनेगा। इस प्रश्न के उत्तर में विद्यार्थी यह बता सकते हैं कि उन्होंने कभी किसी घरेलू अम्लीय या क्षारीय पदार्थ से उस भाग में कोई रंग परिवर्तन देखा था। उदाहरण के लिए, सम्भवतः उन्होंने यह देखा हो कि लाल गोभी पर नींबू का रस डालने पर उसका रंग गुलाबी हो जाता है।
प्राकृतिक सूचकों की सम्भव सूची बन जाने पर विद्यार्थियों को यह बताया जा सकता है कि उनके रस कैसे निकालें।
सम्भावित सूचक बनाना
प्राकृतिक सूचक रंजकों को निकालकर बनाए जाते हैं (जैसे मेंहदी से लॉसोन और कई लाल, नीले और बैंगनी रंग के फलों, सब्ज़ियों, फूलों और पत्तियों से एन्थोसायनिन)। इन रंजकों को निकालने की प्रक्रिया चाय बनाने की प्रक्रिया के समान होती है। पौधे के उस भाग को एक विलायक में डुबोया जाता है। सबसे प्रचलित विलायक अल्कोहल है। लेकिन इसके स्थान पर पानी (ठण्डा, कुनकुना या उबलता हुआ) का भी उपयोग किया जा सकता है और विद्यार्थियों के लिए इसके साथ स्वयं काम करना सुरक्षित भी हो सकता है। इस मिश्रण को चाय की छन्नी या महीन कपड़े से छाना जाता है। इस प्रकार प्राप्त रंगीन द्रव का उपयोग एक सूचक के रूप में किया जाता है (देखें चित्र-1)।
कक्षा-7 की पाठ्यपुस्तक का अध्याय-4 इस प्रक्रिया का एक उदाहरण देता है : “गुड़हल की कुछ पंखुड़ियों को एक बीकर में रखिए। इस पर कुनकुना पानी डालिए। मिश्रण को तब तक रखिए जब तक पानी रंगीन न हो जाए। इस रंगीन पानी का उपयोग सूचक के समान करें।”1 यदि विद्यार्थियों ने गतिविधि-4.3 को कक्षा में किया है तो उन्होंने यह सूचक बनाया होगा। शिक्षक यह बता सकते हैं कि अन्य सूचकों को भी ऐसी ही विधि से ही बनाया जा सकता है। यह स्पष्ट करें उनकी सूची में शामिल पौधों के कुछ भागों के लिए छोटे परिवर्तनों की आवश्यकता हो सकती है (देखें शिक्षक मार्गदर्शिका-1)। विद्यार्थियों को टोलियों में काम करने के लिए प्रेरित करें और सूची में से कम-से-कम तीन विभिन्न स्रोतों से रंजकों के रस तैयार करें।

सम्भावित सूचकों की पहचान करना
4.2 और 4.3 गतिविधियों में विद्यार्थियों से कहा जाता है कि वे हल्दी और गुड़हल के रस का परीक्षण दैनिक जीवन के 7-8 पदार्थों पर करें। इनमें नींबू का रस और सिरका जैसे अम्लीय पदार्थ और खाने का सोडा तथा चूने के पानी जैसे क्षारीय पदार्थ शामिल हैं। इसी प्रकार विद्यार्थी अन्य पौधों के भागों से निकाले गए रसों का परीक्षण कर सकते हैं (देखें शिक्षक मार्गदर्शिका-2)। विद्यार्थियों को याद दिलाएँ कि प्राकृतिक सूचक वही दो गुण दिखाएँगे जो हल्दी औेर गुड़हल के सूचकों में थे।
बॉक्स-1 : पाठ्यचर्या से सम्बन्ध
प्राकृतिक सूचकों की खोज से सम्बन्धित गतिविधियाँ और चर्चा से शालेय शिक्षा की राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (2023) में वर्णित मिडिल स्टेज विज्ञान के निम्नलिखित उद्देश्य प्राप्त करने में मदद मिल सकती है :
- CG-1 : [विद्यार्थी] पदार्थों के घटक, गुणों और व्यवहार की खोज करते हैं। विशिष्ट रूप से यह विद्यार्थियों में निम्नलिखित दक्षता के विकास में सहायता कर सकता है : C-1.1 : “पदार्थो के अवलोकन-योग्य …..रासायनिक (शुद्ध, अशुद्ध, अम्ल, क्षार, धातु, अधातु, तत्व, यौगिक) लक्षण।”
- CG-6 : [विद्यार्थी] वैज्ञानिक ज्ञान के विकास और वैज्ञानिक खोजबीन के माध्यम से विज्ञान की प्रकृति एवं प्रक्रियाओं की खोज करते हैं। विशिष्ट रूप से, यह विद्याथियों में निम्नलिखित दक्षता विकसित करने में मदद कर सकता है : C-6.2 : “वैज्ञानिक शब्दावली का उपयोग करते हुए प्रश्न बना सकता है (किसी घटना के या वस्तुओं के व्यवहार के) और प्रमाण के रूप में प्राकृतिक पर्यावरण का अवलोकन करके आँकड़े एकत्रित कर सकता है, सरल प्रयोग बना सकता है और सरल वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग कर सकता है।”3
यह कक्षा-7 के विज्ञान के लिए निम्नलिखित अधिगम परिणामों को प्राप्त करने में सहायक हो सकता है : विद्यार्थी सरल खोज के माध्यम से ऐसे प्रश्नों के उत्तर खोज सकता है : क्या रंगीन फूलों से निकाले गए रस का उपयोग अम्ल-क्षार लवण के सूचक के रूप में किया जा सकता है?4
चलते-चलते
शालेय शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के अनुसार : “…विज्ञान सीखने का सबसे महत्त्वपूर्ण भाग यह है कि वास्तव में स्वयं हाथों से प्रयोगात्मक विधि से ‘विज्ञान करना’।”3 यह सरल, स्वयं अपने आस-पास के पर्यावरण से प्राकृतिक सूचकों के स्रोतों को खोजने का उपागम माध्यमिक शालाओं के विद्यार्थियों में रुचि और कौतुहल पैदा करने में बहुत प्रभावशाली हो सकता है।
प्राकृतिक सूचकों के सम्भावित स्रोतों का चयन करना विद्यार्थियों का ध्यान अपने घर और स्कूल के आस-पास पौधों की विविधता की ओर आकर्षित करने में सहायक हो सकता है। दैनिक जीवन में उपयोग वाली सामग्री (जैसे भिगोने के लिए पतीला और छानने के लिए चाय की छन्नी) से पौधों के रस तैयार करने और सम्भावित सूचकों की पहचान करने की प्रक्रिया से विद्यार्थियों में अधिक जुगाड़ु बनने की क्षमता विकसित हो सकती है।
नई सामग्रियों और विधियों की खोज, अपने अवलोकनों पर चर्चा और सामूहिक चिन्तन से उनके वैज्ञानिक कौशलों में वृद्धि करने में मदद मिल सकती है (देखें शिक्षक मार्गदर्शिका-3)। इस प्रकार, स्वयं के हाथों से करके सीखना विज्ञान की अवधारणाओं को न केवल मज़ेदार और रोचक बनाता है अपितु विद्यार्थियों की वैज्ञानिक ढंग से सोचने की क्षमता को बढ़ावा देता है (देखें बॉक्स-1)।
इस खोज के माध्यम से विद्यार्थी अपने आस-पास के कुछ पौधों या पौधों के भागों को पहचान सकेंगे जिनसे प्राकृतिक सूचकों का रस प्राप्त किया जा सकता है। इनमें हो सकते हैं :
- गुलाब, तितली मटर (अपराजिता) , अक्लीफ़ा (कुप्पी) और स्पाइडरवार्ट (बैंगनी दिल)।
- पेन्टास, पॉइनसेटिया और रंगून बेल की पत्तियाँ।
- लाल गोभी, लाल शकरकन्द और चुकन्दर जैसी सब्ज़ियाँ।
दैनिक जीवन की वस्तुओं की अम्लीयता और क्षारीयता परखने के लिए प्राकृतिक सूचकों का आसान उपयोग शिक्षकों को पाठ्यपुस्तक में दी गई अवधारणाओं को विद्यार्थियों के दैनिक जगत से जोड़ने के अवसर प्रदान करता है (देखें शिक्षक मार्गदर्शिका-4 और गतिविधि शीट)।
मैंने देखा है कि इस प्रकार अपने हाथों से करने का अनुभव विद्यार्थी-शिक्षक सम्बन्धों को अधिक दृढ़ बनाता है और सीखने के अधिक सामंजस्यपूर्ण वातावरण का निर्माण करता है। मेरे साथ काम करने वाले शिक्षकों ने बताया कि प्राकृतिक सूचकों के साथ काम करने से उन्हें जो आत्मविश्वास मिला उससे उन्हें माध्यमिक स्तर की पाठ्यचर्या के रसायनशास्त्र के अन्य विषयों में अपने हाथों से करने के अनुभवों को विकसित करने की प्रेरणा मिली। इसी प्रकार, इस विषय पर खोज-बीन से मुझे दैनिक जीवन की कम क़ीमत वाली सामग्री से कक्षा के लिए अन्य उपागम विकसित करने की प्रेरणा मिली।
मैं यह आशा करती हूँ इस लेख को पढ़ने वाले शिक्षकों को इस उपागम को कक्षा में उपयोग करने की प्रेरणा मिलेगी और वे अपने अनुभवों को साझा करेंगे ताकि हम एक-दूसरे से सीख सकें।
मुख्य बिन्दु
- मिडिल स्टेज विज्ञान पाठ्यचर्या विद्यार्थियों का परिचय ऐसे दो रंगीन, बिना खर्चे वाले, आसानी से प्राप्त किए जा सकने वाले और सुरक्षित रूप से प्रयोग में लाए जा सकने वाले अम्ल-क्षार सूचकों से करवाता है जो रासायनिक सूचकों के विकल्प हैं।
- विद्यार्थियों को अपने आस-पास से प्राकृतिक सूचकों के अन्य स्रोतों की ‘खोज’ करने के लिए मौक़ा देने से कई वैज्ञानिक कौशलों का विकास करने में मदद मिल सकती है, जिनमें साधन सम्पन्न बनने की क्षमता, अवलोकन करने की क्षमता और सहयोगात्मक अनुसन्धान में भाग लेने की क्षमता शामिल है।
- इस प्रकार के अनुभव-आधारित अधिगम से विद्यार्थियों की रुचि बढ़ सकती है, वे अधिक गहराई से पाठ्यपुस्तक में आई अम्ल और क्षार की अवधारणाओं को समझ सकते हैं और उनमें एक वैज्ञानिक के समान सोचने की क्षमता का विकास हो सकता है। ऐसे अनुभव शिक्षक-विद्यार्थी सम्बन्धों को सुदृढ़ भी बना सकते हैं और अधिगम वातावरण को अधिक सौहार्द्रपूर्ण बना सकते हैं।
टिप्पणियाँ
- Credits for the image (Turmeric powder) used in the background of the article title: Formulate Health (Flickr.com). URL: https://www.flickr.com/photos/formulatehealth/50191150578/in/photostream/. License: CC BY 2.0.
- इस लेख में पाँच अलग-अलग कक्षा संसाधन शामिल हैं : शिक्षक मार्गदर्शिका-। : सम्भावित प्राकृतिक सूचकों को प्राप्त करना; शिक्षक मार्गदर्शिका-II : प्राकृतिक सूचकों में रंग परिवर्तन; शिक्षक मार्गदर्शिका-III : अन्य प्राकृतिक सूचकों की खोज; शिक्षक मार्गदर्शिका-IV : प्राकृतिक सूचकों के उपयोगों की छानबीन और गतिविधि शीट : एक संकेतक जासूस बनें!
सन्दर्भ
- National Council of Educational Research and Training (2024). ‘Chapter 4: Acids, Bases, and Salts’. Science Textbook for Grade VII: 38-46. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?gesc1=4-13.
- National Council of Educational Research and Training (2024). ‘Chapter 2: Acids, Bases, and Salts’. Science Textbook for Grade X: 17-36. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?jesc1=2-13.
- National Steering Committee for National Curriculum Frameworks (2023). ‘National Curriculum Framework for School Education 2023’. National Council of Educational Research and Training. URL: https://ncert.nic.in/pdf/NCFSE-2023-August_2023.pdf.
- National Council of Educational Research and Training. ‘Learning Outcomes at the Elementary Stage’. First Edition. National Council of Educational Research and Training (2017). URL: https://ncert.nic.in/pdf/publication/otherpublications/tilops101.pdf.