पिनहोल कैमरा बनाना और इस्तेमाल करना

अनुवाद : गणेश मादुलकर | पुनरीक्षण : सुशील जोशी | कॉपी एडिटर : अनुज उपाध्याय

शिक्षक पिनहोल कैमरों के अपने स्वयं के मॉडल बनाने और उनका परीक्षण करने के अनुभव से क्या सीख सकते हैं?

इस साल 25 और 26 अप्रैल को, मैं ‘प्रकाश’ विषय पर कक्षा-6 से 8 तक के सरकारी स्कूलों के विज्ञान शिक्षकों के साथ एक कार्यशाला का संचालन कर रही थी। इस कार्यशाला का उद्देश्य ऐसी शिक्षण-अधिगम सामग्री बनाने के तरीक़े खोजना था, जो पाठ्यपुस्तक में दिए गए तरीक़ों से अलग हों। उदाहरण के लिए इसमें शामिल थे परावर्तन समझाने के लिए अगरबत्ती के ख़ाली डिब्बे से पेरिस्कोप बनाना और बहु-छवि निर्माण समझाने के लिए कैलीडोस्कोप (बहुदर्शी) बनाना। इसी तरह हम एक पिनहोल कैमरा भी बनाना चाहते थे। पिनहोल कैमरा बनाने की एक विधि कक्षा-6 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2020-2021) के अध्याय-8 ‘प्रकाश, छाया और परावर्तन’ में दी गई है।1 यही विधि कक्षा-7 की नवीनतम विज्ञान पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025-2026) के अध्याय-11 ‘प्रकाश : छाया और परावर्तन’ में भी शामिल है।2 लेकिन मुझे यह मॉडल थोड़ा भारी-भरकम लगा। मैं एक आसान तरीक़ा ढूँढ़ रही थी। मुझे आई वंडर…दिसम्‍बर,2024 के अंक में शिव पाण्डेय का लेख ‘मॉडल निमार्ण का शिक्षणशास्‍त्र : पिनहोल कैमरा’ मिला।3 इस लेख के साथ एक कक्षा-संसाधन भी दिया गया था, जिसका नाम था “गतिविधि शीट : अपना पिनहोल कैमरा बनाएँ”।4 यह संसाधन ऐसे कई हिस्सों में बँटा हुआ है जो यह निर्देश देते हैं कि मॉडल कैसे बनाना है, उसका उपयोग कैसे करना है, शिक्षक क्या-क्या देख सकते हैं और सबसे महत्त्वपूर्ण, विद्यार्थियों से किन मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए। यह शिक्षकों को न केवल इस टीएलएम को बनाने में बल्कि इसका उपयोग करके प्रकाश के सिद्धान्तों को बच्चों की कक्षा के स्तर के अनुसार अच्छी तरह समझा पाने में मदद करता है। जब मैंने गतिविधि शीट में बताए गए मॉडल को स्‍वयं बनाकर देख लिया कि यह सही तरीक़े से काम करता है, तब मैंने तय किया कि इस संसाधन का कार्यशाला में उपयोग करूँ।

कार्यशाला में मॉडल बनाना

मैंने सत्र की शुरुआत शिक्षकों को उक्‍त लेख का हिन्दी अनुवाद (ऑनलाइन संस्करण) को दिखाकर की।5 किसी भी शिक्षक ने पहले यह लेख नहीं पढ़ा था। इसलिए मैंने उनसे इसमें दिए गए मुख्‍य विचारों पर संक्षेप में बातचीत की। इसके बाद मैंने प्रत्‍येक प्रतिभागी को गतिविधि शीट की एक फोटोकॉपी दी और उन्हें 10-20 मिनट का समय दिया ताकि वे इसे पढ़ सकें। पढ़ने के बाद मैंने उनसे चर्चा करवाई। चर्चा के दौरान मैंने ऐसे प्रश्न पूछे − इस गतिविधि का मूल सिद्धान्त क्या है? क्या यह अवधारणा माध्यमिक स्तर (कक्षा 6-8) के विज्ञान पाठ्यक्रम का हिस्सा है? आप इस अवधारणा को कक्षा में कैसे समझाते हैं? क्या आप यह मॉडल बनाना चाहेंगे? इसे बनाने के लिए किन सामग्रियों की आवश्यकता होगी? जब मैंने देखा कि वे मॉडल बनाने के लिए उत्साहित हैं, तो मैंने उन्हें इसे बनाने के लिए कहा।

शिक्षकों को समूहों में बाँटा गया। प्रत्येक समूह में 4-5 शिक्षक थे। मैंने मॉडल बनाने के लिए प्रत्‍येक समूह को सामग्री उपलब्ध कराई − जैसे डिस्पोज़ेबल कप, काला मार्कर पेन, बटर पेपर, गोंद और फ़ेविकॉल की ट्यूब, सुई और रबर बैंड। शिक्षक समूह में थे और सामग्री भी साझा थी, पर हर शिक्षक ने अपना-अपना मॉडल बनाया। शिक्षकों को रचनात्मक रूप से सोचने के लिए प्रेरित करने हेतु मैंने उनसे कहा, “गतिविधि शीट में जो प्रक्रिया दी गई है, वह इस मॉडल को बनाने का एक तरीक़ा है। यदि आप चाहें, तो अपना मॉडल बनाने के लिए अन्य तरीक़े भी आज़मा सकते हैं।” कार्यशाला के दौरान कमरे में घूमते हुए मैंने देखा कि कुछ शिक्षकों ने अपने मॉडल में छोटे-छोटे बदलाव करना शुरू कर दिया था। उदाहरण के लिए, गतिविधि शीट में कप के किनारे और पेंदे को काले मार्कर पेन से काला करने को कहा गया था। लेकिन कुछ शिक्षकों ने काले पोस्टर कलर की माँग की और अपने कप की सतह को काला करने के लिए पेंटब्रश का इस्‍तेमाल किया। (देखें चित्र-1) एक शिक्षक ने कमरे में रखी काली स्याही की बोतल देखकर उसका इस्तेमाल करने की कोशिश की। लेकिन फिर यह देखने के बाद कि प्रकाश को प्रभावी ढंग से रोक पाने के लिए वह स्‍याही पर्याप्त काली नहीं है, उन्‍होंने यह विचार छोड़ दिया।

चित्र-1 : कुछ शिक्षकों ने अपने कप को रंगने के लिए काले पोस्टर कलर का इस्तेमाल किया। Credits: Ankita Chaturvedi. License: CC BY-NC-ND 4.0.

एक अन्य शिक्षक ने कप के किनारों को ढँकने के लिए काली शीट की पट्टी का प्रयोग किया। (देखें चित्र-2) गतिविधि शीट में यह भी बताया गया था कि कप के मुँह पर गोंद से बटर पेपर चिपकाएँ। यह बटर पेपर पिनहोल कैमरे द्वारा बनाई गई छवि को पकड़ने के लिए एक ‘स्‍क्रीन’ का काम करेगा। मैंने एक समूह से कहा कि वे बटर पेपर की जगह ट्रेसिंग पेपर का प्रयोग करके देखें। इसका विचार मुझे कार्यशाला के लिए सामग्री ख़रीदते समय आया था। बटर पेपर ट्रेसिंग पेपर के पास ही रखा था। ट्रेसिंग पेपर के टेक्सचर को देखते हुए मेरे मन में सवाल आया कि यह पिनहोल कैमरे से बनने वाली छवि की स्‍पष्‍टता को किस प्रकार प्रभावित करेगा? एक शिक्षक ने स्‍क्रीन के लिए सामान्य से बड़ा बटर पेपर लिया जिससे कप का आधे से ज़्यादा हिस्सा ढँक गया।

चित्र-2 : एक शिक्षक ने कप के किनारों को ढँकने के लिए काली शीट की पट्टी का प्रयोग किया। Credits: Ankita Chaturvedi. License: CC BY-NC-ND 4.0.

कुछ शिक्षकों ने परदा चिपकाने के लिए गोंद या फ़ेविकॉल का प्रयोग किया, जबकि कुछ ने रबर बैंड का। इन बदलावों से बहुत अच्छी चर्चाएँ शुरू हुईं, जैसे क्या बटर पेपर के आकार से प्रतिबिम्ब की स्पष्टता पर असर पड़ेगा? कप की साइड और पेंदे को काला क्यों करते हैं? क्या ट्रेसिंग पेपर पर बनने वाला प्रतिबिम्ब उतना ही साफ़ होगा जितना बटर पेपर पर बनता है? इन चर्चाओं ने न सिर्फ़ सत्र को और अधिक संवादात्‍मक बनाया वरन शिक्षकों की प्रकाश से जुड़ी अवधारणाओं में रुचि को भी बढ़ाया।

चित्र-3 : शिक्षकों ने मोमबत्ती की लौ की मदद से अपने मॉडल पिनहोल कैमरों की स्क्रीन पर बनी छवियों की स्पष्टता का परीक्षण किया। Credits: Ankita Chaturvedi. License: CC BY-NC-ND 4.0.

जब हमारे सभी मॉडल तैयार हो गए, तो हमने मोमबत्तियाँ जलाईं और गतिविधि शीट में दिए गए प्रश्नों व संकेतों के अनुसार अवलोकन करते हुए उनका परीक्षण किया (देखें चित्र-3)। शिक्षकों ने इस प्रक्रिया में बहुत उत्साह के साथ भाग लिया। मैंने उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे हर प्रश्न के सामने अपने अवलोकन लिखें, ताकि उन्‍होंने जो भी किया और देखा उसका रिकॉर्ड रखा जा सके। एक रोचक अवलोकन यह था कि ट्रेसिंग पेपर के स्‍क्रीन पर बना प्रतिबिम्ब बटर पेपर की तुलना में अधिक स्पष्ट था।

चलते-चलते

कुल मिलाकर यह शिक्षकों और मेरे लिए एक शानदार अनुभव था। कई शिक्षकों ने कक्षा में पिनहोल कैमरा बनाना दिखाने के लिए पाठ्यपुस्तक में दी गई विधि का उपयोग किया था। लेकिन उन्हें शिव पाण्डेय की गतिविधि शीट में दी गई विधि इतनी सरल लगी कि उसके निर्देशों का पालन करके बच्चे ख़ुद भी आसानी से अपना मॉडल बना सकते हैं। गतिविधि शीट में दिए गए अवलोकन और चर्चा के संकेत भी बहुत विशिष्ट और स्पष्ट हैं। इनसे शिक्षकों को उन चर्चाओं के बारे में सोचने में मदद मिली, जो वे अपने विद्यार्थियों के साथ इस गतिविधि को करवाते समय कर सकते हैं। शिक्षकों ने कार्यशाला में हमारे इस सहयोगी दृष्टिकोण को भी सराहा − जैसे एक समूह में संसाधन साझा करना, लेकिन अपने-अपने मॉडल बनाना; एक-दूसरे की मदद करना; और एक-दूसरे के साथ अपने अवलोकनों और अनुभवों पर चर्चा करना। उन्होंने अपनी कक्षाओं में इसी तरह के दृष्टिकोण का उपयोग करने की मंशा भी व्‍यक्‍त की।

इस लेख ने शिक्षकों को लीक से हटकर सोचने और पाठ्यपुस्तक में दी गई गतिविधि को करने के वैकल्पिक तरीक़ों की तलाश करने में मदद की। उन्होंने कार्यशाला में इस सत्र के हर चरण में पूरे जोश और रुचि के साथ भाग लिया। विभिन्‍न कारकों (जैसे कमरे में लाइट स्विच ऑफ़ करना, मोमबत्ती और छिद्र के बीच की दूरी को समायोजित करना आदि) के प्रभाव को देखना और चर्चा करना कि यह उनके मॉडल की स्‍क्रीन पर उत्‍पन्‍न छवि की स्पष्टता पर क्या प्रभाव डालता है। कई शिक्षकों ने अपने अवलोकनों के बारे में सवाल पूछे और जो कुछ सीखा उसे अपने साथियों के साथ साझा किया। उन्‍हें सुनते समय मैं यह देख सकती थी कि इस अभ्‍यास ने न केवल उन्‍हें पिनहोल कैमरा बनाने का एक अलग तरीक़ा सिखाया था, बल्कि अन्‍तर्निहित अवधारणाओं के साथ उनके जुड़ाव को भी बढ़ाया था। गतिविधि शीट ने एक ऐसा वातावरण बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसने उनके सीखने में मदद की। यही सही संसाधन उपयोग करने का जादू है।

टिप्पणियाँ

  • The image (Constructing a Pinhole Camera) used in the background of the article title was created for i wonder… using ChatGPT, under prompting by Vijeta Raghuram (Aug 2025). License: CC BY-NC-ND 4.0.
  • लेख के हिन्‍दी अनुवाद की समीक्षा के लिए हम हृदय कान्‍त दीवान के आभारी हैं।

सन्दर्भ

  1. National Council of Educational Research and Training (2020-2021). ‘Chapter 8: Light, Shadows, and Reflections’. Science Textbook for Grade VI: 110. URL: https://betrained.in/CBSE/6-Science/Light-Shadows-And-Reflections.
  2. राष्‍ट्रीय शैक्षिक अनुसन्‍धान और प्रशिक्षण परिषद (2025-2026)। ‘अध्‍याय-11: प्रकाश : छाया एवं परावर्तन’। जिज्ञासा, कक्षा-7 की विज्ञान पाठ्यपुस्‍तक : 163. URL: https://ncert.nic.in/textbook/pdf/gecu111.pdf.
  3. Pandey, Shiv (2024). ‘The Pedagogy of Making: Pinhole Camera’. i wonder… (11): 4-10. ISSN 2582-1636. URL: https://publications. azimpremjiuniversity.edu.in/5894/.
  4. Pandey, Shiv (2024). ‘Activity Sheet: Make Your Own Pinhole Camera’. i wonder… (11): 9-10. ISSN 2582-1636. URL: https://publications. azimpremjiuniversity.edu.in/5893/.
  5. पाण्डेय, शिव (2024) ‘मॉडल निर्माण का शिक्षणशास्त्र: पिनहोल कैमराः आई वंडर… रीडिस्कवरिंग स्कूल साइंस (11). 4-12. URL: https:// anuvadasampada.azimpremjiuniversity.edu.in/4979/.