‘तैरना’ और ‘डूबना’ हमें कब आश्चर्यचकित करते हैं?

स्कूली विज्ञान में अकसर हम ‘देखने’ से ज़्यादा ‘समझने’ (व्याख्या करने) पर ज़्यादा ध्यान देते हैं, और कभी-कभी ‘देखने’ वाले हिस्से को पूरी तरह से छोड़ ही देते हैं। उदाहरण के लिए, कक्षा-4 की पर्यावरण अध्ययन की पाठ्यपुस्तक (एनसीईआरटी, 2025-2026) का अध्याय-7 (‘वस्तुएँ कैसे कार्य करती हैं’) तैरने और डूबने की जाँच का सुझाव देता है।1 फिर भी, हम अकसर पाठ्यपुस्तक के रटे-रटाए तथ्यों और बचपन की याद रह गई कहानियों के आधार पर ही इस जाँच का नतीजा तय कर लेते हैं। प्यासे कौवे की प्रसिद्ध कहानी को ही लीजिए: उसे पानी का एक मटका मिलता है, लेकिन पानी का स्तर इतना नीचा होता है कि वह वहाँ तक पहुँच नहीं पाता। वह चतुराई से मटके में तब तक कंकड़ डालता है जब तक कि पानी इतना ऊपर न आ जाए कि वह उसे पी सके।2 चूँकि हम इस कहानी को बहुत अच्छी तरह से जानते हैं, इसलिए “पत्थर डूबते हैं“, “पत्तियाँ तैरती हैं“, और “डूबने वाली वस्तुओं को पानी में डालने से उसका स्तर बढ़ सकता है” जैसे निष्कर्ष इतने स्पष्ट लगते हैं कि हम उन्हें नियम मान लेते हैं।3 हम यह मान लेते हैं कि ये नियम हमें बताते हैं कि ‘सभी’ वस्तुएँ कैसा व्यवहार करेंगी, इसलिए हमें वास्तव में उनका परीक्षण करने की कोई आवश्यकता महसूस नहीं होती।
यहाँ एक पहेली है जो आपको अपनी धारणाओं का परीक्षण करने के लिए आमंत्रित करती है। कल्पना कीजिए कि आप वही कौवा हैं, और ऐसी वस्तुओं की तलाश कर रहे हैं जो पानी के स्तर को इतना बढ़ा सकें कि वह आपकी पहुँच में आ जाए।4 आपके आस-पास रोज़मर्रा की कई तरह की वस्तुएँ हैं (तालिका-1 देखें)। हम आपको पहले यह अनुमान लगाने से शुरुआत करने का निमंत्रण देते हैं कि ये वस्तुएँ कैसा व्यवहार करेंगी, और फिर अपने अनुमानों का परीक्षण करें। इसका उपयोग उन चीज़ों की पहचान करने के लिए करें जो आपको हैरान करती हैं, और इस बात पर विचार करें कि स्वयं प्रयोग न करने पर हम किन चीज़ों पर ध्यान देते हैं और क्या-क्या छोड़ देते हैं — और इस आधार पर तैरने व डूबने के प्रति आपकी समझ कैसे और क्यों बदलती है। यहाँ उद्देश्य सही होना नहीं है; बल्कि यह समझना है कि जब हम स्वयं चीज़ों को करके नहीं देखते, तो हम क्या देखते हैं और क्या देखने से चूक जाते हैं।
- बर्तन चुनें : कौए के पास कोई विकल्प नहीं था, लेकिन आपके पास है। किस तरह के बर्तन में पानी के स्तर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को देखना आपके लिए आसान होगा? लम्बा और सँकरा बर्तन या छोटा और चौड़ा बर्तन? सीधी दीवारों वाला या तिरछी दीवारों वाला? पारदर्शी या अपारदर्शी? कौन-सी विशेषताएँ महत्त्वपूर्ण हैं, और क्यों?
- विचारों को वस्तुओं से जोड़ें : वस्तुओं को देखने से पहले थोड़ा रुकें और ख़ुद से पूछें : कौए की तरकीब कारगर होने के लिए उस वस्तु में क्या-क्या लक्षण होना ज़रूरी है? जितनी भी शर्तें आप सोच पाएँ, उनकी सूची बनाएँ। कोशिश करें कि वस्तुओं के नाम लिखने की बजाय उनके गुण या व्यवहार बताएँ। उदाहरण के लिए, क्या वह वस्तु पानी की सतह के नीचे जगह घेरती है, बर्तन में बनी रहती है, पानी की सतह के ऊपर हल्के-से तैरते रहने के बजाय पानी को एक ओर हटाती है, या समय के साथ अपना असर बनाए रखती है? उसकी आकृति और आकार बर्तन पर किस तरह असर डालते हैं? ध्यान दें कि ‘भारी’, ‘डूब जाने वाला’ या ‘पत्थर से बना’ जैसे विचार इस सवाल का जवाब नहीं होंगे। सूची बनाने के बाद सोचें कि कौन-सी ठोस वस्तुएँ इन शर्तों पर खरी उतर सकती हैं (तालिका-2 देखें)।
| लकड़ी की छड़ी | सूखे स्पंज का एक टुकड़ा | धागे का एक छोटा टुकड़ा |
| डबलरोटी या रोटी का एक टुकड़ा | गुड़-मुड़ किए काग़ज़ से बनी एक छोटी गेंद | थोड़े-से मुरमुरे |
| पानी की बोतल का ढक्कन | खोपरे (सूखा नारियल) के कुछ टुकड़े | प्लास्टिक की गेंद |
| लकड़ी की एक छोटी-सी पेंसिल | एक बिस्कुट | धातु की बनी 10 पेपर क्लिप |
| चॉक के टुकड़े | अलग-अलग तरह के बटन | माचिस का एक खाली डिब्बा |
| कुछ ताज़ी और कुछ सूखी पत्तियाँ | एल्युमीनियम फॉइल का एक चपटा टुकड़ा | थोड़े पके हुए जामुन (फल) |
| बिना ढक्कन लगी कोल्डड्रिंक की एक छोटी ख़ाली बोतल | कोल्डड्रिंक की एक छोटी बोतल जिसमें थोड़ा-सा रस है और ढक्कन कसकर बन्द है। | मुट्ठी भर मूँग दाल के बीज |
| एक शार्पनर | थर्माकोल का एक टुकड़ा | काँच की एक चूड़ी |
| मुट्ठी भर बिना छिली मूँगफली | कुछ सिक्के | कुछ फूल |
| इस्तेमाल हुए साबुन का टुकड़ा | एक कच्चा अण्डा | मिट्टी की छोटी लोई |
- अपने पूर्वानुमानों को पक्का करें : अब बिना कोई जाँच किए नीचे दिए गए
प्रश्नों के उत्तर दें :
- यदि आपका उद्देश्य पानी के स्तर को जल्दी-से-जल्दी ऊपर उठाना हो, तो आप सबसे पहले कौन-सी पाँच वस्तुएँ चुनेंगे?
- किन तीन वस्तुओं के व्यवहार के बारे में पक्के तौर पर कुछ भी कहना आपको मुश्किल लगता है, लेकिन आप उन्हें आज़माकर देखना चाहते हैं?
- कौन-सी वस्तुएँ एक-दूसरे से काफ़ी अलग दिखती हैं, लेकिन आपको लगता है कि पानी में उनका व्यवहार एक जैसा हो सकता है?
ग़ौर करें कि किन विकल्पों पर आपको पूरा भरोसा है और किनका आधार केवल अन्दाज़ा है।
| क्रमांक | किन बातों पर सोचें | तालिका-1 में दी गई कौन- सी वस्तुएँ (लगभग 2-4) इसमें फिट हो सकती हैं? | आप ऐसा क्यों सोचते हैं? इस पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें। |
|---|---|---|---|
| 1 | आकृति का असर : एक ही पदार्थ से बनी वस्तुएँ अलग तरह से व्यवहार कर सकती हैं, यदि उनकी आकृति अलग हो (चपटी, गुड़ी-मुड़ी, खोखली, ठोस)। | ||
| 2 | फँसी हुई हवा : वस्तु शुरू में अपने साथ हवा को पानी में ले जा सकती है, भले ही बाद में वह डूब जाए या बदल जाए। | ||
| 3 | पानी सोखना और समय के साथ बदलाव : वस्तु पानी को सोख सकती है, फूल सकती है, नरम हो सकती है या टूट सकती है। | ||
| 4 | रखने का तरीक़ा और सन्तुलन : वस्तु को कैसे रखा जाता है इससे उसके डूबने-तैरने पर असर पड़ सकता है (धीरे से, तिरछाकर, गिराकर)। | ||
| 5 | एक ही पदार्थ, अलग व्यवहार : यह ज़रूरी नहीं कि जो वस्तुएँ मिलते-जुलते पदार्थ की बनी लगती हैं, वे पानी में एक जैसा व्यवहार करें। | ||
| 6 | भारी लगती है : जो वस्तुएँ देखने में डूबने वाली लगती हैं, लेकिन फिर भी पानी का स्तर प्रभावी रूप से बढ़ा सकती हैं। |
- अपने पूर्वानुमानों की जाँच करें : आपने जो भी बर्तन चुना है, उसमें पानी भरें। फिर एक-एक करके वस्तुओं को उसमें डालें। केवल यह न देखें कि वस्तु कहाँ जाती है, बल्कि यह भी देखें कि कुछ क्षण बाद क्या होता है। जाँच करते समय खु़द से पूछते रहें : कौन-से विचार सही साबित हुए? कौन-से बदले? क्या कुछ ऐसा दिखा जो बिना आज़माए पता नहीं चलता? कौन-से परिणाम सबसे ज़्यादा आश्चर्यचकित करने वाले थे?
- द्रव बदलें : अगर आप पानी की जगह कोई और द्रव इस्तेमाल कर सकते तो क्या होता? इन्हीं वस्तुओं का उपयोग करने पर कौन-से द्रव का स्तर सबसे तेज़ी से ऊपर उठेगा, और क्यों? इन विकल्पों पर विचार करें : (i) साधारण पानी, (ii) खारा पानी, (iii) चीनी का घोल, (iv) ताज़ा नींबू का रस, (v) बोतलबन्द फलों का रस या (vi) दूध। क्या सभी वस्तुएँ इन सभी द्रवों में समान व्यवहार करेंगी? कौन-से द्रव के परिणाम आपको फिर से आश्चर्यचकित कर सकते हैं?
- एक विशेष स्थिति पर ध्यान दें : ‘तैरने’ और ‘डूबने’ के बारे में कोई भी निष्कर्ष निकालने से पहले इस प्रयोग को पानी से भरे एक नए बर्तन में करें। एक सुई को बहुत धीरे से पानी की सतह पर रखें। फिर उसी सुई को एक छोटे से टिशू पेपर पर रखकर सावधानी से पानी की सतह पर रखें। आप क्या देखते हैं? इस स्थिति में सुई किस अर्थ में ‘तैर’ रही है? क्या तैरने का मतलब हमेशा यह होता है कि उस वस्तु को पानी से सहारा मिल रहा है क्योंकि वह हल्की है या फैली हुई है? ध्यान दें कि जो आप देखते हैं, उसे ‘तैरना’ और ‘डूबना’ जैसे शब्द पूरी तरह स्पष्ट नहीं कर पाते। अभी आपको इसका कारण समझाने की ज़रूरत नहीं है। यह केवल याद दिलाने के लिए है कि कुछ अवलोकन हमारी स्थापित श्रेणियों (categories) को चुनौती देते हैं।
- मनन करें : जिस बात ने हमें आश्चर्यचकित किया उसके कारण ऐसे पहेलीनुमा प्रयोग हमें अकसर याद रह जाते हैं। लेकिन इनका असली महत्त्व इस बात में है कि ये हमें बाद में क्या सोचने पर मजबूर करते हैं। अपने पूर्वानुमानों, अवलोकनों और जिसने आश्चर्यचकित किया उस पर दोबारा नज़र डालें। फिर सोचें :
- आपके अवलोकनों में सबसे ज़्यादा किसका महत्त्व था : वस्तु का पदार्थ, उसका आकार और आकृति, या द्रव में डाले जाने के बाद उसका व्यवहार?
- क्या हर बार डूबने का मतलब यही रहा कि वस्तु पानी का स्तर बढ़ाने में ‘उपयोगी’ है? और क्या हर बार तैरने का मतलब यह था कि वह पानी का स्तर बढ़ाने में ‘उपयोगी नहीं’ है?
- यदि आपका पूर्वानुमान आपके अवलोकन से अलग निकला, तो क्या आपने अपनी व्याख्या को अवलोकन के अनुसार बदला? या फिर आपने यह जाँचने की कोशिश की कि कहीं आपके अवलोकन में कोई त्रुटि तो नहीं थी या अवलोकन सीमित तो नहीं थे? अपने सोचने के तरीक़े को समझाएँ।
इन्हीं प्रश्नों पर मनन करने से हमारे अवलोकन समझ में बदलते हैं। जब हम अपने ही पूर्वानुमानों, हिचकिचाहटों और उनमें किए गए संशोधनों को ठहरकर परखते हैं, तो हम वैसी ही सोच का अभ्यास करते हैं, जिसकी अपेक्षा हम विद्यार्थियों से करते हैं, लेकिन अकसर हम ख़ुद ऐसा करने के लिए समय नहीं निकाल पाते। अपनी कक्षा को ध्यान में रखते हुए इन बातों पर विचार करें :
- यदि किसी विद्यार्थी ने वही पूर्वानुमान करें हों जो आपने किए, तो उसे किन बातों पर ध्यान देने में मदद की ज़रूरत होगी?
- हम कितनी बार विद्यार्थियों से यह अपेक्षा करते हैं कि वे चीज़ों को स्वयं करके देखे बिना, उनका अवलोकन किए बिना, प्रतीक्षा किए बिना और अपने विचारों में बदलाव किए बिना ही, केवल सावधानीपूर्वक तर्क के आधार पर ही पूर्वानुमान लगाएँ?
चलते-चलते
यह पहेली उसी तरह की सोच को सामने लाती है, जिसका अभ्यास हम विद्यार्थियों को करवाना चाहते हैं — पूर्वानुमान लगाना, अवलोकन करना और मान्यताओं पर निर्भर रहने के बजाय अपने विचारों में बदलाव करना। जब हम इसे ख़ुद आज़माते हैं, तो बारीकियों पर ध्यान देना सीखते हैं, आश्चर्यचकित करने वाले परिणामों का सामना करते हैं और अपने तर्क पर विचार करते हैं — ठीक वैसे ही जैसे विद्यार्थियों को करने की ज़रूरत होती है। इससे हमें ग़लत धारणाओं का अन्दाज़ा लगाने, अवलोकन करने में मदद करने और बेहतर समझ विकसित करने वाले प्रश्न पूछने में मदद मिलती है। संक्षेप में, यह पहेली कक्षा की पढ़ाई से कोई अलग चीज़ नहीं है; असल में यह विद्यार्थियों द्वारा खु़द की गई वास्तविक खोज-बीन में ध्यान देने, मार्गदर्शन करने और मदद देने का पूर्वाभ्यास है।
टिप्पणियाँ
- इस लेख में लेखकों के नाम और परिचय जिस क्रम में दिए गए हैं, वह इस बात को दर्शाता है कि योगदान किस क्रम में किए गए। जिन्होंने पहले ठोस योगदान दिया, उनका नाम पहले रखा गया है और जिन्होंने अन्त में योगदान किया, उनका नाम बाद में। शैक्षणिक लेखों के विपरीत, यहाँ यह क्रम हर लेखक के योगदान की मात्रा या महत्त्व को नहीं दर्शाता है।
- लेख के हिन्दी अनुवाद की समीक्षा के लिए हम हृदय कान्त दीवान के आभारी हैं।
सन्दर्भ
- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (2025)। ‘इकाई-4 : हमारे आस-पास की वस्तुएँ’। हमारा अद्भुत संसार, पर्यावरण विज्ञान की कक्षा-4 की पाठ्यपुस्तक (हमारे आस-पास की दुनिया) : 102-103. URL: https://ncert.nic.in/textbook.php?deev1=7-10.
- यादव, मनीष (2021)। ‘मज़ा आर्किमिडीज़ सिद्धान्त के साथ’। आई वंडर…, 6: 20-23. URL: https://anuvadasampada.azimpremjiuniversity.edu.in/2555/.
- शर्मा, अंशिका (2025)। ‘अनुभव करना कि चीज़ें कैसे काम करती हैं’। आई वंडर…, 13: 39-47. URL: https://anuvadasampada.azimpremjiuniversity.edu.in/5428/.
- Classic Aesopica. (n.d.). ‘The crow and the pitcher’. URL: https://www.classicaesopica.com/crow-and-pitcher.